बेमिसालः डॉ. भारती की सूझबूझ के दम पर कोरोना काल में 100 माताओं की गोद में गूंजी किलकारी

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 13 Oct 2020 11:53 AM IST
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डॉ भारती जोशी अपने परिवार के साथ
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जिम्मेदारियां भी ईश्वर उन्हें ही देता है जिनके कंधे मजबूत होते हैं। इसे सच कर दिखाया है पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भारतीय जोशी ने। कोरोना काल में लगातार आठ महीने तक बिना अवकाश लिए ड्यूटी कर रहीं डॉ. भारती की सूझबूझ और वरिष्ठ के सहयोग से अब तक 100 कोरोना पॉजिटिव गर्भवतियों की गोद में किलकारी गूंज चुकी है। विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता सूरी के साथ ही पीजीआई प्रशासन डॉ. जोशी की गिनती अपने श्रेष्ठ योद्धाओं में करता है।
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डॉ. भारती ने हर जिम्मेदारी को बखूबी दिया अंजाम
कोरोना के शुरुआती दौर में जब हर तरफ इस महामारी से बचाव को लेकर लोग परेशान थे। उस समय डॉ. भारती को उनकी विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता सूरी ने अहम जिम्मेदारी देते हुए कोरोना का नोडल बनाया। उस दौरान डॉ. भारती ने डिपार्टमेंट के डॉक्टर और स्टाफ के साथ ही वहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को भी इस संक्रमण से बचाने की रणनीति बनानी शुरू की।


ओपीडी के साथ ही सीजेरियन, नॉर्मल डिलीवरी, वार्ड में भर्ती महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रोटोकॉल बनाएं। एक नोडल की जिम्मेदारियों को पूरा करने के साथ साथ डॉक्टर भारती ने अपनी विशेषज्ञता का भी लाभ गर्भवती महिलाओं को दिया। उन्होंने ओपीडी व सीजेरियन डिलीवरी कराने की भी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।

घर में बीमार सास, ननद और दो बेटियों की उठा रहीं जिम्मेदारी
डॉ. भारती के पति डॉ. अमित जोशी धर्मशाला में न्यूरो सर्जन हैं। कोरोना के कारण वे शुरुआती चार महीने के दौरान एक बार भी घर नहीं आ पाए थे। ऐसी स्थिति में डॉ. भारती को अपने डिपार्टमेंट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का वहन करते हुए घर में बीमार सास और अपनी दो बेटियों की देखभाल का भी जिम्मा उठाना पड़ा।

उन्होंने बताया कि उनकी सास को भूलने की बीमारी है। वहीं उनकी ननद सुन और बोल नहीं पाती, लेकिन उन्हें इससे कभी भी कोई परेशानी नहीं हुई । उन्होंने अपनी ननद की बातों को समझने के लिए दृश्य भाषा (साइन लैंग्वेज) को सीखा। इसके बल पर वह बड़ी आसानी से अपनी ननद की मदद से घर की जिम्मेदारियों को अस्पताल में रहते हुए भी बखूबी निभाती हैं।

हमेशा रहती है चेहरे पर मुस्कान
डॉ. भारती ने बताया कि सफलता और ऊर्जा का मुख्य स्रोत उनकी सकारात्मक सोच और परिवार व वरिष्ठ जनों से मिलने वाला सहयोग है। डॉ. भारती के लिए उनकी ड्यूटी और परिवार की जिम्मेदारी दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन दोनों में से किसी में भी जरा सी कमी नहीं छोड़ना चाहती। इसलिए वे तमाम मुश्किलों को पार करती हुई अपने मेहनत और धैर्य के बल पर घर और पीजीआई जैसे संस्थान में सफलता प्राप्त कर रही हैं। इसके बल पर उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है।

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