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मोटर वाहन कानून लागू न करने वाले राज्यों में लगेगा राष्ट्रपति शासन

शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली Updated Mon, 06 Jan 2020 09:06 PM IST
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traffic police jammu challan
traffic police jammu challan - फोटो : अमर उजाला
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सार

  • बढ़ा जुर्माना नहीं वसूलने वाले राज्यों को  मंत्रालय ने दी चेतावनी
  • राज्यों को नहीं है जुर्माने की राशि घटाने का अधिकार
  • 01 सितंबर, 2019 से जुर्माने के प्रावधानों को देशभर में किया गया था लागू 

विस्तार

सड़क पर नियम तोड़ने वालों से मोटर वाहन (संशोधन) कानून-2019 के अनुरूप बढ़ा जुर्माना नहीं वसूलने वाले राज्यों को केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाने की चेतावनी दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जुर्माने की राशि में कमी करने वाले राज्यों को स्पष्ट कहा है कि ऐसा करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। केंद्र के नियमों को दरकिनार कर जो राज्य अपने यहां बढ़ा जुर्माना नहीं वसूल रहे हैं, उनमें भाजपा शासित उत्तराखंड, गुजरात, कर्नाटक और असम समेत सात राज्य शामिल हैं। अन्य तीन राज्य झारखंड, केरल और मणिपुर हैं। इन राज्यों को इस संबंध में सोमवार को केंद्र की ओर से पत्र भेज दिया गया है। 
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केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार के कानून को दरकिनार कर जुर्माना कम करने वाले राज्यों में राष्ट्रपति शासन भी लागू हो सकता है। कानून मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई राज्य केंद्र के इस दिशा-निर्देश का पालन नहीं करता है तो वह संविधान के अनुच्छेद 356 के दायरे में आ सकता है। और इसी आधार पर उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

कानून मंत्रालय से ली गई राय

अधिकारी ने बताया कि राज्यों को पत्र भेजने से पहले केंद्रीय कानून मंत्रालय से इस पर राय ली गई थी। कानून मंत्रालय ने कहा कि मोटर वाहन कानून संसद की ओर से पारित किया गया है और उस कानून के तहत तय किये गए जुर्माने को कोई राज्य कानून बना कर तब तक कम नहीं कर सकता है, जब तक कि उस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल जाए। यहां अगला सवाल उठता है कि क्या ऐसे मामलों में केंद्र सरकार अपना कानून लागू कर सकती है। इस पर कानून मंत्रालय ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 256 में केंद्र सरकार को ऐसा करने के लिए अधिकृत किया गया है। 

सड़क सुरक्षा के लिए बढ़ाया गया था जुर्माना

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि सड़क पर कानून तोड़ने वालों के लिए जो जुर्माने में भारी बढ़ोतरी की गई थी, उसका उद्देश्य सरकारी खजाना भरना नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार चाहे तो केंद्र द्वारा तय किये गए जुर्माने को बढ़ा सकती है, घटाने का अधिकार उसे नहीं है।

सात राज्यों ने घटा दिया है जुर्माना

केंद्र सरकार ने मोटर वाहन कानून 2019 से जुड़े नियमों को बीते नौ अगस्त को राजपत्र में प्रकाशित किया था। उसके बाद एक सितंबर 2019 से जुर्माने के प्रावधानों को पूरे देश में लागू किया गया था। तदोपरांत, उत्तराखंड, गुजरात, कर्नाटक, झारखंड, केरल, असम और मणिपुर ने अधिसूचना के जरिये जुर्माने की राशि को घटा दिया था।
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