बंदी छोड़ दिवस पर बोले अकाल तख्त जत्थेदार- पंथक शख्सियतों के बीच टकराव चिंता का विषय

न्यूज डेस्क/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Updated Mon, 28 Oct 2019 04:01 PM IST
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अकाल तख्त जत्थेदार
अकाल तख्त जत्थेदार - फोटो : फाइल फोटो

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बंदी छोड़ दिवस पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने विशेष संदेश दिया, जिसमें उन्होंने पंथक शख्सियतों के बीच टकराव पर चिंता जताई। हरप्रीत सिंह ने कहा है कि पंथक शक्ति को अलग-थलग करने के लिए सिख धर्म के भीतर ही प्रमुख ऐतिहासिक स्त्रोंतों, सिद्धांतों और मर्यादाओं पर विवाद खड़े किए जा रहे हैं। पंथक संस्थाओं और इनके साथ जुड़ी शख्सियतों के विरुद्ध प्रयोग की जा रही शब्दावली कौमी संस्थाओं की तबाही का कारण बन रही है। यह किसी पंथ विरोधी ताकत की सोची समझी साजिश का हिस्सा है। पंथक शख्सियतों के बीच टकराव चिंता का विषय है।
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जत्थेदार बंदी छोड़ दिवस के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब की ड्योढ़ी से कौम के नाम संदेश दे रहे थे। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि सिखों को धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक और विशेष तौर पर नौजवानों को बौद्धिक तौर पर कंगाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। श्री गुरु नानक देव जी के समय काल से चले आ रहे इस निर्मल पंथ का विरोध संगठित और राजनितिक ताकत से लबरेज है। इसका मुकाबला करने के लिए सिख न तो संगठित हैं, न ही सिख इकट्ठे बैठ कर इस पर मंथन करने के लिए बौद्धिक तौर पर तैयार हैं।
वर्तमान दौर में आध्यात्मिकता से दूर आधुनिकतावाद की आंधी में खालसा पंथ की विरासती भूमि में पंजाबी भाषा व गुरमुखि लिपि को पंजाब में ही पैरों के नीचे रौंदा जा रहा है। कई दशकों की सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों को रिहा नहीं किया जा रहा। सिख विरासत व सभ्याचार पर हमले किए जा रहे हैं। खालसा पंथ को गंधला करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पंजाब की भूमि बंजर बन रही है। इस सभी समस्याओं को सिखों की समस्या कह कर गैर सिखों द्वारा मूक दर्शक बने रहना चिंता का विषय है।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि इन समस्याओं से निपटने के लिए खालसा पंथ का एकजुट होना जरूरी है। विरासत बचाने के लिए एकजुटता से प्रयास नहीं हुए तो सिखों की नई पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी। इतिहास के वर्तमान पन्नों को जब नई पीढ़ी खोलेगी तो इन पन्नों में निराशा के अलावा कुछ नहीं होगा। जरूरत है कि सभी पंथक संगठन एक जुट हों और निजी स्वार्थों से ऊपर उठे। पंथक संगठन अनावश्यक मुद्दों में न उलझे। पंथक एकता का सबूत देकर अपनी ताकत पंथक विरोधियों के सामने खड़ी करें।
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