Farmer Protest: कड़ाके की ठंड में सड़कों पर डटे बुजुर्ग किसान, सेहत के लिए परिजन परेशान

यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 01 Dec 2020 12:38 PM IST
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किसान आंदोलन: प्रदर्शन में शामिल बुजुर्ग किसान।
किसान आंदोलन: प्रदर्शन में शामिल बुजुर्ग किसान। - फोटो : फाइल फोटो

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नए कृषि कानूनों के विरोध में सड़कों पर डटे किसानों में कई बुजुर्ग किसान भी हैं। सर्दी शुरू हो चुकी है, जिस कारण इन किसानों के परिजनों को उनकी सेहत की चिंता सता रही है। महिलाएं और बच्चे सुबह से लेकर रात तक कई-कई बार फोन कर अपने पतियों, पिता, दादा और परदादा का कुशलक्षेम पूछ रहे हैं। बहादुरगढ़ में सोमवार को पंजाब के एक किसान की हृदयाघात से मौत के बाद किसानों के परिजनों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। वहीं धरने पर डटे किसानों का कहना है कि वे अपना हक लेने के लिए अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ेंगे।
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भारतीय किसान यूनियन के नेता मलकीत सिंह, बलजिंदर सिंह और जय सिंह जंजेहड़ा ने बताया कि सिंघु, टिकरी और कुंडली बॉर्डर पर पहुंचने के लिए किसानों को बीते दिनों कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। उन्हें पुलिस की पानी की बौछारें भी झेलनी पड़ीं। इन किसानों में कई किसान बुजुर्ग हैं, इसलिए उनके परिजन को उनकी सेहत बिगड़ने का डर बना हुआ है। कुछ की सेहत नासाज हुई थी, जो अब ठीक है। स्वयंसेवी संस्थाओं के डॉक्टर बुजुर्ग किसानों के स्वास्थ्य की लगातार जांच कर रहे हैं।



किसान नेता अमरजीत मोहड़ी और कृष्ण कुमार का कहना है कि कड़ाके की ठंड पड़े, बारिश हो या लाठियां खानी पड़ें, किसान जान की परवाह किए बिना मोर्चा संभाल रहे हैं। ठंड से बचने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर तिरपाल बांधे गए हैं। बाहर निकलने पर ठंड न लगे, उससे बचाव के लिए गर्म शॉल भी ओढ़ रहे हैं। हालांकि हृदयाघात से एक किसान की मौत होने पर सबके घर वाले चिंतित हैं।

हरपाल सुंदर, सोहन सिंह व राम कुमार कहते हैं कि परिजनों की चिंता वाजिब है। इतनी ठंड में किसी की भी सेहत खराब हो सकती है। हम खुद को सर्दी से बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। लड़ाई बड़ी है, इसलिए जान की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

इंटरनेट बहुत धीमा, किसान नहीं ले पा रहे ताजा जानकारी
भारतीय किसान यूनियन के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने बताया कि कुंडली बॉर्डर पर किसानों के धरना स्थल व आसपास इंटरनेट की स्पीड बहुत धीमी है। इससे किसानों को कोई भी नई जानकारी तुरंत नहीं मिल पा रही। सोशल मीडिया पर वीडियो या पोस्ट घंटों बाद अपलोड हो रही हैं। परिजन को किसान वीडियो कॉल भी नहीं कर पा रहे।

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