घर खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, 30 लाख से ज्यादा के होम लोन पर घट सकती हैं ब्याज दरें

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 10 Oct 2020 02:38 PM IST
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होम लोन - फोटो : pixabay

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आवास क्षेत्र के महत्व को देखते हुए व्यक्तिगत आवास ऋण (पर्सनल होम लोन) पर बैंकों के जोखिम संबंधी प्रावधानों में ढील देने का फैसला किया है। इससे बैंकों को पूंजी का प्रावधान कम करना होगा और वे अधिक आवास ऋण देने के लिए प्रोत्साहित होंगे। साथ ही 30 लाख रुपये से अधिक के होम लोन पर ब्याज दरें सस्ती हो सकती हैं।
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75 लाख रुपये से अधिक के होम लोन में सबसे बड़ी कमी की उम्मीद है। बैंक अब बड़े ऋणों को बढ़ाने के इच्छुक होंगे, क्योंकि छोटे आकार के ऋणों की तुलना में बड़े लोन की सेवा देने की लागत कम होगी। मौजूदा समय में होम लोन की दरें ऋण के आकार से जुड़ी हुई हैं। 30 लाख रुपये तक के लोन की दरें सबसे कम हैं और लोन के आकार के अनुरूप दरें बढ़ती हैं।
             
                     



विभिन्न बैंकों में इतनी है ब्याज दर
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) 30 लाख रुपये तक के लोन पर सात फीसदी और 30 लाख रुपये से 75 लाख रुपये के लोन पर 7.25 फीसदी शुल्क वसूलता है। वहीं 75 लाख रुपये से अधिक के लोन पर ब्याज दर 7.35 फीसदी है। इसी तरह, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की लोन की तीन स्लैब में दरें 7.15 फीसदी, 7.25 फीसदी और 7.30 फीसदी से 7.40 फीसदी हैं। एचडीएफसी लिमिटेड की बात करें, तो यह बैंक 30 लाख रुपये तक के लोन पर 6.95 फीसदी शुल्क वसूलता है और उससे ज्यादा के कर्ज पर 7.05 फीसदी। अधिकांश उधारदाता महिला कर्जधारकों से पांच आधार अंक कम शुल्क लेते हैं।

पूंजीगत आवश्यकताओं से होती है दरों में वृद्धि
दरों में वृद्धि पूंजीगत आवश्यकताओं के कारण होती है, जो ऋण के आकार के साथ बढ़ती हैं। वर्तमान में, बैंक को 30 लाख रुपये तक के होम लोन के लिए निर्धारित पूंजी का केवल 35 फीसदी पूंजी को बनाए रखना होता है। वहीं 30 लाख रुपये से 75 लाख रुपये तक के होम लोन पर बैंकों को 50 फीसदी पूंजी को बनाए रखना होता है और 75 लाख से अधिक के कर्ज के लिए यह सीमा 75 फीसदी है।

रिजर्व बैंक ने सरल किए सरल किए जोखिम पूंजी प्रावधान
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक समीक्षा बैठक की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2022 तक मंजूर किए जाने वाले सभी आवास ऋणों के लिए अब केवल कर्ज की राशि और आवासीय संपत्ति के मूल्य के अनुपात एलटीवी (लोन-टू-वैल्यू) की कसौटी ही लागू होगी। इसके पहले बैंकों को बड़े लोन के लिए ज्यादा पूंजी अलग रखनी होती थी।

आरबीआई ने कहा है कि अब आवासीय संपत्ति मूल्य के 80 फीसदी तक के कर्ज पर बैंकों के लिए 35 फीसदी जोखिम भारांक के आधार पर पूंजी का प्रावधान रखना होगा। इसी तरह 90 फीसदी तक के कर्ज के लिए जोखिम मानक 50 फीसदी भारांक के अनुसार पूंजी रखनी होगी। 

अभी तक बैंकों के लिए कर्ज की राशि और एलटीवी दोनों के आधार पर अलग-अलग जोखिम भारांक के अनुसार प्रावधान करना होता था। आरबीआई ने कहा कि जोखिम भारांक की कसौटी को तर्कसंगत बनाने से 'बैंक व्यक्तिगत आवास कर्ज देने को प्रोत्साहित होंगे।' 
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