चिंता मनी-50 : जीएसटी रजिस्ट्रेशन क्यों, किसके लिए जरूरी?

नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार Updated Mon, 12 Oct 2020 02:34 AM IST
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वस्तु एवं सेवा कर - फोटो : iStock

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विगत जून में सुमित नागपाल को तब अचानक बड़ी मुसीबत का सामना पड़ा, जब नियोक्ता ने उनके लॉकडाउन के दौर का वेतन रोक दिया। पैसे का प्रबंध करने के लिए उन्होंने पत्नी के नाम से टेक्निकल राइटिंग सर्विस की शुरुआत की। उनके क्लाइंट्स ने उन्हें जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवा लेने की सलाह दी है। ऐसे में, वह जानना चाहते हैं कि ऐसा करना उनके लिए क्यों जरूरी है।
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पंचकूला के सुमित नागपाल की जिंदगी आराम से चल रही थी। वह मोहाली की एक बेकेंड सर्विस कंपनी में पांच साल से काम कर रहे थे। लेकिन लॉकडाउन ने वर्षों बाद उन्हें अचानक भारी मुश्किल में डाल दिया। पत्नी और बेटी के भरण-पोषण के अलावा उन पर होम लोन की किस्त चुकाने का भी बोझ था। आर्थिक नुकसान की भरपाई करने के लिए उन्होंने टेक्निकल राइटिंग का काम शुरू किया।
चूंकि अपनी कंपनी में वह यही काम करते हैं, इसलिए मालिक के साथ किसी किस्म के विवाद से बचने के लिए यह काम उन्होंने पत्नी के नाम से शुरू किया। जुलाई से ही उनके पास काम आने लगे, जिससे उन्हें आर्थिक मदद मिल रही है। हालांकि वह पहले की तरह ही नौकरी कर रहे हैं। अब उनके कुछ क्लाइंट्स उन पर जोर डाल रहे हैं कि वह जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवा लें।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन क्या है?
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर है, जिसे 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया। जीएसटी को लागू करने का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में एक समान कर लागू करना था। देश में करदाताओं को जीएसटी का रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है, क्योंकि जीएसटी ने पहले के तमाम करों की जगह ले ली है। जिन इकाइयों और कंपनियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख से अधिक है, उन्हें एक सामान्य करदाता के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है।

यही जीएसटी रजिस्ट्रेशन है। अनेक कारोबार में जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन के बिना व्यापार करना अपराध माना जाता है और पकड़े जाने पर भारी जुर्माना भरना पड़ता है। जो व्यापारी पहले वैट या सर्विस टैक्स के दायरे में आते थे, वे स्वतः ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन के दायरे में आते हैं। यह रजिस्ट्रेशन व्यक्तिगत करदाताओं, एजेंटों और ई-कॉमर्स एग्रीगेटर के सप्लायरों पर भी लागू होता है।

रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
जीएसटी रजिस्ट्रेशन आम तौर पर दो से छह दिनों में हो जाता है। आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन का आवेदन पत्र भरना पड़ता है और साथ में जरूरी दस्तावेज लगाने पड़ते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिकली अपलोड किया जा सकता है।

जीएसटी रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज-
  1. आवेदक का पैन। 
  2. आधार नंबर। 
  3. बिजनेस रजिस्ट्रेशन का सबूत या इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट। 
  4. प्रमोटर्स/डायरेक्टर की तस्वीरों समेत पहचान और पते के सबूत।
  5. कार्यस्थल के पता का सबूत। 
  6. बैंक अकाउंट स्टेटमेंट/कैंसल्ड चेक।
  7. डिजिटल हस्ताक्षर। 
  8. लेटर ऑफ ऑथोराइजेशन/बोर्ड रेजोल्यूशन फॉर ऑथोराइज्ड सिग्नेटरी। 
  9. जीएसटी रजिस्ट्रेशन फीस।
जीएसटी के लागू होने से सेवा क्षेत्र में अनेक बदलाव आए हैं और एक तय दायरे में आने पर सेवा प्रदाताओं को रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। ऐसे में, सुमित पत्नी के नाम से जो काम कर रहे हैं, उसका सालाना टर्नओवर अगर 40 लाख से अधिक है, तो उन्हें जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

हालांकि कुछ ऐसी संस्थाएं भी हैं, जो उन व्यक्तियों या कंपनियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए कहती हैं, जिनके लिए वे काम करती हैं, क्योंकि ऐसे में, वे उन्हें मुहैया कराई गई सेवाओं पर टैक्स छूट का दावा कर सकती हैं। सुमित को जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए, जिसमें प्रॉप्राइटर के तौर पर उनकी पत्नी का नाम हो।

इस तरह व्यापार से होने वाली आय पत्नी के नाम होगी और सुमित को नौकरी से मिलने वाले वेतन को इससे अलग किया जा सकेगा। चूंकि बड़ी कंपनियां ऐसे लोगों के साथ काम करने को वरीयता देती हैं, जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन हो, इसलिए भी सुमित को ऐसा करना चाहिए।

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