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संतान सुख प्राप्ति हेतु प्रभावी है शरद पूर्णिमा पूजा, जरूर जानें यह पौराणिक कथा
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संतान सुख प्राप्ति हेतु प्रभावी है शरद पूर्णिमा पूजा, जरूर जानें यह पौराणिक कथा

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भोपाल : प्रेमिका की हत्या कर घर में ही बना ली थी कब्र, अब मिली उम्रकैद की सजा

कई बार ऐसी खबरें पढ़ी और सुनी होंगी कि कोई शख्स किसी टेलीविजन सीरियल या फिल्म को देखकर अपराध करने के तरीके सीखता है। इसी बात को सच साबित करता है मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुआ एक किस्सा। अपनी प्रेमिका का गला दबाकर हत्या करने वाले सीरियल किलर उदयन दास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। 


फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को दोपहर उदयन को ये सजा सुनाई। दरअसल, ये मामला 15 जुलाई 2016 का है, जब उदयन ने गहरी नींद में सो रही अपनी प्रेमिका आकांक्षा का तकिए से दम घोंट दिया था और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी।

चीफ पब्लिक प्रोसिक्यूटर अरुण कुमार चटर्जी ने बताया कि बुधवार करीब दोपहर 12 बजे इस फैसले को सुनाया गया। बांकुरा पुलिस ने उदयन के खिलाफ 30 अप्रैल 2017 को 600 पेज की चार्जशीट अदालत में पेश की थी और सितंबर 2017 में उसके खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।

इस मामले में 19 गवाहों के बयान और साक्ष्य उदयन के खिलाफ थे। उदयन ने अपनी प्रेमिका की हत्या करने के बाद उसका शव एक संदूक में रखा दिया और उस संदूक के ऊपर सीमेंट का चबूतरा बना दिया। उदयन ने बताया कि एक इंग्लिश चैनल देखकर उसे ये आइडिया मिला। उदयन इंग्लिश चैनल पर अपराध से संबंधित सीरियल देखता था। 

उदयन ने वॉकिंग डेथ नाम की एक ऐसी ही मर्डर मिस्ट्री देखी थी। उदयन ने हत्या के बाद शव को उठाकर दूसरे कमरे में रख दिया एक पुराने बक्से को खाली कर उसमें शव को डाल दिया। इसके बाद उसने बक्से को चारों और से सीमेंट से ढक दिया और उस पर एक चबूतरा बना दिया। इसके लिए उदयन ने 14 बोरी सीमेंट का इस्तेमाल किया था। 

आकांक्षा साल 2016 के जून महीने में नौकरी की बात कहकर बांकुरा से भोपाल आई थी। अगले साल जनवरी 2017 के पहले हफ्ते में आकांक्षा के परिवार वालों ने बांकुरा थाने में आकांक्षा की गुमशुदगी का मामला दर्ज करवाया। बांकुरा की पुलिस के साथ आकांक्षा के पिता शिवेंद्र शर्मा भोपाल आए थे।

इसके अलावा उदयन दास पर अपने माता-पिता की हत्या करने का भी आरोप है। उदयन अपने माता-पिता की इकलौती संतान है और वो उनके साथ रायपुर में रहता था। उदयन के पिता भेल में और माता सरकारी विभाग में काम करती थीं। साल 2010 में उदयन ने अपने माता-पिता की हत्या कर दी थी और उनके शवों को घर के बगीचे में दफना दिया था। इस मामले में अभी रायपुर कोर्ट का फैसला आना बाकी है।
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राजगढ़ में शहीद की अंतिम विदाई के दौरान हादसा, छत गिरने से मची अफरातफरी

दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने के बाद महिला लापता, आरोपी छोड़ पीड़िता को ढूंढ रही पुलिस

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक महिला दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने के बाद लापता हो गई। भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां पुलिस दुष्कर्म के आरोपी को ना ढूंढकर पीड़िता की तलाश कर रही है। रिपोर्ट लिखाने के बाद महिला ने बताया कि उसे टायफाइड हो गया था, जिसके बाद वो अस्पताल में भर्ती हो गई थी।


पुलिस ने जब महिला से अस्पताल की जानकारी ली तो उसने फोन काट दिया और उसके बाद से महिला का फोन बंद आ रहा है। अब पुलिस महिला की तलाश कर रही है। यह मामला निशातपुर थाने का है, विवेचना अधिकारी उर्मिला यादव ने बताया कि एक 37 वर्षीय महिला निजी कंपनी में काम करती थी।

महिला ने 21 अगस्त को दुष्कर्म का मामला पुलिस थाने में दर्ज कराया था। शिकायत के दौरान महिला ने बताया कि दफ्तर जाने के लिए उसने दो साल पहले ऑटो लगवाया था, उसके ऑटो चालक का नाम रमेश कुशवाहा था और वो रोज रोजाना दफ्तर ले जाया करता था।

महिला ने बताया कि छह अगस्त को रमेश उसे बातों में उलझाकर बैरसिया रोड पर स्थित आशियाना कॉलोनी ले गया। महिला ने बताया कि यहां रमेश ने उसकी साथ बदतमीजी की। रमेश ने उस महिला को जान से मारने की धमकी दी, इसलिए वो चुप रही लेकिन बाद में महिला ने शिकायत करने का फैसला किया।

पुलिस के मुताबिक एफआईआर दर्ज कराने के बाद महिला घर चली गई, ज्यादा जानकारी के लिए महिला से फोन पर संपर्क किया गया। पुलिस ने उससे घटनास्थल के बारे में पूछताछ की लेकिन वो ज्यादा कुछ नहीं बता पाई। पुलिस ने बताया कि उसे ज्यादा याद नहीं था, वो मकान किसका था वो भी नहीं बता पाई।

पुलिस ने जब अस्पताल को लेकर जानकारी लेनी चाही तो महिला ने फोन ही बंद कर दिया। इसके बाद से पुलिस महिला की तलाश कर रही है।
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मध्यप्रदेश उपचुनाव: सिंधिया को गद्दार कहे जाने वाले सवाल पर सचिन पायलट ने दिया ये जवाब

सचिन पायलट सचिन पायलट

सिंधिया ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कहा- मुझे बनाओ सीएम, जानें हकीकत!

राज्यसभा सांसद और भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फर्जी पत्र लिखने का मामला सामने आया है। इस पत्र में बिहार चुनाव के चलते पीएम मोदी व्यस्तता और अन्य राजनीतिक मसलों का जिक्र किया गया है। साथ ही, ज्योतिरादित्य सिंधिया के फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। इस मसले पर सिंधिया से बातचीत की गई तो उन्होंने पत्र को फर्जी करार दिया, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। 

यह है मामला
बता दें कि सोशल मीडिया पर भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा लिखे एक पत्र की तस्वीर काफी वायरल हो रही है। कहा जा रहा है कि सिंधिया ने यह पत्र पीएम मोदी को लिखा, जिसमें बीजेपी नेताओं द्वारा अपमानित करने का जिक्र है। साथ ही, प्रधानमंत्री से मुलाकात न होने की बात भी कही गई। 

पत्र में लिखी थीं ये बातें
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पत्र में लिखा है। ‘आदरणीय नरेंद्र मोदी जी, मैंने दिल्ली आकर आपसे बात करने की कोशिश की परन्तु आपके स्वास्थ्य एवं बिहार चुनाव की व्यस्तता के चलते आप समय नहीं दे सके। दूरभाष पर चर्चा करने का संदेश मिला था परन्तु मैंने दूरभाष पर चर्चा करने की बजाय आपको यह गोपनीय पत्र लिखना उचित समझा।’

‘पिछले महीने मैंने मोहन भागवत जी को संघ एवं स्थानीय बीजेपी नेताओं द्वारा किए जा रहे असहयोग एवं मेरे समर्थक प्रत्याशियों के विरोध की विस्तृत जानकारी दी थी, अफसोस के साथ लिखना पड़ रहा है समस्या समाप्त होने की बजाय और अधिक बढ़ गयी है। बीजेपी के चुनाव रथ और प्रचार सामग्री से मेरी तस्वीर हटाकर एवं स्टार प्रचारकों की सूची में मुझे दसवें स्थान पर रखकर बीजेपी नेताओं ने न केवल मुझे अपमानित किया है बल्कि सिंधिया घराने के मान-सम्मान को चोट पहुंचाई है।’

‘नरेंद्र तोमर जी, बीडी शर्मा जी एवं नरोत्तम मिश्रा जी द्वारा उपचुनाव में कांग्रेस के पक्ष में कार्य किया जा रहा है वहीं बीजेपी के अन्य नेता इस उपचुनाव से दूरी बना चुके हैं। नरोत्तम मिश्रा जी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर सन्देश दे रहे हैं कि उन्हें केवल एक सीट इसलिए 27 सीटों पर बीजेपी कार्यकर्ता कार्य नहीं करें। इन हालातों ने अब इस चुनाव को सीधे तौर पर सिंधिया परिवार की लड़ाई बनाकर रख दिया है। मुझे खुद अब कहना पड़ रहा है कि यह मेरी लड़ाई है और जनता मुझे देखकर वोट दे।’ 

‘मुझे केंद्र में मंत्री बनाने का आपका वादा अब तक लंबित है। मैं अनुग्रहीत होऊंगा यदि आप मेरी जगह पर शिवराज सिंह चौहान जी को केंद्र में मंत्री बना दें और मुझे मध्यप्रदेश की कमान सौंप दें ताकि मैं सभी विरोधियों की जवाब दे सकूं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं मध्यप्रदेश की कमान संभालते ही बीजेपी के सभी बिगड़ैल नेताओं को ठीक कर दूंगा। शुभकामनाओं सहित।’

ऐसे हुआ मामले का खुलासा
सोशल मीडिया पर पत्र वायरल हुआ तो सिंधिया के निजी सचिव तक पहुंच गया। उन्होंने इस मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया से चर्चा की। जब उन्होंने इस तरह का कोई भी पत्र नहीं लिखने की बात कही तो पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल ने मामले की जानकारी ग्वालियर एसपी को दी। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत केस दर्ज कर लिया। गौरतलब है कि इन दिनों मध्य प्रदेश में उपचुनाव का माहौल है। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कमल नाथ के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है।
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मध्यप्रदेश उपचुनावः नफा-नुकसान कमलनाथ और सिंधिया का है, भाजपा तो फायदे में रहेगी

मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव बड़े रोचक दौर में पहुंच गया है। भाजपा के नेता पूर्व मुख्यमंत्री इमरती देवी के प्रकरण से बाहर नहीं निकलने देना चाहते, वहीं कमलनाथ ने भाजपा और कांग्रेस के पूर्व नेता तथा भाजपा के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दरअसल, विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का सब कुछ दांव पर लगा है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का मध्यप्रदेश में राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है। जिन 28 सीटों पर उप चुनाव हो रहा है, उनमें से 27 पर कांग्रेस के विधायक विजयी हुए थे। इसलिए ज्योतिरादित्य और कमलनाथ के बाद कांग्रेस में भी बैचेनी है।
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कमलनाथ के 'आइटम' बयान पर क्यों बोले दिग्विजय सिंह, 'ये नाटक-नौटंकी क्यों?'

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मध्यप्रदेश: निजी अस्पताल में कोरोना का इलाज करवा सकते हैं सरकारी कर्मचारी, सरकार करेगी भुगतान

मध्यप्रदेश की सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी योजना की घोषणा की है। सरकार ने एलान किया है कि अगर प्रदेश का कोई सरकारी कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो वो अपना इलाज किसी भी निजी अस्पताल में करा सकता है, इसका भुगतान सरकार करेगी।


सरकार की घोषणा के मुताबिक सरकारी कर्मचारी और उनके परिजन कोरोना का इलाज निजी अस्पतालों में करवा सकेंगे। उनके इलाज में लगने वाली दवा फेविपिरावियर और इंजेक्शन रेमडेसिविर जैसी महंगी दवाइयों समेत पूरे इलाज का खर्चा सरकार वहन करेगी।

इसके लिए कर्मचारी अपना सारा हिसाब-किताब अपने विभाग के माध्यम से जिले के सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षक को भेजेगा और यहीं से मेडिकल बिलों का भुगतान किया जाएगा। हालांकि यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए ही है। 

प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश में कहा गया है कि अगर सरकारी कर्मचारी सामान्य परिस्थितियों में बीमार होते हैं, तो उन्हें सरकार से अनुबंधित 101 निजी अस्पतालों में इलाज की सुुविधा मिलेगी। वहीं अगर कोरोना मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज कराएगी तो इसका भुगतान सरकार नहीं करेगी।

इसके अलावा कांग्रेस सरकार में 12 लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और अध्यापकों के लिए बनी स्वास्थ्य बीमा योजना को अब संशोधित रूप में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत अफसरों से एक हजार रुपये, कर्मचारियों से 500 रुपये, चौथी श्रेणी के कर्मचारियों से 400 रुपये हर महीने बीमा के प्रीमियम के तौर पर लिए जाते, जिससे सरकार को हर साल 400 करोड़ रुपये मिलते लेकिन कर्मचारी प्रीमियम की राशि देने का तैयार नहीं हुए।

अब मध्यप्रदेश सरकार इस योजना को संशोधित कर प्रीमियम की राशि कम करके नए रूप में योजना को लाने की तैयारी कर रही है।
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