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20 नवंबर से शनि के साथ चलेंगे बृहस्पति, गुरु-शनि की युति से किसे फायदा किसे नुकसान

vinod shukla ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 18 Nov 2020 02:26 PM IST
बृहस्पति ग्रह: धनु और मीन राशि के स्वामी बृहस्पति कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीचराशिगत माने गए हैं।
बृहस्पति ग्रह: धनु और मीन राशि के स्वामी बृहस्पति कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीचराशिगत माने गए हैं। - फोटो : Pixabay

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सार

  • 20 नवंबर को गुरु का राशि परिवर्तन होने जा रहा है।
  • गुरु अपनी स्वयं की राशि धनु से निकलकर शनि की राशि मकर में प्रवेश करेंगे

विस्तार

20 नवंबर को देव गुरु बृहस्पति अपनी राशि धनु से निकलकर मकर राशि में आ रहे हैं। जहां पर न्याय के देवता शनिदेव पहले से मौजूद हैं। मकर राशि में शनि और गुरु का आना दो ग्रहों का अद्भत संयोग है। गुरु यहां पर 20 नवंबर से लेकर 6 अप्रैल 2021 तक रहेंगे। मकर और कुंभ राशि शनि देव की राशि है और शनि स्वयं वर्तमान समय में इसी राशि पर गोचर कर रहे हैं ऐसे में बृहस्पति के आ जाने से शनि और गुरु की एक साथ युति फलित ज्योतिष में अप्रत्याशित परिणाम दिलाने वाली सिद्ध होगी। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु और शनि एक दूसरे प्रति एक समान संबंध रखते हैं। ऐसे में गुरु और शनि का मकर राशि में मिलन कुछ राशियों के लिए अच्छा तो कुछ के लिए मिलाजुला रह सकता है।
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20 नवंबर को गुरु करेंगे मकर राशि में प्रवेश, जानिए किसके आएंगे अच्छे दिन


ज्योतिष में गुरु ग्रह का स्थान
फलित ग्रंथों के अनुसार स्थूलकाय, विशाल उदर, भूरे केश तथा भूरी आँखों वाले बृहस्पति का पीतवर्ण है जो इनके बौद्धिक प्रभाव का प्रतीक है। वेद मंत्रों में इन्हें सर्वाधिक शुभग्रह एवं आत्मा की शक्ति माना गया है। ये प्राणियों में अज्ञान के अंधकार को पूर्णरूप से दूर करने की क्षमता रखते हैं। ये अपने आराधकों को वांछितफल प्रदान कर उसे संपत्ति तथा बुद्धि से संपन्न करके सन्मार्ग पर चलने की ओर प्रेरित करते हैं। महादेव ने इन्हें साधु वृत्ति, देवत्व, आध्यात्मिकता एवं ब्रह्मविद्या से सम्बद्ध करके ग्रहों में श्रेष्ठ स्थान दिया है। जन्मकुंडली में गुरु दूसरे, पांचवें, नवें तथा ग्यारहवें भाव का कारक होते हैं।पशुओं में ये घोड़ा, हाथी, बैल से सम्बद्ध हैं और पक्षियों में मयूर पक्षी के अधिपति हैं। इनका प्रिय स्थान मंदिर, शिक्षा संस्थान तथा धार्मिक सत्संग का स्थान है।



12 राशियों पर शनि-गुरु की युति का असर

मेष राशि- शुभ प्रभाव देखने को मिलेगा।
 
वृषभ राशि- गुरु और शनि की मकर राशि में युति आपके लिए अप्रत्याशित परिणाम दिलाने वाला रहेगा।

मिथुन राशि- मिथुन राशि के लिए गुरु का गोचर मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलेगा।

कर्क राशि- गुरु का मकर राशि में गोचर आपकी पद- प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी के संकेत है। 

सिंह राशि- सिंह राशि के जातकों के लिए यह परिवर्तन मिलाजुला परिणाम देगा।

कन्या राशि- आपके लिए बृहस्पति का गोचर शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छी सफलता प्राप्त कराएगा। 

तुला राशि- आपको कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

बृश्चिक राशि- गुरु की शनि के साथ युति आपके कार्यों को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

धनु राशि- आपको परेशानियों से सामना करना पड़ सकता है।

मकर राशि- बृहस्पति और शनि की युति मकर राशि में होने से आपके जीवन में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

कुंभ राशि- कुंभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर हानि पहुंचाने के योग बना रहा है।

मीन राशि- आपके लिए गुरु का मकर राशि में गोचर करना और फिर शनि के साथ युति करना शुभफलदायक रह सकता है।
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