...तो पाकिस्तान में असली सत्ता किसके पास है

बीबीसी हिंदी Updated Tue, 08 May 2018 07:34 PM IST
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नवाज शरीफ, शाहिद खाकान अब्बासी
नवाज शरीफ, शाहिद खाकान अब्बासी
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लोकतंत्र का तंबू दो बल्लियों पर खड़ा होता है- पक्ष और विपक्ष। मगर इन दिनों कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा कि किस शाख पर कौन बैठा है। पाकिस्तान में सत्तारूढ़ सरकार मुस्लिम लीग (नवाज) की है, मगर विरोधी गुट भी मुस्लिम लीग (नवाज) ही लगता है। प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी हर जगह कह रहे हैं कि 'मैं भले देश का प्रधानमंत्री हूं, मगर मेरे प्रधानमंत्री तो नवाज शरीफ ही हैं।'
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पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री अब्बासी ने कहा कि अगला चुनाव, चुनाव आयोग नहीं बल्कि खलाई मखलूक यानी एलियंस करवाएंगे। ये बात विरोधी गुट का कोई नेता कहता तो बात समझ में आ जाती कि विरोधियों का काम ही हर चीज में कीड़े निकालना है, पर किसी प्रधानमंत्री का ये कहना कि अगला चुनाव एलियंस करवाएंगे, सरकार की बेचारगी जाहिर करता है।
प्रधानमंत्री का इशारा जाहिर है कुछ गुप्तचर संस्थानों की ओर है। पर विडंबना ये है कि इन गुप्तचर संस्थानों के बॉस भी प्रधानमंत्री ही हैं, भले कागज पर ही सही। पर शायद ये इतने ताकतवर हैं कि खुद बॉस यानी प्रधानमंत्री किसी सती-सावित्री की तरह इन संस्थाओं का नाम लेने के बजाय घूंघट काढ़ के बस यही कह सकता है- मुन्ने के अब्बा, अजी सुनते हो...!
इसी तरह भ्रष्टाचार का पता चलाने के लिए सीबीआई की तरह का इदारा नायाब सुप्रीम कोर्ट के हुक्म पर निकाले जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवारों की जायदादों की छान-भटक कर रहा है। इस पर भी प्रधानमंत्री अब्बासी ने आरोप लगाया है कि ये संस्थान नैब (नेशनल एकाउंटीब्लिटी ब्यूरो) किसी और के इशारों पर काम कर रहा है। 

जाहिर है कि ये इशारा भी मुन्ने की अब्बा की तरफ है। इससे भी ज्यादा मजेदार रवैया प्रधानमंत्री अब्बासी की पार्टी मुस्लिम लीग (एन) के सदस्य शहबाज शरीफ का है। वो हर जगह कहते फिर रहे हैं कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आ गई तो हम कराची को न्यूयॉर्क बना देंगे। पूरे मुल्क में मॉडर्न हाईवेज का जाल बिछा देंगे। सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तनूनख्वाजा को भी पंजाब के बराबर तरक्की देंगे, इत्यादि इत्यादि।

किसी में हौसला नहीं है कि शहबाज शरीफ को झंझोड़ के बता सके कि भाई साहब जरा बैठिए, आपके सिर पर ठंडे पानी की बाल्टी तो डाल दूं ताकि आप होश में आ जाएं। आप विरोधी गुट में नहीं हैं। सरकार आप तो खुद सरकार हैं। कुछ यही रवैया सिंध में पिछले नौ वर्ष से सरकार चलाने वाली पीपुल्स पार्टी का भी है। 

महामंत्री हर जलसे में कह रहे हैं कि अगर जनता ने उन्हें मौका दिया तो सिंध को इतनी प्रगति देंगे कि सिंध ने सोचा भी न होगा। लगता है गर्मी ने सबका दिमाग उलट दिया है। महामंत्री की ऐसी बातों के बाद अब सिंधी जनता ये सोच रही है कि 'महा' के साथ अब और क्या-क्या शब्द जोड़ा जा सकता है।
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