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उत्तर कोरिया की जेल में दी जाती हैं ऐसी यातनाएं, सोचकर ही दहल उठेगा दिल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, प्योंगयांग। Updated Tue, 20 Oct 2020 12:13 AM IST
Kim Jong Un
Kim Jong Un - फोटो : Daily express

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उत्तर कोरिया में कानून व्यवस्था कितनी लचर है इस बात का खुलासा सोमवार को आई एक रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया से गुजरने वाले लोगों की स्थिति बेहद दयनीय है। खुलेआम मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है। यहां तक कि अपारदर्शी कानूनी प्रक्रिया के तहत लोगों को जेल में बंद कर दुर्व्यवहार और प्रताड़ित किया जाता है। पीटे जाने और तनाव की स्थिति का इस्तेमाल बंदियों को यातना देने के लिए होता है।
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इस रिपोर्ट के अनुसार हिरासत में रखे जाने के दौरान बंदियों को अत्याचार, अपमान और जबरदस्ती गुनाह कबूलने जैसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां स्थिति इतनी भयावह है कि लोग इन बंदियों को 'कम से कम एक जानवर' मानकर भी उचित व्यवहार नहीं करते।
यह रिपोर्ट अमेरिका की ह्यूमन राइट्स वॉच ने पेश की है। इसमें उत्तर कोरिया के पूर्व बंदियों और पूर्व अधिकारियों के दर्जनों साक्षात्कारों के आधार पर खुलासे किए गए हैं। इसमें कहा गया कि हिरासत के दौरान सामने आने वाली अमानवीय स्थितियों को अक्सर अत्याचार कहा जाता है।
बता दें कि परमाणु-हथियार संपन्न उत्तर कोरिया एक 'बंद' अर्थव्यवस्था वाला देश है। इसकी आपराधिक न्याय प्रणाली के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र और उसके अन्य आलोचक देश उत्तर कोरिया में व्यापक तौर पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाते रहे हैं। 

साक्षात्कार देने वाले कई लोगों ने बताया कि थोड़े समय के लिए हिरासत में रखे गए लोगों को छड़ी से पीटना या लात मारना प्रताड़ना का बेहद शुरूआती दौर होता है। एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा, नियमों के अनुसार कोई भी मारपीट नहीं होनी चाहिए, लेकिन हमें प्रारंभिक तौर पर जांच और प्रारंभिक चरणों के दौरान आरोपी के खुद गुनाह कबूले जाने की आवश्यकता होती है। ऐसे में आपको स्वीकारोक्ति पाने के लिए उन्हें मारना-पीटना होगा।

पूर्व बंदियों ने कहा कि उन्हें फर्श पर अकेले घुटने के बल या एक पैर पर दूसरा पैर रखकर बैठने के लिए मजबूर किया जाता था, ऐसा उन्हें दिन के 16 घंटे तक करना होता था। यहां तक कि जरा सी हरकत करने पर सजा दी जाती थी। यह सजा पिटाई के रूप में झेलनी होती थी। पूर्व बंदी ने कहा कि यह सजा हाथ, लाठी या चमड़े के बेल्ट से पिटाई करके दंड स्वरूप दी जाती थी। यहां तक कि एक बार तो मुझे एक हजार यार्ड क्षेत्र के चक्कर काटने को मजबूर किया गया था।
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