टाटा संस-मिस्त्री विवादः 10 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 07 Jan 2020 05:45 PM IST
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tata mistry - फोटो : PTI

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सार

सर्वोच्च न्यायालय आगामी 10 जनवरी को टाटा संस और साइरस मिस्त्री विवाद पर एनसीएलएटी के फैसले पर सुनवाई करेगा। 

विस्तार

गौरतलब है टाटा संस, रतन टाटा और टाटा कंसल्टेंसी लिमिटेड (टीसीएस) ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 
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राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीली न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने 18 दिसंबर को दिए अपने आदेश में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन पद पर फिर से बहाल किए जाने का आदेश दिया था।
टाटा संस के मानद चेयरमैन और शेयरधारक रतन टाटा ने अपनी याचिका में कहा कि एनसीएलएटी का फैसला गलत है, क्योंकि यह टाटा संस को दो समूहों की कंपनी के रूप में देखता है। उन्होंने दलील दी कि मिस्त्री को उनकी पेशेवर क्षमता को देखते हुए टाटा संस का कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया था, न कि टाटा संस में 18.4 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पलोनजी समूह के प्रतिनिधि के रूप में।
टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की 65.89 फीसदी हिस्सेदारी है और कई वर्षों से रतन टाटा इसके चेयरमैन बने हुए हैं। याचिका में कहा गया, एनसीएलएटी के आदेश में गलत तरीके से संकेत किया गया है कि ‘एसपी समूह के किसी शख्स को कुछ अधिकारों या परंपरा के तहत निदेशक नियुक्त किया गया था।’

उन्होंने दलील दी, ‘यह असत्य है और टाटा संस के रिकॉर्ड्स व आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एक प्रकार की नियमावली) के विपरीत है, जो गैर विवादित है और एसपी समूह सहित शेयरधारकों के लिए बाध्यकारी है।’उन्होंने कहा कि साइरस मिस्त्री के नेतृत्व में कमी थी और वह ‘वह समय पर अपने पारिवारिक कारोबार से खुद को अलग करने में अनिच्छुक थे।’

'पब्लिक कंपनी’ रहेगी टाटा संस

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने टाटा संस और साइरस मिस्त्री विवाद में 18 दिसंबर को दिए अपने फैसले में बदलाव के कंपनी निबंधक (आरओसी) के अनुरोध को खारिज कर दिया है। एनसीएलएटी ने कहा कि उसने अपने आदेश में आरओसी पर कोई आरोप नहीं लगाया था।

एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘18 दिसंबर के फैसले में संशोधन का कोई आधार नहीं है।’ इस मामले में एनसीएलएटी ने साइरस मिस्त्री को टाटा समूह को फिर से चेयरमैन पद पर बहाल करने का आदेश दिया था और टाटा संस को आरओसी द्वारा पब्लिक से निजी कंपनी में तब्दील किए जाने को ‘अवैध’ करार दिया था।

टाटा संस, मानद चेयरमैन रतन टाटा और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) ने एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले आरओसी ने अपनी दो याचिकाओं में उसे पक्षकार बनाने और अपने 172 पृष्ठों के फैसले में से ‘अवैध’ और ‘आरओसी की मदद से’ शब्दों को हटाने की मांग की थी।

न्यायाधिकरण ने अक्तूबर 2016 में मिस्त्री को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन हटाने के बाद एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को भी ‘अवैध’ करार दिया था। उसने आरओसी को भी टाटा संस के दर्जे को पलटकर ‘निजी कंपनी’ से ‘पब्लिक कंपनी’ में तब्दील करने के भी निर्देश दिए।

टाटा-वाडिया मिलकर निपटाएं मानहानि विवाद: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगपति रतन टाटा और नुसली वाडिया को मिल-बैठकर मानहानि विवाद को निपटाने के लिए कहा है। टाटा समूह की कुछ कंपनियों के बोर्ड से निकाले जाने के बाद वाडिया ने रतन टाटा सहित टाटा सन्स केकुछ निदेशकों के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दोनों उद्योगपतियों से कहा, ‘आप दोनों समझदार लोग हैं। आप दोनों उद्योग जगत के लीडर हैं। क्यों नहीं आप दोनों मिल-बैठकर इसका निपटारा कर लेते हैं।’

शुरुआत में पीठ इस मामले का निपटारा करने के पक्ष में थी लेकिन वाडिया के वकील ने कहा कि वह इस मामले में अपने मुवक्किल से निर्देश लेना चाहते हैं। इस पर पीठ ने सुनवाई 13 जनवरी तक के लिए टाल दी।

वाडिया के वकील नीरज किशन कौल ने कहा कि वह टाटा समूह के खिलाफ नहीं है। वे उन लोगों के खिलाफ हैं, जिन्होंने उन्हें बोर्ड से हटाने का निर्णय लिया था। बाद में इसे मीडिया में लीक कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उन लोगों द्वारा अपने आरोपों को वापस ले लेना चाहिए।
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