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बजट 2020: 5जी तकनीक के साजोसामान पर सीमा शुल्क में राहत संभव

बजट डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Jan 2020 12:05 AM IST
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budget 2020 expectations mobile companies want relief in custom duty for 5g equipments
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घटते राजस्व और समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) मसले पर उच्चतम न्यायालय से पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद दूरसंचार कंपनियों की आस आगामी बजट पर टिक गई है। सरकार ने देश में 5जी तकनीक पर काम शुरू करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में आगामी बजट में इनके लिए अत्याधुनिक तकनीक के नेटवर्क से संबंधित साजोसामान के आयात पर सीमा शुल्क में छूट की घोषणा हो सकती है।
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वित्त मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पिछले दिनों दूरसंचार विभाग के अधिकारियों ने मिलकर दूरसंचार उद्योग की उम्मीदों और आवश्यकताओं से अवगत कराया। उन्होंने लाइसेंस शुल्क में कमी और लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराने के लिए सहयोग की गुजारिश की है। साथ ही यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) के भुगतान से भी कुछ दिनों की छूट मांगी है। उम्मीद की जा रही है कि इनकी कुछ जायज मांगों से संबंधित प्रस्ताव को बजट में शामिल किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम यजेस चार्ज और लाइसेंस शुल्क के रूप में क्रमश: 3-6 फीसदी और आठ फीसदी एजीआर के रूप में देना पड़ता है। इसके साथ ही लाइसेंस शुल्क के रूप में जो आठ फीसदी राशि का भुगतान किया जाता है, उसें पांच फीसदी यूएसओएफ लेवी है। सरकार इसका उपयोग बिना दूरसंचार कवरेज वाले क्षेत्र में दूरसंचार उपलब्धता बढ़ाने के लिए करती है। एजीआर में बकाये से संबंधित पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद दूरसंचार कंपनियों को उम्मीद है कि सरकार आगामी बजट के जरिए उन्हें 1.47 लाख करोड़ रुपये के बकायों की अदायगी के साथ भारी कर्जों के दंश से राहत प्रदान कर सकती है। स्पेक्ट्रम यूजेस चार्ज और लाइसेंस शुल्क में कमी के जरिए ऐसा किया जा सकता है।
दूससंचार क्षेत्र की कंपनियों का कहना है कि यदि बजट में लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम यूजेस चार्ज की दरों से राहत नहीं दी गई तो उनके लिए आगामी स्पेक्ट्रम की नीलामी में भाग लेना मुश्किल हो जाएगा। यदि वे इसमें भाग नहीं लेती हैं तो दूरसंचार सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के साथ 5जी सेवाओं की शुरूआत में देरी हो सकती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर दूरसंचार क्षेत्र की परिस्थितियों से अवगत करा दिया गया है। वर्तमान परिस्थितियों में स्पेक्ट्रम यूजेस चार्ज और लाइसेंस शुल्क में कमी जरूरी है। लाइसेंस शुल्क को वर्तमान आठ फीसदी से घटाकर तीन फीसदी करने जबकि स्पेक्ट्रम यूजेस चार्ज को छह फीसदी से घटाकर एक फीसदी करने की मांग की गई है। उम्मीद है कि इस क्षेत्र को राहत मिलेगी।


राजन एस मैथ्यू, महानिदेशक, सीओएआई
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