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सियासी शतरंज: जदयू की गुटबाजी में आरसीपी-ललन से हारे प्रशांत किशोर

शरद गुप्ता, नई दिल्ली। Updated Thu, 30 Jan 2020 02:49 AM IST
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prashant kishore
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सार

  • बिहार चुनाव में अपनी अलग पार्टी बना कर उतर सकते हैं पीके
  • नीतीश पर डाल रहे थे भाजपा से अलग होने का दबाव

विस्तार

जनता दल यू से प्रशांत किशोर और पवन वर्मा की छुट्टी की मुख्य वजह नीतीश कुमार के उत्तराधिकार की लड़ाई है, जिसमें आरसीपी सिंह और ललन सिंह के सामने प्रशांत किशोर (पीके) गुट को हार का सामना करना पड़ा।
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बिहार के 68 वर्षीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में दूसरी पंक्ति का नेतृत्व तैयार करने की है। इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद वे अपनी भूमिका सीमित करने के मूड में हैं। उनके बाद पार्टी नेतृत्व की दौड़ में आरसीपी सिंह, संजय झा, ललन सिंह और प्रशांत किशोर सबसे आगे थे।

ललन सिंह पहले आरसीपी के विरोधी थे, लेकिन पीके के बढ़ते कद को देख दोनों ने हाथ मिला लिए। पार्टी सूत्रों के अनुसार ये दोनों नेता केंद्र सरकार में जदयू कोटे से मंत्री नहीं बनने के लिए भी पीके को जिम्मेदार मानते थे। दरअसल जदयू को एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का प्रस्ताव मिला था।

अमित शाह आरसीपी सिंह को कैबिनेट और ललन सिंह को राज्यमंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन पीके ने नीतीश कुमार को बताया कि राज्यमंत्री के प्रस्ताव से ललन सिंह नाराज हो गए हैं। ऐसे में दोनों ही मंत्री नहीं बन पाए और पीके से नाराज हो गए।

तीन तलाक पर मतभेद
दोनों खेमों के बीच मतभेद का पहला संकेत तीन तलाक बिल पर पार्टी के बदलते रुख से मिला। प्रशांत किशोर की सलाह पर जदयू ने पहले इसका विरोध किया, लेकिन संसद से पारित होने के बाद रुख पलटने वाला बयान आरसीपी सिंह की ओर से आया। जदयू के पूर्व सांसद पवन वर्मा को पीके से नजदीकियों के चलते ही बागी तेवर अपनाने की कीमत चुकानी पड़ी।
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