'पॉर्नोग्राफ़ी', जानिए पूरी सच्चाई

टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Sat, 05 Mar 2016 06:07 PM IST
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Pros and Cons of Pornography
- फोटो : getty images
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पॉर्नोग्राफी के बारे में यूं तो कई रिसर्च आईं हैं लेकिन क्या आप पॉर्नोग्राफी के बारे में ये बातें नहीं जानना चाहेंगे।
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पॉर्नोग्राफ़ी उन तस्वीरों, फिल्मों एवं विडियो को कहते हैं जो की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए बनाया जाती हैं।
सॉफ्ट पॉर्न में कुछ अपनी कल्पना के लिए छोड़ दिया जाता है। इसमें एक पुरुष एवं महिला को चुम्बन लेते हुए या किसी महिला को एक उत्तेजक या सेक्सी अंतर्वस्त्र में दर्शाया जा सकता है। हार्ड कोर पॉर्न सेक्स को बहुत खुले तरीके से दर्शाता है उदाहरण के लिए, एक निर्वस्‍त्र महिला या संभोग करते हुए पुरुष एवं महिला की तस्वीर या फिल्म।
पॉर्न देखते समय आप अक्सर ऐसी चीजें देखते हैं जो ज़्यादातर लोग अपने वास्तविक जीवन में अनुभव नहीं करते हैं। पॉर्न में कुछ भी संभव है जैसे कई लोगों का एक साथ सेक्स में शामिल होना, अनजान लोगों के साथ सेक्स करना या आखों पर पट्टी बाँध कर सेक्स करना।

पर याद रखें की पॉर्न फिल्मों में सेक्स वास्तविक जीवन के सेक्स के जैसा नहीं होता है। यह एक मनगढ़त या फिल्मी कहानी की तरह होता है जिसकी आप कल्पना कर सकते हैं। वास्तविक जीवन में पॉर्न फिल्मों जैसे सेक्स की अपेक्षा न करें।

इतना ही नहीं, सामान्यतः पॉर्न फिल्मों  के अभिनेताओं की मांसपेशियों एवं लिंग असल में वास्तविक जीवन में लड़कों एवं पुरुषों से बड़े होते हैं। और अभिनेत्रियाँ छरहरी या पतली होती हैं और उनके स्तन वास्तविक जीवन में लड़कियों एवं महिलाओं के स्तनों से बड़े होते हैं - और उन्होंने स्तनों को बढ़ाने के लिए अक्सर कॉस्मेटिक सर्जरी या शल्यक्रिया कराई होती है। और क्या वास्तव में आपकी गर्लफ्रेन्ड भी इतनी ज़ोर से आहें भरती हैं - या इतनी आसानी से चरमआनन्द प्राप्त कर लेती हैं?

याद रखें, ज़्यादातर पॉर्न पुरुषों के लिए बनाए गए होते हैं और उन्हीं की कल्पनाओं को दर्शाते हैं। और पार्न में कोई कण्डोम नहीं पहनता।
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पॉर्न के पक्ष एवं विपक्ष

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