बिहार चुनाव: ‘चमकी’ से बच्चों की मौतों के बाद कोई गांव में झांकने नहीं आया

मनीष मिश्र, सुतिहारा (मुजफ्फरपुर) Updated Tue, 27 Oct 2020 02:13 AM IST
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एसकेएमसीएच का दौरा करते सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
एसकेएमसीएच का दौरा करते सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

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भले भाजपा ने मुफ्त कोरोना वैक्सीन और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण का वादा कर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मतदाताओं की नब्ज पर हाथ रखा है, लेकिन पिछले साल ‘चमकी बुखार’ से 176 बच्चों की हुईं मौतों के बाद भी स्वास्थ्य क्षेत्र की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। चमकी बुखार से मौतें न मुद्दा है और न ही उस बीमारी के बाद गांवों में किसी ने झांकना मुनासिब समझा। मुजफ्फरपुर जिले के आसपास के गांव सबसे अधिक चमकी बीमारी से प्रभावित रहें। ‘अमर उजाला’ टीम मुजफ्फरपुर के गांव सुतियारा में पहुंची। हकीकत जाना। गांव के लोगों का दर्द छलक पड़ा।
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दम तोड़ती गईं उम्मीदें
सुतियारा गांव के बाहर कुछ लोगों के साथ खड़े दिव्यांग मिथुन कुमार बताते हैं, तीन साल का बच्चा रात को खाकर सोया ओर सुबह तबीयत खराब हो गई। अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही मौत हो गई। बच्चे को टीका लगने और रूटीन जांच पर मिथुन बताते हैं, आंगनबाड़ी केंद्र पर जो मिला वही लगवाया, अलग से नहीं। पास ही खड़ी एक दूसरी महिला ने भी अपने ढाई साल के बच्चे के खो दिया था। वह भावुक हो गईं। उनके ससुर बीच में बोलते पड़े, यहां से मुजफ्फरपुर निजी अस्पताल लेकर गए थे। वहां 15 घंटे भर्ती रहा और उसके बाद मौत हो गई। इलाज के लिए कर्ज भी लिया।


निजी अस्पतालों के भरोसे
राहुल कुमार के बच्चे की जब मौत हुई तो वह बाहर मजदूरी के लिए गए थे। वह बताते हैं, बच्चे की मौत के बाद चिकित्सकों की टीम आई, कागज आदि लेकर गए कि कुछ मदद मिलेगी पर आज तक कोई घूम कर नहीं आया। राहुल के पिता आंगनबाड़ी से चीजें न मिलने की शिकायत करते हुए कहते हैं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए जो सामान आता है उसे दूसरों को बेच देते हैं। सरकारी अस्पताल में ठीक से इलाज न मिल पाने की शिकायत करते हुए राहुल कुमार कहते हैं, इलाज के लिए निजी अस्पताल ही भागना पड़ता है, सरकारी में तो ठीक से इलाज तक नहीं होता है। अगर सरकारी अस्पताल में पैसे लेने का विरोध करो तो पुलिस को बुला लेते है।

चिकित्सक मानते, जागरूकता जरूरी
मुजफ्फरपुर के बाल रोग विशेषज्ञ इस बीमारी की वजह कुपोषण, गंदगी और गरीबी मानते हैं। मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज में एचओडी डॉक्टर गोपाल शंकर शाहनी कहते हैं कि बीमारियों से लड़ने के लिए लोगों को जागरुक करना पड़ेगा। सरकार को कुपोषण को दूर करने पर काम करना होगा। डॉ. साहनी कहते हैं, इस साल गर्मी कम पड़ी और कैंपेन भी अच्छा चला इसलिए चमकी या बीमारियों के मामले कम आए।

मेडिकल टीम ने कुपोषण को जिम्मेदार माना
पिछले साल 'प्रोग्रेसिव मेडिकोस एंड साइंटिस्ट्स फोरम' (पीएमएसएफ) के बैनर तले डॉक्टरों की एक तथ्यान्वेषी टीम द्वारा तैयार प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया था कि ज्यादातर बच्चे कुपोषित थे। बच्चों की मौतें पिछले दस वर्षों से हो रही हैं। अभी भी अतिसार जैसी आम बीमारी के लिए कोई निवारक तंत्र और स्वास्थ्य जागरूकता नहीं है। साफ पेयजल, मुजफ्फरपुर की सीवरेज प्रणाली और स्वास्थ्य केंद्रों में सफाई की स्थिति चिंताजनक है।

चिकित्सकों की टीम ने रिपोर्ट में कहा था कि आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविकाएं कम हैं। टीकाकरण सेवाएं चौपट हैं। डॉक्टर भले चमकी बुखार का कारण गंदगी और कुपोषण मानते हैं, लेकिन राहुल के घर में अभी तक शौचालय नहीं बन पाया। राहुल के भाई अरुण बताते हैं “मुखिया बोलते हैं, इस बार जिताओ तो उसके बाद शौचालय मिलेगा। घर दिलाएंगे। इंदिरा आवास में 45 हजार मिलना था तो 40 हजार दिया, पांच हजार कमीशन।
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