अडानी पूरे करेगा जेपी समूह के अधूरे प्रोजेक्ट, लगाई 1700 करोड़ की बोली

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 29 May 2019 09:06 PM IST
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adani to built incomplete projects of jaypee group, will invest 1700 crore rupees

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सार

  • जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण के लिए कंपनी ने लगाई गैर-बाध्यकारी बोली
  • 1,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने का अडानी समूह ने किया वादा

विस्तार

अडानी समूह ने वित्तीय संकट से जूझ रही रियल्टी कंपनी जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण के लिए एक ‘अवांछित और गैर-बाध्यकारी’ बोली लगाई है। सूत्रों का कहना है कि समूह जेपी इंफ्राटेक की अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाने और मकान खरीदारों को फ्लैट देने के लिए 1,700 करोड़ तक का निवेश करने के लिए तैयार है।
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अडानी ने ऋण समाधान प्रक्रिया की लागत के अलावा कामगारों के दावों के साथ सुरक्षित और असुरक्षित वित्तीय लेनदारों के बकाये को पूरा करने के लिए अतिरिक्त 1,000 करोड़ रुपये देने का वादा किया है। यह राशि 500 करोड़ रुपये की दो समान किश्तों में दी जाएगी। इसके अलावा समूह बैंकरों को बकाये के बदले 1,000 एकड़ भूमि भी देगा। 
अडानी समूह ने दिवालिया प्रक्रिया के पहले दौर में भाग लिया था, लेकिन मौजूदा दौर में निश्चित समय-सीमा के भीतर बोली नहीं लगाई थी। हालांकि, समूह ने बाद में जयप्रकाश एसोसिएट्स की सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के लिए बोली लगाने में रुचि व्यक्त की।
सूत्रों के मुताबिक, अब अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने अधिग्रहण के लिए जेपी इंफ्राटेक के अंतरिम समाधान पेशेवर अनुज जैन के समक्ष एक ‘अवांछित और गैर-बाध्यकारी’ बोली पेश की है।

कर्जदाताओं ने एनबीसीसी के सामने रखी पांच शर्तें

जेपी इंफ्राटेक के कर्जदाताओं के समूह ने सरकारी कंपनी एनबीसीसी से रियल्टी कंपनी के अधिग्रहण को लेकर बोली को और आकर्षक बनाने को कहा है। आईडीबीआई की अगुवाई में कर्जदाताओं के समूह ने एनबीसीसी को पत्र लिखकर कहा है कि अगर कंपनी उनकी पांच शर्तें पूरी करती है तो उसकी बोली पर सकारात्मक रूप से विचार होगा। एनबीसीसी को यह पत्र कर्जदाताओं के समूह की बैठक से दो दिन पहले सोमवार को लिखा गया।

 ये हैं शर्तें

  • एनबीसीसी को 950 एकड़ जमीन के बदले 1,426 एकड़ भूमि की पेशकश करनी चाहिए। वित्तीय कर्जदाताओं को उनके कर्ज के आधार पर समानुपातिक रूप से भूखंड देना होगा।     
  • अगर प्रस्तावित बोली के तहत यमुना एक्सप्रेस-वे और भूमि विशेष उद्देश्यीय कंपनी को हस्तांतरित करने के बारे में संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी नहीं ली गई है तो एनबीसीसी को यमुना एक्सप्रेस इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी से अनुमति लेनी चाहिए।
  • एनबीसीसी को भविष्य की कर देनदारी से छूट के बारे में आयकर प्राधिकरण से जरूरी मंजूरी लेनी चाहिए। इस संबंध में एनबीसीसी को अपनी बोली के क्रियान्वयन को लेकर प्राधिकरण से जरूरी मंजूरी प्राप्त करनी चाहिए। 
  • कर्जदाता बिना बिके फ्लैट के संदर्भ में एनबीसीसी को वित्तीय सहायता देने पर विचार करेगा बशर्ते इस प्रकार की सहायता को केंद्र से गारंटी मिले।
  • भूखंड के हस्तांतरण के कारण भविष्य में जो आयकर या जीएसटी या कंपनी कर देनदारी बनेगी, उसे समाधान आवेदनकर्ता ही वहन करेगा। गारंटी वाले वित्तीय ऋणदाता ऐसी कोई देनदारी नहीं चुकाएंगे।
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