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बिहार में शराब के सिंडीकेट को तोड़ने में सरकार असफल

बिहार में शराब के सिंडिकेट को रोकने में बिहार सरकार पूरी तरह से असफल साबित हो रही है । यहां ‘मौत की शराब’ में नाचती सियासत है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अधिकांश लोग शराबबंदी के पक्ष में हैं। लेकिन कुछ लोग गड़बड़ कर रहे हैं। कुछ लोग बाएं दाएं करने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे कहा कि अब तो नीतीश सरकार की सहयोगी वीआईपी और हम  के अध्यक्षों ने भी  मुजफ्फरपुर में शराब पीने से पांच लोगों की हुई मौत पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। नीतीश सरकार के मंत्री मुकेश साहनी ने तो शराबबंदी कानून को ही विफल करार दिया।

बिहार में शराबबंदी कानून को लागू करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लगातार शराबबंदी को लेकर फजीहत हो रही है। शराबबंदी से बिहार सरकार को हर साल सात हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान है।

हम पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि जिन जिलों में शराब की वजह से लोगों की मौत हो रही है वहां के एसपी के ऊपर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। मांझी ने नीतीश सरकार के शराबबंदी कानून पर सवाल खडे़ करते हुए कहा कि यह सोचने वाली बात है कि जब राज्य में शराबबंदी कानून लागू है तो आखिर शराब बेची कैसे जा रही है।  

बिहार में महाराष्ट्र से ज्यादा शराब का सेवन
साल 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू कर दी थी, जिसके बाद से यह ड्राई स्टेट बन गया था। उस समय बिहार सरकार को तकरीबन 3300 करोड़ के आस-पास राजस्व की हानि हुई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर क्या ये शराबबंदी लागू हो पाई। ये बड़ा सवाल है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-5) के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में महाराष्ट्र से ज्यादा शराब पी जाती है।

सर्वे के मुताबिक बिहार में 15.5 फीसदी पुरुषों ने शराब पीने की बात स्वीकार की है। शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की खपत अधिक है।  ग्रामीण क्षेत्रों में 15.8 फीसदी लोग शराब पीते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 14 फीसदी था।

वहीं महाराष्ट्र, जहां शराबबंदी लागू नहीं है, में 13.9 फीसदी पुरुष शराब का सेवन करते हैं। महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शराब की खपत का अनुपात बिहार की तुलना में कम है।
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बिहार के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष चिकित्सकों का परामर्श मिलेगा

बिहार के ग्रामीण व सुदूर जगहों में निवास कर रहे लोगों को भी अब अपने नजदीक के स्वास्थ्य केंद्रों पर ही विशेष चिकित्सकों का परामर्श मिल जाएगा। उन्हें दवा और किसी दूसरे अस्पताल में रेफर किए जाने की सुविधा भी मिल सकेगी। रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष से इस सेवा के लिए बने ई संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा का उद्घाटन किया।

इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा कि  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिमाह इलाज के लिए सिर्फ 39 मरीज पहुंचते हैं। हम लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों को पदस्थापित किया।

जरूरत के अनुसार नियोजन एवं नियुक्ति की गई। साथ ही मुफ्त दवा का भी प्रबंध कराया गया। उसके बाद वर्ष 2006 के अंतिम माह में पुन: सर्वे कराया गया जिसमें यह जानकारी मिली कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर औसतन प्रतिमाह इलाज के लिए एक हजार से 15 सौ लोग पहुंचने लगे हैं।

सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर लैंडलाइन की व्यवस्था कराई गई और मुख्यमंत्री सचिवालय से सभी चीजों की सतत् निगरानी की गई। वर्ष 2018 की रिपोर्ट की अनुसार पूरे बिहार में एक माह में औसतन 10 हजार मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए पहुंचने लगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सर्वे की रिपोर्ट से पता चला कि बिहार के गरीब परिवारों का सबसे ज्यादा खर्च उनके इलाज पर होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था के लिए तेजी से काम किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरे-धीरे सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और विकसित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन के जरिए स्वास्थ्य उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल एवं जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा। टेलीमेडिसिन के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों का इलाज होगा और उनके लिए दवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

उन्होंने कहा कि रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम की आज शुरुआत हो गई है। इसके माध्यम से एंबुलेंस सेवा का बेहतर लाभ लोगों को अब मिल सकेगा। लोग समय अस्पताल पहुंच पाएंगे। एंबुलेंस कहां है, उसमें कौन मरीज है, कहां है, कहां जाना है, किसको ला रहे हैं, कहां ले जाना है सबकी जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अश्विन पोर्टल की भी शुरुआत की गई है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं को समय पर पैसा उनके अकाउंट में चला जाएगा।
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जल संसाधन मंत्री बोले, बिहार से बाहर नहीं जाएगा गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय

गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी) के मुख्यालय को कहीं और भेजे जाने की अटकलों के बीच बिहार सरकार के एक मंत्री ने बयान दिया है। दरअसल, बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने रविवार को कहा कि गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी) का मुख्यालय उत्तर प्रदेश ले जाने की केंद्र सरकार की कोई योजना नहीं है।

झा ने कहा कि उन्होंने जीएफसीसी का मुख्यालय पटना से लखनऊ स्थानांतरित करने की खबरों पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से बातचीत की है। उन्होंने कहा, "शेखावत ने बताया है कि मंत्रालय में ऐसी कोई योजना नहीं है।" झा ने कहा कि उन्होंने मीडिया के एक हिस्से में आई खबरों की पृष्ठभूमि में इस विषय पर केंद्रीय मंत्री से बात की। 

दरअसल, खबरों में जीएफसीसी के अध्यक्ष के हवाले से कहा गया है कि आयोग का मुख्यालय दो महीने में लखनऊ स्थानांतरित कर दिया जाएगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत आने वाली जीएफसीसी का 1972 से पटना में मुख्यालय है। आयोग का काम गंगा बेसिन राज्यों में बाढ़ और उसके प्रबंधन की देखरेख करना है।

गंगा बेसिन राज्यों में बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिम बंगाल आते हैं। झा ने कहा कि शेखावत ने मुख्यालय को स्थानांतरित किये जाने संबंधी कोई प्रस्ताव होने को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।

उन्होंने कहा कि शेखावत ने यह भी वादा किया है कि वह मुख्यालय के स्थानंतरण के संबंध में आयोग के अध्यक्ष के बयान को देखेंगे।

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बिहार: बाहुबली विधायक का छलका दर्द, कहा- नहीं मांगता रंगदारी फिर भी मिल रही हैं शिकायतें

रीतलाल यादव की बातें सुनकर सभी हैरान हो गए। दरअसल, विधायक बनने के बाद यादव अपनी छवि को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं लंबे समय से बहुत दुखी हूं। मैं इसे लेकर मीडिया के सामने अपनी बात रखना चाहता था। लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि कैसे कहूं। 

उन्होंने कहा कि सात-आठ लोग मेरे नाम पर लोगों को फोन करके रंगदारी मांग रहे हैं। वे दो से बीस लाख तक की रंगदारी मांगते हैं। वे लोगों को फोन करके कहते हैं कि मैं विधायक बोल रहा हूं। 15 लाख रुपये दो नहीं तो तुम्हारे बेटा का काम तमाम कर दूंगा। तुम्हारे पूरे परिवार का सत्यानाश कर दूंगा। जानते नहीं हो कि हम कौन हैं, रीतलाल यादव नाम है मेरा।

राजद विधायक ने बताया कि कई बार उनके भाई के नाम पर भी रंगदारी मांगी जाती है। इतना ही नहीं रंगदारी मांगने का ऑडियो तक वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि आवाज सुनकर मैं चकित था क्योंकि ऐसा लग रहा था कि मैं ही बोल रहा हूं। जब कुछ पीड़ित मेरे घर रंगदारी मांगने की शिकायत लेकर पहुंचे तब मुझे सारी बात पता चली।

भाजपा से झटकी सीट
दानापुर सीट वीआइपी सीटों में शुमार है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी यहां से 1995 और 2000 में चुनाव जीत चुके हैं। फिलहाल यह सीट भाजपा के कब्जे में थी। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में रीतलाल ने भाजपा को हराकर यहां जीत हासिल की है।

मनी लॉड्रिंग के मामले में जेल में थे बंद
रीतलाल मनी लॉड्रिंग और कुछ फौजदारी मामलों में पटना की ब्योर जेल में बंद थे। उन्हें बीच में भागलपुर भी शिफ्ट किया गया था। फरवरी 2020 में बेटी की शादी के लिए पटना उच्च न्यायालय ने उन्हें 15 दिनों की औपबंधिक जमानत दी थी। वे छह साल नौ महीने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद रहे थे।
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रीतलाल यादव (फाइल फोटो) रीतलाल यादव (फाइल फोटो)

कानून का राज कायम करना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, न्यायपालिका की भी अहम भूमिका: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहा, कानून का राज कायम करना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें न्यायपालिका की भी अहम भूमिका है। न्यायपालिका किसी भी आदमी के साथ अन्याय नहीं होने देती है। पटना हाईकोर्ट के शनिवार को शताब्दी भवन का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी है कि पटना हाईकोर्ट के शताब्दी भवन का उद्घाटन गौरव का पल है।' 203.94 करोड़ रुपये की लागत से इस शताब्दी भवन का निर्माण कराया गया है जो हाईकोर्ट के पुराने भवन के बगल में बनाया गया है। विस्तारित भवन को पुराने भवन के मुताबिक ही बनाया गया है।

शताब्दी भवन के दो खंड में पांच तल हैं। नए एवं पुराने भवन कनेक्टिंग ब्रिज से जुडे़ हुए हैं। नए भवन का बुनियादी ढांचा बेहतर बनाया गया है। नए शताब्दी भवन की खासियत यह है कि इसमें 43 कोर्ट रूम, 57 चैंबर, लाइब्रेरी के साथ-साथ अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित लॉन का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा हाईकोर्ट में बैठकों के लिए छह कमेटी रूम एवं 90 व्यक्तियों के बैठने के लिए कॉन्फ्रेंस रूम का निर्माण कराया गया है।

इसके अलावा अधिवक्ताओं के बैठने के लिए 10.17 करोड़ रुपये की लागत से एडवोकेट एसोसिएशन भवन का भी निर्माण कराया गया है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस नवीन सिन्हा, जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस हेमंत गुप्ता और पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल समेत कई जज मौजूद थे।
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सोशल मीडिया का हो रहा गलत इस्तेमाल, जजों पर होती हैं अनुचित टिप्पणियां: रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधिक कार्यकर्ताओं द्वारा न्यायाधीशों के खिलाफ सोशल मीडिया में आपत्तिजनक टिप्पणियां करने पर शनिवार को सख्त एतराज जताया। उन्होंने कहा कि ये लोग उन न्यायाधीशों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं, जो उनकी याचिकाओं पर अनुकूल आदेश जारी नहीं करते हैं। प्रसाद ने इसे परेशान करने वाली नई प्रवृत्ति करार दिया। 

भारत के प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे द्वारा पटना उच्च न्यायालय की एक नई इमारत के उद्घाटन के मौके पर कानून मंत्री यहां एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य भी मौजूद थे। 

रविशंकर प्रसाद ने जनहित याचिकाएं दायर करने वालों के अनुकूल फैसला नहीं आने पर न्यायाधीशों के खिलाफ सोशल मीडिया पर घोर अनुचित टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘हम निश्चित रूप से एक फैसले के तर्क की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन मैं एक नई प्रवृत्ति देख रहा हूं, जिस पर मैं आज बात करने की जरूरत समझता हूं।’

उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी चिंताओं को सार्वजनिक करने की सोच रहा था। मैंने यहां ऐसा करने के बारे में फैसला किया।’ केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए हाल ही में जारी किए गए दिशानिर्देशों का भी उल्लेख किया। 

प्रसाद ने कहा, ‘हम स्वतंत्रता के समर्थक हैं। हम आलोचना के समर्थक हैं। हम असहमति के भी समर्थक हैं, लेकिन मुद्दा सोशल मीडिया के दुरुपयोग का है। सोशल मीडिया पर किसी के लिए भी शिकायत निवारण तंत्र होना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि सरकार एससी, एसटी और ओबीसी को उचित आरक्षण देने की इच्छा रखती है, जो न्यायपालिका को अधिक समावेशी बनाएगी। प्रसाद ने पिछले साल कोविड-19 महामारी से उत्पन्न हुई चुनौती का सामना करने में न्यायपालिका की भूमिका पर संतोष व्यक्त किया।

इस साल 31 जनवरी तक देशभर में डिजिटल रूप से सुने जाने वाले मामलों की संख्या 76.38 लाख थी। इनमें से 24.55 लाख मामलों पर विभिन्न उच्च न्यायालयों में, अन्य 51.83 लाख मामलों पर जिला अदालतों में और 22,353 मामलों पर शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रशंसा की बात है।

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तेजस्वी ने बिहार में अवैध शराब के कारोबार का आरोप लगाया

बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि पूर्ण शराबबंदी वाले बिहार में अवैध शराब के कारोबार के जरिए कमाई की समानांतर काली अर्थव्यवस्था चल रही है।

तेजस्वी ने उक्त आरोप बिहार विधानसभा में 2021-22 के बजट पर चर्चा के दौरान लगाते हुए कहा कि प्रदेश में शराबबंदी का क्या हाल है? यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। उल्लेखनीय है कि बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने अप्रैल 2016 से पूर्णशराबबंदी लागू की हुई है।

हाल ही में सीतामढ़ी जिले में शराब तस्करों के साथ मुठभेड़ में एक अवर निरीक्षक की मौत का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने कहा कि सीतामढ़ी में क्या हुआ, यह हम सभी को पता है। यहां तो ऐसी स्थिति बनी हुई है कि किसी की भी हत्या हो जाती है। पहले सुनते थे कि अपराधी का एनकाउंटर होता है, पर अब यहां दारोगा जी का एनकाउंटर हो रहा है। इससे शराबबंदी की कलई खुल गयी पर सरकार जरा भी गंभीर नहीं है।

उन्होंने कहा कि यहां पुलिस की जीप चलती कम, धुआं अधिक फेंकती है और अपराधी स्कार्पियो वाहन से एके47 के साथ घूमते हैं और यहां सम्मान के लिए पुलिस जब राइफल से फायरिंग करती है तो उससे गोली ही नहीं निकलती है। इस बजट में पुलिसिंग को कैसे बेहतर किया जाए इसका उल्लेख नहीं है। पुलिस विभाग में कई पद रिक्त हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में शराबबंदी के पूर्व जो शराब की एक बोतल 200 रुपये में उपलब्ध थी, कोई इसे अब 1500 रुपये में प्राप्त कर सकते हैं। पहले लोग शराब खरीदने के लिए दुकानों का सहारा लेते थे। अब इसे उनके घरों तक पहुंचाया जा रहा है।

तेजस्वी ने कहा कि आबकारी राजस्व के जरिए राज्य सालाना 400 करोड़ रुपये कमाता था फिर भी हमने 2016 में शराब पर प्रतिबंध के फैसले का समर्थन किया था। हमने बिहार को नशा मुक्त की उम्मीद की थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
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बिहार: पूर्व पंचायत सदस्य ने घर में घुसकर विवाहिता को उठाया, हथियार के बल पर किया दुष्कर्म

तेजस्वी यादव
बिहार के बेतिया-नरकटियागंज में हथियार के बल पर एक महिला को उसके घर से अगवा करके दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया है। यह घटना शिकारपुर थाना क्षेत्र के मंगरहरी गांव में घटित हुई। महिला ने गांव के ही एक व्यक्ति को पूरी घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। 

शिकारपुर थाना की पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। वहीं आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है। घटना के बारे में पीड़िता के पति ने बताया कि गांव के ही रामविलास पटेल ने पहले भी कई बार महिला के साथ दुष्कर्म की कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि देर रात आरोपी घर में घुसा और बंदूक के बल पर महिला को सरेह में खींचकर ले गया। यहां उसने महिला के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

महिला ने दुष्कर्म की इस घटना की जानकारी अपने पति को दी। इसके बाद दोनों शिकारपुर थाना पहुंचे और पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। घटना के बारे में शिकारपुर थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि पीड़ित महिला के बयान पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है।

थानाध्यक्ष गुप्ता ने बताया कि महिला के पति के बयान भी दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर जाकर पूरे मामले की जांच की जाएगी। दुष्कर्म की घटना का आरोपी पूर्व पंचायत समिति सदस्य है। इस साल पंचायत चुनाव होने हैं। ऐसे में पुलिस आरोपी की पूरी तरह से पड़ताल करने में जुट गई है।
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राजद के विधान पार्षद रामबली सिंह ने की पीएम मोदी व सीएम योगी की जमकर तारीफ 

बिहार विधान परिषद में उस समय अजब स्थिति पैदा हो गई जिस समय राजद के विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की। विधान परिषद में सभी आश्चर्यचकित हो गए कि भाजपा के घोर विरोधी लालू की पार्टी राजद के विधान पार्षद रामबली सिंह ने पीएम मोदी व सीएम योगी के तारीफों के पुल बांध दिए।

राजद के रामबली सिंह कोरोना काल में पलायन कर आ रहे लोगों की सुविधा का मसला उठा रहे थे। इसी बीच वह पड़ोसी राज्य की तारीफ करने लगे। सत्ता पक्ष के विधायकों ने जब सीएम का नाम लेने को कहा तो उन्हाेंने स्पष्ट किया कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी। फिर बोले, अच्छा काम होगा तो वह भी तारीफ करेंगे।  
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बिहार विधानसभा में बजट और शराबबंदी मुद्दे पर जमकर हुआ हंगामा

बिहार विधानसभा में बजट पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने शराबबंदी और किसान के मुद्दे पर आवाज उठाई। राजद, कांग्रेस, भाकपा माले सहित अन्य विपक्षी दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।

उन्होंने मंगलवार को सदन में धान खरीद की तारीख बढ़ाने का मुद्दा जोरशोर से उठा। धान खरीद की तारीख बढ़ाए जाने की मांग को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। 

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि धान खरीदारी में बिहार में जमकर घोटाला हुआ है। तेजस्वी ने खेलकूद के मोर्चे पर सरकार को घेरने की कोशिश की तो भाजपा के टिकट पर पहली बार विधायक चुनी गईं पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज श्रेयसी सिंह ने इसका बचाव किया।
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कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह बोलीं- जहां से हारे हैं उस क्षेत्र को नीचा न दिखाएं राहुल

राहुल गांधी द्वारा उत्तर भारतीय पर दिए गए विवादित बयान को लेकर जहां भारतीय जनता पार्टी हमलावर हो गई है वहीं अब उन्हीं की पार्टी की बागी विधायक अदिति सिंह ने भी उनपर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बयान को किसी भी स्तर से सही नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि राहुल को अपना बयान सही लगता हो लेकिन अगर आप अपने वर्तमान क्षेत्र की प्रशंसा करते हुए अपने पिछले निर्वाचन क्षेत्र को कमजोर दिखाने की कोशिश करते हैं तो यह बिल्कुल गलत है।

उन्होंने कहा कि आप अमेठी के बारे में ऐसी बातें कहते हैं जिसने आपको राजनीति का एबीसी सिखाया है, जहां आपके पूर्वजों को सम्मान एवं जीत मिली थी और जहां से आप दिल्ली पहुंचे थे। हम सभी एक राष्ट्र के नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि आपसे गलती हुई है इसलिए आपको अमेठी के लोगों से और उत्तर भारतीय से माफी मांगनी चाहिए।

संजय मयूख ने बताया बिहार का अपमान
बिहार विधान परिषद के सदस्य संजय मयूख ने केरल के त्रिवेंद्रम में की गई राहुल गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। इस संबंध में उन्होंने कहा है कि यह बिहार की सीमा तक फैले उत्तर भारत का सवाल है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता ने एक विभाजनकारी बयान देकर बिहार के लोगों की भावनाओं को आहत किया है, इसलिए मैंने विधानसभा में एक निंदा प्रस्ताव रखा है।

बता दें कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एहसान फरामोश बताया है। स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल जिस उत्तर भारत पर सवाल खड़े कर रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि सोनिया गांधी भी यहां से ही सांसद हैं।

एक न्यूज चैनल से बात करते हुए स्मृति ईरानी ने गांधी परिवार पर निशाना साधा। स्मृति ने कहा कि अगर उत्तर भारत के लोगों के प्रति हीन भावना है, तो ये उत्तर भारत में क्यों राजनीति कर रही हैं। प्रियंका वाड्रा ने अभी तक राहुल के बयान का खंडन क्यों नहीं किया। अमेठी की सांसद स्मृति ईरानी ने कहा कि गांधी परिवार जब फिर से अमेठी लौटेगा, तो उन्हें इस बात का जवाब देना होगा।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिस उत्तर भारत का अपमान कर रहे हैं, वो भूल रहे हैं कि उसी इलाके से उनकी माता सोनिया गांधी भी सांसद हैं, ऐसे में राहुल गांधी ने जो बात कही, वो माफ करने लायक ही नहीं है।इससे पहले, स्मृति ने राहुल के बयान पर ट्वीट कर हमला बोला था।

क्या है राहुल गांधी का विवादित बयान 
राहुल गांधी ने त्रिवेंद्रम में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि मैं 15 साल तक उत्तर भारत में सांसद था। मुझे एक अलग तरह की राजनीति की आदत हो गई थी। मेरे लिए केरल आना बेहद नया था क्योंकि मुझे अचानक लगा कि यहां के लोग मुद्दों में दिलचस्पी रखते हैं और जमीनी तौर पर मुद्दों के विस्तार में जाने वाले है। राहुल गांधी के इस बयान स्मृति ईरानी ने उन्हें आड़े हाथों लिया है।  केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट पर करके लिखा, ''एहसान फरामोश! इनके बारे में तो दुनिया कहती है- थोथा चना बाजे घना।''
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बिहार को आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाना है : नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सदन में सभी सदस्यों को अपनी बातें रखने का अधिकार है। सदन में चर्चा के दौरान कृषि, स्वास्थ्य, सड़क सहित सभी क्षेत्रों में विकास कार्यों की जानकारी दी गई। बिहार में लोगों की आमदनी बढ़ी है। इससे स्पष्ट है कि बिहार आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में और आगे बढे़गा। यही हम सब लोगों की इच्छा है।

मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए नीतीश ने कहा कि मैथिली भाषा से हम लोगों को काफी लगाव है। बिजली के क्षेत्र में वन नेशन वन रेट हो यह हम लोगों की इच्छा है। इस बात को हम लोगों ने नीति आयोग की बैठक में भी रखा है। बिहार में बाहर से आने वाली बिजली की दर ज्यादा है। सभी राज्यों के लिए बिजली का एक रेट हो जाय तो अच्छा होगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में अब प्रजनन दर घटकर 3.2 हो गया है। हमलोग प्रजनन दर को और कम करना चाहते हैं। सभी पंचायतों में प्लस 2 उच्च माध्यमिक विद्यालय बनाने की योजना पर काम चल रहा है।

9वीं क्लास की पढ़ाई बची हुई पंचायतों में भी शुरू कर दी गई है और उन्हें आगे 12वीं क्लास तक पढ़ाया जायेगा। लड़कियों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इंटर पास अविवाहित लड़कियों को 25 हजार रुपये तथा स्नातक पास विवाहित या अविवाहित लड़कियों को 50 हजार रुपये की राशि राज्य सरकार दे रही है। बिहार में प्रजनन दर घटेगा और एक स्तर पर नीचे आने के बाद स्थिर हो जाएगा। 
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बिहार: 2.28 लाख करोड़ का बजट पेश, कोई नया कर नहीं, आत्मनिर्भरता पर जोर

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 2.18 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया जिसमें कोई नया कर प्रस्तावित नहीं है। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और ग्रामीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। विधानसभा में भोजनावकाश के बाद वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 2,18,302.70 करोड रुपये का राज्य का बजट पेश करते हुए उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह बजट राज्य में खुशहाली लाएगा।

उन्होंने कहा यह बजट मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के बजट से 6541.21 करोड़ रुपये अधिक है और इसमें 2021-22 में राजस्व अधिशेष 9195.90 करोड़ रुपये अनुमानित है। तारकिशोर ने कहा कि 2021-22 के बजट में 38035.93 करोड़ का सर्वाधिक प्रावधान शिक्षा क्षेत्र के लिए किया गया है। ग्रामीण विकास के लिए 16,835.67 करोड़, सड़क के लिए 15,227.74 करोड़, स्वास्थ्य के लिए 13,264.87 करोड़ और ऊर्जा क्षेत्र के लिए 8560.00 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ।

उन्होंने कहा कि इस बजट में 'सात निश्चय-2' के तहत सात लक्ष्य; युवा शक्ति, बिहार की प्रगति, सशक्त महिला-सक्षम महिला, हर खेत तक सिंचाई का पानी, स्वच्छ गांव-समृद्ध गांव, स्वच्छ शहर-विकसित शहर, सुलभ संपर्कता और सबके लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधा; के लिए 4671.00 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

उल्लेखनीय है कि अपने पिछले शासनकाल के दौरान नीतीश सरकार ने अपने पहले सात निश्चय कार्यक्रम; आर्थिक हल, युवाओं को बल, आरक्षित रोजगार, महिलाओं का अधिकार, हर घर बिजली, हर घर नल का जल, घर तक पक्की गली नालियां, शौचालय निर्माण-घर का सम्मान तथा अवसर बढे, आगे पढें; को लागू किया था।

तारकिशोर ने कहा कि कौशल एवं उद्यमिता के विकास के लिए अब एक अलग विभाग कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग का गठन किया जाएगा जिसमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों आईटीआई और पालीटेक्निक संस्थानों को समाहित किया जाएगा। बजट दस्तावेज में कहा गया है कि 2012-13 को छोड़कर, राज्य का बजट 2008-09 से राजस्व अधिशेष वाला रहा है और इस वर्ष बजट का आकार 2004-05 के मुकाबले नौ गुना बढ़ा है, जब नीतीश सरकार पहली बार सत्ता में आई थी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तारकिशोर द्वारा पेश बजट को संतुलित बताते हुए कहा कि यह सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि बिहार जिसने 2004-05 के बाद से द्विअंकीय विकास दर देखा है, यह बजट राज्य में विकास को और गति देगा। सदन में बजट पेश करने के बाद संवादताओं से बातचीत के दौरान तारकिशोर ने कहा कि बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है। 

यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य सरकार लोगों को कुछ राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर वैट कम करने पर विचार करेगी, तारकिशोर ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इंकार किया। इस सवाल पर कि पेट्रोलियम उत्पादों को भी क्या जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा, वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस सिद्धार्थ ने कहा कि न प्रस्ताव लाए हैं और न ही इस पर कोई चर्चा कर रहे हैं।
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