आर्थिक सुस्ती से बढ़ी पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड की मांग

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Jan 2020 12:11 PM IST
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Demand for personal loans and credit card spikes as the economy slows down
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अर्थव्यवस्था में जारी की सुस्ती की वजह से लोग अपने दैनिक खर्च को पूरा करने के लिए भी कर्ज लेने लगे हैं। 2019 की तीसरी तिमाही में पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड की मांग में बड़ा उछाल आया है। वहीं, सभी तरह के लोन की वृद्धि दर में 10 फीसदी गिरावट आई है। 
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ट्रांसयूनियन सिबिल की इंडिया रिटेल क्रेडिट ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार, सुस्ती की वजह से रोजगार में कमी और वेतन मिलने में देरी जैसे मामले बढ़े हैं। इस कारण क्रेडिट कार्ड के बकाए और पर्सनल लोन में भी इजाफा हुआ है। जुलाई-सितंबर तिमाही में क्रेडिट के बकाए और खातों की संख्या में 40.7 फीसदी का उछाल आया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 29.8 फीसदी था। इस वृद्धि से क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया 1,090 अरब रुपये पहुंच गया, जबकि देशभर में कुल 4.45 करोड़ क्रेडिट कार्ड चलन में आ गए। दूसरी ओर, पसर्नल लोन के खातों में तो 133.9 फीसदी का जबरदस्त उछाल दिखा और इसके बकाए में भी 28 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। 

कर्ज लेकर पूरा कर रहे खर्च

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि मौजूदा समय में क्रेडिट कार्ड के बकाए में उछाल आने का सीधा मतलब है कि लोग अपने रोजमर्रा के खर्चे के लिए भी कर्ज ले रहे हैं। एक तरफ जहां उपभोक्ता खपत में गिरावट आई है, वहीं क्रेडिट कार्ड की बढ़ती मांग इस बात का संकेत दे रही है कि कम कमाई वाले लोग कर्ज के जरिये अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में यह वृद्धि 31.5 फीसदी रही, जबकि मेट्रो और बड़े शहरों में 25.8 फीसदी का उछाल आया।   

युवा ले रहे ज्यादा पर्सनल लोन 

रिपोर्ट के अनुसार, पर्सनल लोन लेने वालों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। तीसरी तिमाही में 18-30 साल की उम्र के युवाओं ने 42.6 फीसदी पर्सनल लोन लिया। इस अवधि में पर्सनल लोन के कुल 73 लाख नए खाते खोले गए, जो 2018 की समान तिमाही के मुकाबले करीब दोगुना है। सबनवीस ने कहा कि जब अर्थव्यवस्था में रोजगार की कमी और आय में नरमी आती है, तो इस तरह के कर्ज लेने की प्रवृत्ति बढ़ जाएगी। ऐसे में बैंकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि आर्थिक धोखाधड़ी के मामले बढ़ने न पाएं। 

होम और ऑटो लोन की मांग घटी

सुरक्षित माने जाने वाले होम और ऑटो लोन की संख्या में इस दौरान उल्लेखनीय रूप से कमी आई। गाड़ियों की मांग में सुस्ती से जुलाई-सितंबर तिमाही में ऑटो लोन में 10.3 फीसदी वृद्धि रही, जो पिछले साल की समान तिमाही में 16.8 फीसदी थी। इसी तरह, कुल कर्ज में 50 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले होम लोन की वृद्धि भी 10 फीसदी ही रही, जो 2018 में 20.3 फीसदी थी। इस तरह देखा जाए तो सभी तरह के कर्ज की कुल वृद्धि दर 2019 की तीसरी तिमाही में 13 फीसदी रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 23.2 फीसदी थी।
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