कभी जानी-दुश्मन रह चुके ये देश बन रहे हैं दोस्त, दुनिया की अर्थव्यवस्था के हैं बादशाह

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 21 Oct 2019 06:57 PM IST
विज्ञापन
Xi Jinping and Shinzo Abe
Xi Jinping and Shinzo Abe - फोटो : SCMP

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
ड्रैगन इन दिनों अपने पुराने दुश्मन के साथ दोस्ती की नई इबारतें लिखने में जुटा हुआ है। हम बात कर रहे हैं चीन और जापान की। चीन और जापान दोनों ही दुनिया की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। दोनों देशों की दुश्मनी प्रथम विश्वयुद्ध से शुरू हुई थी, जब उस समय शक्तिशाली देशों की गिनती में शामिल जापान ने चीन के शहर नानजिंग पर कब्जा करके लाखों चीनियों को मौत के घाट उतार दिया था। उन दिनों घटी जापान की क्रूरता की कहानियां आप भी चीन की पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाई जाती हैं।

चीन-जापान के बीच युद्धाभ्यास

वहीं अब दोनों देश पुरानी घटनाओं को भूल कर नए सिरे से संबंधों की हेडलाइन लिखना चाहते हैं। पिछले दिनों दोनों देशों ने आपसी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए नौसेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास भी किया। खास बात यह रही कि इस युद्धाभ्यास में चीनी सेना ने अपने गाइडेड मिसाइल विध्वंसक ताईयुआन (हुल 131) को शामिल किया, जो टोक्यो में हुरुमी व्हार्फ तक गया। वहीं इस युद्धाभ्यास का न्यौता जापान की तरफ से दिया गया था।

सिग्नल लैंप ट्रेनिंग में लिया हिस्सा

टोक्यो खाड़ी के दक्षिण में हुए इस युद्धाभ्यास में जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्सेज के मुरासामे-क्लास विध्वंसक युद्धपोत सामीदारे ने हिस्सा लिया। वहीं दोनों देशों के युद्धपोतों ने सिग्नल लैंप के जरिये कम्यूनिकेशन ट्रेनिंग में भी हिस्सा लिया, जिसमें चीन के विध्वंसक पोत की तरफ से सिग्नल दिया गया, जिसका जापान के पोत ने लाइट सिग्नल के जरिये जवाब दिया। वहीं इस अभ्यास में विभिन्न श्रेणी के 200 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।

शिंजो आबे ने की शुरुआत

इस युद्धाभ्यास का संकेत जापान ने पहले ही दे दिया था। अक्टूबर महीने की शुरुआत में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने जापानी संसद की अस्थाई बैठक में जापान-चीन रिश्तों की वकालत की थी। आबे ने अपने भाषण में कहा था जापान और चीन के नेताओं को न सिर्फ आवाजाही बल्कि आर्थिक, युवाओं समेत सभी क्षेत्रों में आदान-प्रदान होना चाहिये। आबे के भाषण से स्पष्ट होता है कि जापान अब चीन के साथ दोस्ती का नया अध्याय लिखने का इच्छुक है।

पड़ोसी से रिश्ते बनाकर रखना चाहता है जापान

असल में इसकी वजह है कि इस क्षेत्र में उत्पन्न हो रही अस्थिरता और अमेरिका का दोगलापन। हालांकि अमेरिका और जापान की दोस्ती बेहद पुरानी है और इस क्षेत्र में दबदबे के लिए जापान अभी भी अमेरिका पर निर्भर है, वहीं अमेरिका को भी उत्तरी कोरिया और चीन पर नजर रखने के लिए इस क्षेत्र में एक विश्वस्त मजबूत सहयोगी की आवश्यकता है। लेकिन चीन का पड़ोसी होने के नाते जापान अपने रिश्ते नहीं बिगाड़ना चाहता है।

2017 में जिनपिंग ने आबे को कर दिया था हैरान  

इससे पहले नवंबर 2017 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच वियतनाम के शहर दा नांग में द्वीपक्षीय बैठक हुई थी, जिसमें दोनों देशों ने मुश्किलों में पड़े संबंधों की नई शुरुआत करने का एलान किया था। एशिया पैसिफिक इकोनोमिक कॉपरेशन की बैठक में दोनों देशों ने परस्पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था, साथ ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच किसी भी आकस्मिक झड़पों से बचने के लिए कम्यूनिकेशन मैकेनेजिम बनाने की बात कही थी। खास बात यह रही कि जब कैमरों के सामने शी जिनपिंग ने आबे से हाथ मिलाया तो एक बार के लिए वे भी हैरान रह गए थे। वहीं दो दिन बाद ही आबे ने आगे बढ़ते हुए मनीला में कहा था कि दोनों देशों के नेताओं के एक-दूसरे को यहां जाना चाहिए।   

संतुलन बनाने की रणनीति

इस बात का अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि सितंबर के आखिर में जापान, भारत और अमेरिका की नौसेना ने संयुक्त तौर पर मालाबार नाम से युद्धाभ्यास किया था। दक्षिणी चीन सागर में हुए इस युद्धाभ्यास में परमाणु रोधी युद्धपोतों के साथ बड़ी संख्या में नेवी के जहाजों और पनडुब्बियां ने हिस्सा लिया। वहीं चीन इस युद्धाभ्यास पर कड़ी नाराजगी जताते हुए, इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं थीं। वहीं जापान और भारत की सेनाएं मिजोरम में 19 अक्टूबर से शुरु हुए धर्म रक्षक 2019 के नाम संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास में भी साझेदार हैं।   

ताइवान को अलग-थलग करना चाहता है चीन

वहीं भारत की गिरती अर्थव्यवस्था भी जापान की चिंता बढ़ा रही है। जापानी कंपनियां भारत में निवेश करने से हिचक रही हैं। खबरें यह भी हैं कि जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन यानी जेटरो भारत में अपने सभी दफ्तर बंद कर सकती है, वहीं केवल अहमदाबाद में मौजूद दफ्तर को ही खोले रखना चाहती है, क्योंकि गुजरात में बुलैट ट्रेन समेत कुछ प्रोजेक्ट वहां चल रहे हैं। जापान की कोशिश है कि भारत और चीन से दोस्ती के संतुलन को साधा जाए। वहीं चीन की चिंता ताइवान को लेकर भी है। ताइवान काफी वक्त से जापान के साथ संबंध बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। चीन की रणनीति है जापान से दोस्ती बढ़ा कर ताइवान को अलग-थलग रखा जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us