कंपनियां जल्द उतार सकती हैं शेयर बाजार से जुड़े बीमा उत्पाद 

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 03 Sep 2020 06:14 AM IST
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सार

  •  इरडा ने इंडेक्स-लिंक्ड बीमा उत्पाद पर फैसले के लिए बनाई समिति
  •  2013 के बाद इरडा ने बंद कर दिए थे आईएलआईपी

विस्तार

बीमा उत्पादों में निवेश करने वाले ग्राहकों का प्राथमिक लक्ष्य सुरक्षा के साथ गारंटी वाला रिटर्न प्राप्त करना होता है। यही कारण है कि बाजार में अभी दो तरह के यूलिप और पारंपरिक बीमा उत्पाद ही मिलते हैं। अब कंपनियां शेयर बाजार से जुड़े बीमा उत्पाद उतारने की तैयारी में हैं। 
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भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने कंपनियों की मांग पर इंडेक्स-लिंक्ड बीमा उत्पाद (आईएलआईपी) उतारने के लिए एलआईसी के अधिकारी दिनेश पंत की अगुवाई में समिति बनाई है। इरडा ने 1 सितंबर, 2020 को जारी नोटिफिकेशन में कहा है कि समिति की सिफारिशों के बाद इंडेक्स-लिंक्ड बीमा उत्पाद का स्वरूप निर्धारित किया जाएगा।
यह पहली बार नहीं है जब आईएलआईपी बाजार में आएगा। 2013 से पहले भी बीमा कंपनियां इस तरह के उत्पाद बेचा करती थीं, लेकिन वर्ष 2000 के बाद इन उत्पादों की बिक्री पर जोर दिए जाने के बाद नियामक ने रोक लगा दी थी। हालांकि, कंपनियों की सिफारिश पर इरडा ने उत्पाद पर फैसले के लिए समिति बनाई है, जो दो महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। समिति इस बात का विश्लेषण करेगी कि इन उत्पादों से बीमाधारकों को सुरक्षा के साथ अन्य हित कैसे सुनिश्चित कराए जाएं।
 
बाजार के उतार-चढ़ाव से तय होगा रिटर्न
इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के डिप्टी सीईओ रुशभ गांधी ने बताया कि आईएलआईपी के कुछ प्लान 10 साल वाली सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़े होंगे, जिनका प्रीमियम सालाना बेंचमार्क दरों के आधार पर तय किया जाएगा। इसके अलावा कई प्लान इक्विटी आधारित होंगे, जो सेंसेक्स और निफ्टी में आने वाले उतार-चढ़ाव से जुड़े होंगे। सरकारी बांड या प्रतिभूतियों से जुड़े उत्पादों पर जोखिम कम रहेगा जबकि शेयर बाजार वाले उत्पाद ज्यादा जोखिम और ज्यादा रिटर्न देने वाले होंगे। इस योजना के तहत पेंशन उत्पाद भी उतारने की तैयारी है। 
 
उपभोक्ताओं के लिए घट जाएगी लागत
बाजार में अभी मौजूद बीमा उत्पादों के प्रबंधन के लिए फंड मैनेजर की जरूरत होती है, जिसकी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है। आईएलआईपी बीमा प्लान में फंड मैनेजर की भूमिका नहीं रहती, जिससे उपभोक्ताओं पर लागत का बोझ भी कम हो जाता है। बीमा उत्पाद के लिए तय किए जाने वाले शेयर बाजार इंडेक्स का निर्धारण भी नियामक करेगा, ताकि निवेश पर मिलने वाले रिटर्न में पारदर्शिता बनी रहे। 

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