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कोरोना से जुड़े बीमा की बढ़ेगी अवधि, नए उत्पाद भी आएंगे, इरडा ने दिए संकेत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 18 Sep 2020 06:46 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Facebook

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कोविड 19 के बढ़ते संक्रमण और वैक्सीन में देरी को देखते हुए इरडा ने कोरोना से जुड़ी बीमा पॉलिसी की अवधि बढ़ाने का भरोसा जताया है। इरडा के चेयरमैन सुभाष सी खुंतिया ने बृहस्पतिवार को सीआईआई के कार्यक्रम में कहा कि लोगों की जरूरत को देखते हुए और बेहतर उत्पाद भी बाजार में उतारे जाएंगे।
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भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के चेयरमैन ने कहा, कोरोना पॉलिसी के नए उत्पाद अधिक गुणवत्ता वाले और समझने में आसान होंगे। साथ ही बीमाधारक को ज्यादा दस्तावेज लगाने की भी जरूरत नहीं होगी।



नियामक के निर्देश पर बीमा कंपनियों ने 10 जुलाई को कोरोना कवच और कोरोना रक्षक पॉलिसी पेश की थी। अभी तक 28 लाख लोगों ने इसका बीमा कराया है, जिसमें करीब 1 लाख करोड़ की राशि शामिल है।

खुंतिया ने कहा कि मौजूदा कोरोना पॉलिसी की अवधि 3.5 महीने से 9.5 महीने तक है, जिसमें अधिकतम 5 लाख का बीमा मिलता है। वैक्सीन में देरी को देखते हुए इन उत्पादों की अवधि भी बढ़ाई जाएगी। 

कोरोना क्लेम में 1430 करोड़ का भुगतान
खुंतिया ने बताया कि 10 जुलाई के बाद से कोविड-19 से जुड़े 2,38,160 दावे किए गए, जिसमें 1,48,298 दावों का निपटारा कर दिया गया है। इसमें कुल 1430 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। आगे भी संक्रमण के बढ़ते मामले देखते हुए इरडा की तैयारी पूरी है और बीमाधारक को जल्द भुगतान के लिए कंपनियों को निर्देशित किया गया है।

अप्रैल में लॉकडाउन के बाद बीमा कारोबार में 19.9 फीसदी गिरावट आई थी, जो अगस्त तक संभलकर 2.1 फीसदी की वृद्धि हासिल कर चुका है। इस दौरान जीवन बीमा में 2 फीसदी और गैर जीवन बीमा में 3.6 फीसदी तेजी आई है। अगले तीन साल में बीमा क्षेत्र में 10 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।

बीमाधारक को दिवालिया प्रक्रिया से बचाने के लिए सख्त होंगे नियम 
इरडा के चेयरमैन ने कहा है कि बीमा कंपनियों दिवालिया होने की स्थिति में ग्राहक के हितों को सुरक्षित रखने के लिए और सख्त नियम बनाए जाएंगे। अभी किसी भी कंपनी को बीमा कारोबार करने के लिए कुल देनदारी और खर्चों की 150 फीसदी पूंजी रखना जरूरी होता है।

कई जीवन और सामान्य बीमा कंपनियों का दिवालिया अनुपात बिगड़ गया है, जो 150 फीसदी के करीब पहुंच गया है। ऐसे में कंपनी के डिफॉल्ट या घाटे की स्थिति में बीमाधारक को नुकसान हो सकता है। 

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