18 देशों में फैला है एयरटेल का कारोबार, यह विदेशी कंपनी हो सकती है नई मालिक

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 21 Jan 2020 10:02 PM IST
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Airtel - फोटो : amar ujala

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भारती एयरटेल का कारोबार फिलहाल दुनिया के 18 देशों में फैला हुआ है। सरकार की मंजूरी के बाद देश की सबसे पुरानी निजी क्षेत्र की यह दूरसंचार कंपनी एक विदेशी इकाई बन सकती है। 24 साल पहले 7 जुलाई 1995 को सुनील भारती मित्तल ने एयरटेल की सबसे पहले शुरुआत दिल्ली में की थी। कंपनी फिलहाल मोबाइल टेलीकॉम के अलावा फिक्सड लाइन, ब्रॉडबैंड, सैटेलाइट टीवी, डिजिटल टीवी, आईपीटीवी जैसे कारोबार कर रही है। मंगलवार को कंपनी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में 508.35 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ था।   
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एयरटेल देश की ग्राहकों की संख्या के अनुसार अभी दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी है। जियो पहले स्थान पर और वोडाफोन आइडिया तीसरे स्थान पर है। एयरटेल ने भारत में टाटा टेलीसर्विसेज, एमटीएन और टेलीनॉर का अधिग्रहण किया था। इसके अलावा दुनिया में वो छह कंपनियों का अधिग्रहण कर चुकी है। 

यह कंपनी खरीद सकती है 100 फीसदी हिस्सेदारी

भारती टेलीकॉम ने सिंगापुर की सिंगटेल और अन्य विदेशी कंपनियों से 4,900 करोड़ रुपये के निवेश के लिए सरकार से अनुमति मांगी थी। सरकार की मंजूरी के बाद देश की सबसे पुरानी निजी क्षेत्र की यह दूरसंचार कंपनी एक विदेशी इकाई बन सकती है। रती टेलीकॉम, भारती एयरटेल की प्रोमोटर कंपनी है।

52 फीसदी हिस्सेदारी है सुनील भारती मित्तल के पास

100 फीसदी एफडीआई मंजूरी से भारती टेलीकॉम में विदेशी हिस्सेदारी बढ़कर 50 फीसदी से अधिक हो जाएगी, जिससे यह एक विदेशी स्वामित्व वाली इकाई बन जाएगी। वर्तमान में सुनील भारती मित्तल और उनके परिवार की भारती टेलीकॉम में करीब 52 फीसदी हिस्सेदारी है। भारती टेलीकॉम की भारती एयरटेल में करीब 41 फीसदी हिस्सेदारी है। सूत्र ने कहा कि भारती टेलीकॉम ने कंपनी में 4,900 करोड़ रुपये के निवेश के लिए आवेदन किया है।
इसमें सिंगटेल और कुछ अन्य विदेशी निवेशकों की ओर से होने वाला निवेश शामिल है। इसके साथ ही भारती टेलीकॉम विदेशी इकाई बन जाएगी क्योंकि इसकी ज्यादा हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों के पास होगी। दूरसंचार विभाग द्वारा इसी महीने इस निवेश को मंजूरी देने की उम्मीद है।
दूरसंचार विभाग ने इससे पहले इस साल की शुरुआत में भारती एयरटेल के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आवेदन को खारिज कर दिया था, क्योंकि कंपनी ने विदेशी निवेश के बारे में स्पष्ट नहीं किया था। सूत्र ने कहा कि वर्तमान में भारती एयरटेल में कुल विदेशी हिस्सेदारी 43 फीसदी है। प्रवर्तक इकाई भारती टेलिकॉम के विदेशी इकाई बन जाने के साथ ही कंपनी (भारती एयरटेल) में विदेशी हिस्सेदारी बढ़कर 84 फीसदी के पार हो जाएगी।
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