नाटो सम्मेलन में ट्रंप और मर्केल में हुई जुबानी जंग, ट्रंप ने कहा- जर्मनी है रूस के चंगुल में

न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, ब्रुसेल्स Updated Thu, 12 Jul 2018 03:56 PM IST
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A verbal fight between Donald Trump and Angela Merkel in Nato summit

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जी-7 बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रुसेल्स में चलने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले जर्मनी पर हमला बोला है। बुधवार को शुरू हुआ उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का यह सम्मेलन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। इस बीच ट्रंप और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल में तीखी जुबानी जंग हुई। ट्रंप ने जर्मनी को रूस के चंगुल में बताते हुए रक्षा बजट में तत्काल बढ़ोतरी की मांग की तो मर्केल ने कहा कि रूसी दबदबे का अर्थ उन्हें पता है और जर्मनी स्वतंत्र रूप से अपनी नीतियां बनाता है और फैसले लेता है।
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बृहस्पतिवार को नाटो सम्मेलन के दूसरे दिन ट्रंप अजरबेजान, रोमानिया, यूक्रेन और जॉर्जिया के नेताओं से मुलाकात करेंगे। यूके के लिए रवाना होने से पहले वह उत्तरी अटलांटिक काउंसिल की बैठकों में भी भाग लेंगे। अपने सैन्य गठबंधन के नेताओं के साथ बैठकों का पहला दिन काफी विवाद भरा रहा। ट्रंप ने अपने यूरोपीय सहयोगियों की निंदा करते हुए जर्मनी व रूस के बीच पाइपलाइन डील से रूस के खाते में करोड़ों डॉलर जमा होने का आरोप लगाया। नाटो के रक्षा खर्च में मदद नहीं करने पर ट्रंप ने सदस्य देशों से खर्च को जीडीपी का दो के बजाय चार फीसद करने को कहा।
मर्केल ने भी पलटवार करते हुए कहा कि जर्मनी अपनी नीतियां खुद तय करता है न कि उस पर रूस का प्रभाव होता है। उन्होंने कहा, मुझे गर्व है कि हम फेडरल रिपब्लिक ऑफ जर्मनी की तरह एकजुट हैं। यूरोप और अमेरिका के द्वंद्व के कारण ब्रुसेल्स का यह दो दिनी सम्मेलन गठबंधन के लिए सबसे मुश्किल समय साबित हो रहा है। बैठक के बाद ट्रंप लंदन जाकर क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय और ब्रिटिश पीएम टेरीजा मे के साथ मुलाकात करेंगे। यहां ब्रेक्जिट वोट के बाद टेरीजा सरकार यूरोपीय संघ से बाहर होने के तरीके पर संकट का सामना कर रही है।
सोवियत विघटन के बाद बदली नाटो की भूमिका

नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के अमेरिका व यूरोपीय देशों समेत 29 सदस्य हैं। इस संगठन को 1949 में सोवियत संघ को किसी भी तरह रोकने के मकसद से खड़ा किया गया था। सोवियत संघ के विघटन के बाद भी इसकी भूमिका बदल गई और अब यह संगठन आतंकवाद से लड़ाई, पड़ोसी देशों में स्थिरता बनाए रखना, साइबर सुरक्षा आदि के लिए काम करता है।
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