अमेजन की 'सिल्वर जुबली', गैराज में स्थापित हुई कंपनी ने 25 हजार विक्रेताओं को बनाया करोड़पति

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 08 Jul 2019 01:33 PM IST
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Amazon completed 25 years unknown facts including valuation of company

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साल 1994 में सिएटल में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति जेफ बेजोस द्वारा अपने गैराज में स्थापित की गई अमेजन को पांच जुलाई को 25 साल पूरे हो गए हैं। अमेजन की 'सिल्वर जुबली' के मौके पर आज हम आपको कुछ ऐसे तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको हैरान कर देंगे। ऑनलाइन बुक स्टोर से शुरुआत करने वाली यह कंपनी 25 साल में एक लाख करोड़ डॉलर यानी करीब 70 लाख करोड़ रुपये वैल्यूएशन वाली दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है।
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अमेरिका की सबसे बड़ी नियोक्ता कंपनी है अमेजन 

इस कंपनी की शुरुआत तीन लोगों के साथ हुई थी, लेकिन आज अमेजन में करीब साढ़े छह लाख कर्मचारी काम करते हैं और इसी के साथ यह अमेरिका की सबसे बड़ी नियोक्ता कंपनी बन गई है। 

अमेजन के शेयर में 991 गुना वृद्धि

साल 1997 में अमेजन पहली बार  पब्लिक हुई थी। उस समय कंपनी का एक शेयर 1.96 डॉलर का था। लेकिन आज 991 गुना वृद्धि के बाद अमेजन का एक शेयर 1942.91 डॉलर का हो गया है। 

25 हजार से ज्यादा विक्रेता बने हैं करोड़पति 

ना सिर्फ अमेजन के संस्थापक, बल्कि अब तक अमेजन के प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले 25 हजार से ज्यादा विक्रेता करोड़पति बन गए हैं। ई कॉमर्स के अतिरिक्त अमेजन आज इंटरनेट, क्लाउड कम्प्यूटिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी अमेजन दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। 

ई-कॉमर्स बिजनेस में अमेजन की हिस्सेदारी सबसे अधिक

ई-कॉमर्स बिजनेस अमेजन की हिस्सेदारी सबसे अधिक यानी 45 फीसदी है। इसके बाद इस सूची में ई-बे का नाम आता है, जिसकी हिस्सेदारी 6.8 फीसदी है। वहीं ई-कॉमर्स बिजनेस में वॉलमार्ट और एपल की क्रमश: चार और 3.8 फीसदी हिस्सेदारी है। होम डिपो की हिस्सेदारी 1.6 फीसदी है। बेस्ट बॉय की 1.3 फीसदी। वहीं इस क्षेत्र में अन्य कंपनियों की हिस्सेदारी 37 फीसदी है। 

बेजोस को मिला था यह सम्मान

साल 1999 में टाइम मैगजीन ने जेफ बेजोस को 'पर्सन ऑफ द ईयर' और 'द किंग ऑफ साइबर कॉमर्स' की उपाधि दी गई थी। खास बात यह है कि बेजोस 35 साल की उम्र में यह पुरस्कार पाने वाले चौथे युवा थे। 

पहला नाम नहीं था अमेजन

जेफ ने सबसे पहले कंपनी का नाम अमेजन नहीं सोचा था। वो 'आबरा का डाबरा' नाम से इतने आकर्षित थे, कि कंपनी का नाम 'काडाबरा' रखना चाहते थे। हालांकि उनके वकील ने ऐसा करने से मना किया था। इसके बाद उनको RELENTLESS नाम पसंद आया, लेकिन बात नहीं बनी। फिर उन्होंने इसका नाम अमेजन रखा। 

कंपनी छोड़ने पर कर्मचारी को मिलते हैं पांच हजार डॉलर

किसी भी कर्मचारी को कंपनी के छोड़ने पर पांच हजार डॉलर मिलते हैं। हालांकि यह तब होता है जब कंपनी चाहती है। अगर कर्मचारी अपनी मर्जी से कंपनी को छोड़ेगा, तो उसे यह पैसे नहीं मिलेंगे।

छह साल बाद हुआ था पहला लाभ

ऑनलाइन बुक स्टोर से शुरू हुई इस कंपनी ने तीन अप्रैल, 1995 को अपनी पहली किताब बेची थी। पहले ही महीने में कंपनी ने 45 देशों में किताबें बेची थीं। लेकिन कंपनी को पहला लाभ छह साल बाद यानी साल 2001 में हुआ था। 

ग्राहक संतुष्टि के मूल मंत्र पर काम करती है कंपनी 

साल 2005 में कंपनी ने अमेजन प्राइम मेंबरशिप की शुरुआत की थी, जिससे कंपनी को नई ऊंचाइयां मिली। बेजोस हमेशा से ही ग्राहक संतुष्टि के मूल मंत्र पर काम करते आए हैं, जिसके लिए कंपनी ने कई प्रयोग भी किए हैं। 

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