पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पीएम मोदी से 80,845 करोड़ की मदद मांगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 15 Jun 2020 11:09 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर नए हालात के मद्देनजर लोगों का जीवन बचाने और रोजी-रोटी सुरक्षित रखने के लिए गैर-वित्तीय सहायता समेत 80,845 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मांगी। मुख्यमंत्री की तरफ से मांगी गई गैर वित्तीय सहायता में लंबे समय के कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) कर्ज को माफ करना, मनरेगा के लक्ष्यों में पूंजी खर्चों में विस्तार और केंद्र सरकार के अन्य प्रमुख कार्यक्रम जैसे स्मार्ट सिटी प्रोग्राम, नई राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना और कृषि व औद्योगिक मजदूरों के बुनियादी अधिकारों और हितों की सुरक्षा यकीनी बनाने के लिए अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूर एक्ट में संशोधन और श्रम कानूनों में संशोधन करना शामिल है। 
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिकता को फिर पैरों पर खड़ा करने के लिए 26,400 करोड़ रुपये के सीधे वित्तीय प्रोत्साहन और लंबी मियाद के सीसीएल कर्ज माफ करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा उन्होंने आग्रह किया कि वित्तीय साल 2020-21 के दौरान सभी केंद्रीय योजनाओं के लिए केंद्र द्वारा 100 प्रतिशत फंड दिए जाने चाहिए।
इन क्षेत्रों को है इतनी सहायता की तुरंत जरूरत
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 6603 करोड़ रुपये 
  • कृषि बुनियादी ढांचे की अपग्रेडेशन, एकमुश्त खेती कर्ज माफी, आमदनी सहायता, ब्याज के लिए सरकारी सहायता आदि मुहैया करवाने के लिए 15,975 करोड़ रुपये 
  • गांवों में तरल और ठोस अवशेष प्रबंधन के लिए 5068 करोड़ 
  • ऑनलाइन और अन्य शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने के लिए 3080 करोड़ 
  • ऑनलाइन ट्रेनिंग के लिए 8 करोड़ 
  • मनरेगा के अंतर्गत पूंजी लागत और लक्ष्यों को 767 करोड़ से बढ़ाकर 2413 करोड़ रुपये करने की जरूरत 
रोजगार गारंटी के लिए बने राष्ट्रीय एक्ट 
कैप्टन ने शहरी क्षेत्रों में रोजगार गारंटी के लिए एक राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी एक्ट (एनयूईजीए) का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए सालाना 3200 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। उन्होंने अमरुत, स्मार्ट सिटी, पीएमएवाई आदि स्कीमों के अधीन कुछ रियायतों के साथ 6670 करोड़ की अतिरिक्त पूंजी लागत के साथ राजस्व घाटे के पक्ष से 1137 करोड़ के अनुदान की मांग भी की।
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