जब इस्रायल ने एक ही झटके में तबाह कर दिए मिस्र के 286 विमान, हैरान करने वाली है कहानी

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 05 Jun 2020 02:32 PM IST
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मिस्र पर हमला करने जाते इस्रायली विमान
मिस्र पर हमला करने जाते इस्रायली विमान - फोटो : Social media

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सार

  • इस लड़ाई की शुरुआत हुई थी पांच जून, 1967 को. इस्रायली समय के अनुसार सुबह सात बज कर 10 मिनट पर 
  • जब इस्रायल का हमला हुआ तो मिस्र के लगभग सभी विमान जमीन पर थे और उनके पायलट नाश्ता कर रहे थे 
  • इस हमले में इस्रायल ने अपनी वायुसेना के 12 विमानों को छोड़ कर सभी विमानों को झोंक दिया था 
  • मिस्र के कुल 420 लड़ाकू विमानों में से 286 विमान नष्ट कर दिए गए थे

विस्तार

इस लड़ाई की शुरुआत हुई थी पांच जून, 1967 को। इस्रायली समय के अनुसार सुबह सात बज कर 10 मिनट पर। फ्रांस में 50 के दशक मे बने रॉकेटों से लैस 16 मैजिस्टर फाउगा प्रशिक्षण विमानों ने हैटजोर हवाई ठिकाने से टेकऑफ किया। ये फाउगा विमान मिस्टियर और मिराज जेटों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली फ्रीक्वेंसी ट्रांसमिट कर रहे थे और ये आभास दे रहे थे कि वो मिस्टियर और मिराज विमानों की तरह हवाई गश्त की ड्यूटी पर हैं। 
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चार मिनट बाद असली बमवर्षक औरेगन ने हैटजोर हवाई ठिकाने से उड़ान भरी। इसके पांच मिनट बाद रमाट डेविड ठिकाने से मिराज युद्धक विमानों के पूरे स्क्वाड्रन और हात्जेरिम एयर बेस से दो इंजनों वाले 15 वाटूर्स विमानों ने उड़ान भरी। साढ़े सात बजते-बजते इस्रायली वायु सेना के 200 विमान हवा में थे। 
इससे पहले इस्रायली वायुसेना के कमांडर मोट्टी हॉड का रेडियो संदेश सभी पायलटों के हेडफोन पर सुनाई दिया था, 'उड़िए, दुश्मन पर छा जाइए, उसे बर्बाद कर उसके टुकड़ों को पूरे रेगिस्तान में फैला दीजिए ताकि आने वाली कई पीढ़ियों तक इसराइल अपनी भूमि पर सुरक्षित रह सके।' 
धरती से सिर्फ 15 मीटर ऊपर उड़ान
1967 के युद्ध पर मशहूर किताब 'सिक्स डेज ऑफ वॉर' लिखने वाले माइकल बी ओरेन लिखते हैं, 'ये सारे विमान धरती से सिर्फ 15 मीटर ऊपर उड़ रहे थे ताकि मिस्र के 82 रडार केंद्र इन विमानों के रास्ते का पता न लगा सकें। इनमें से अधिकतर विमान पहले पश्चिम की तरफ भूमध्यसागर की तरफ गए। वहां से उन्होंने यू टर्न लिया और मिस्र की तरफ मुड़ गए।

दूसरे विमानों ने लाल सागर की तरफ से मिस्र के बहुत अंदर बने हवाई ठिकानों का रुख किया। सारे विमान बहुत कड़ाई से रेडियों 'साइलेंस' का पालन कर रहे थे। साथ-साथ उड़ रहे पायलट हाथ के इशारे से एक दूसरे से संपर्क कर रहे थे। सारा खेल ही यही था कि मिस्र के तट पर पहुंचने से पहले उन्हें इसकी हवा तक न लग पाए।' 

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इससे पहले इस्रायली वायु सेना के चीफ ऑफ ऑपरेशन कर्नल रफा हारलेव ने सभी पायलटों से कह दिया था कि उन्हें विमान में तकनीकी खराबी आ जाने के बाद भी रेडियो संपर्क स्थापित नहीं करना है। ऐसी दशा में उन्हें अपने विमान को समुद्र में क्रैश कर देना होगा। 
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