बाजार और मॉल तक खुल गए, मरीज पूछ रहे ओपीडी कब खुलेगी

Panchkula bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 03 Jul 2020 02:09 AM IST
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चंडीगढ़। कोरोना महामारी के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन करते हुए शहर में होटल, मॉल, बाजार समेत कोरोना हॉटस्पॉट रहे बापूधाम के भी लगभग खोल दिया गया है लेकिन अस्पतालों में ओपीडी की सुविधा अभी भी मरीजों को उपलब्ध नहीं है। पीजीआई समेत शहर के सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवा 29 मार्च से बंद है। इससे हजारों मरीजों का इलाज बाधित है। ऐसे में मरीज काफी परेशान हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि प्रशासन के लिए होटल, मॉल और बाजार खोलना जरूरी था, तो क्या मरीजों के लिए अस्पताल की ओपीडी खोलना जरूरी नहीं। लोगों का कहना है कि हजारों की संख्या की बजाय तय संख्या में ही सही लेकिन मरीजों को ओपीडी में इलाज देना शुरू करें।
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7 दिन की बजाय 3 दिन ही खुले ओपीडी
अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से मरीजों की परेशानी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को 7 दिन की बजाय कम से कम दो से तीन दिन की ओपीडी सेवा बहाल कर देनी चाहिए। उस दौरान अस्पताल में आने वाले मरीजों और डॉक्टरों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पूरी तरह पालन किया जाना सुनिश्चित कराया जाए। ऐसा करके मरीजों को इलाज मुहैया कराने के साथ ही कोरोना संक्रमण के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
हजार की बजाय कम संख्या में देखे मरीज
पीजीआई, जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 की ओपीडी में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज देखे जाने की बजाय एक सीमित संख्या तय करके मरीजों को इलाज देने की व्यवस्था की जानी चाहिए। लोगों का कहना है कि हजार की बजाय अगर प्रतिदिन दो से तीन सौ मरीजों को भी इलाज मिलना शुरू हो जाएगा तब भी उन्हें काफी राहत मिलेगी। ओपीडी बंद होने के कारण हजारों मरीज अपने मर्ज को लेकर परेशान हैं। उनकी तकलीफ दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। ऐसी स्थिति में अगर उन्हें इलाज उपलब्ध हो गया तो उनका मानसिक तनाव भी दूर होगा।
त्वचा संबंधी रोगों के मरीज ज्यादा परेशान
गर्मी बढ़ने के साथ ही सबसे ज्यादा त्वचा संबंधी रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का भी मानना है कि गर्मी के कारण स्किन एलर्जी , फंगल इन्फेक्शन और दूसरे संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगर उन्हें समय रहते इलाज नहीं मिला तो उनका मर्ज काफी गंभीर हो सकता है। त्वचा संबंधी रोगों के मरीजों का कहना है कि अगर उन्हें शीघ्र इलाज नहीं मिला तो वे तनाव के कारण किसी गंभीर बीमारी के शिकार हो जाएंगे।
जनता परेशान, कब शुरू होगा इलाज
तीन महीने से भी ज्यादा समय निकल गया अस्पतालों की ओपीडी बंद हुए। ऐसे में प्रशासन को गंभीरता से सोचने की जरूरत है कि मरीजों को होटल और मॉल की बजाय हॉस्पिटल की सुविधा उपलब्ध कराना ज्यादा जरूरी है।
-किरण देवी, हल्लोमाजरा
अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों को हो रही है। उन्हें फोन कॉल और टेली मेडिसिन के माध्यम से फॉलोअप दिया जा रहा है लेकिन यह उनके लिए पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को अस्पतालों की ओपीडी जल्द से जल्द शुरू करने का निर्णय शीघ्र ही लेना चाहिए।
-शिवाकांत पांडे , धनास
शहर में मॉल, होटल, बाजार सब कुछ खोल दिया गया है। सिर्फ अस्पतालों की ओपीडी खोलने में निर्णय लेने में देरी की जा रही है। क्या प्रशासन मॉल और बाजार की तरह अस्पताल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करा कर मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं कर सकता।
-ममता राणा, डड्डूमाजरा
अस्पताल आवश्यक सुविधाओं के अंतर्गत आता है इसलिए सबसे पहले उसे लेकर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जाना चाहिए। पीजीआई समेत शहर के सरकारी अस्पतालों में स्थिति सामान्य करने के लिए प्रशासन को जल्द से जल्द कोई प्लान तैयार करना चाहिए, जिससे मरीजों को राहत मिले।
-मीना कुमारी, नयागांव
कोट
अस्पतालों की ओपीडी चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे खोलने की योजना बनाई जा रही है। शीघ्र ही मरीजों को हो रही समस्या का पूर्ण समाधान कर दिया जाएगा।
-मनोज परिदा, एडवाइजर
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