अधिक पढ़ने और गैजेट पर व्यस्त रहने वाले

Panchkula Bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 29 Oct 2020 01:39 AM IST
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चंडीगढ़। रिसर्च का कार्य कभी भी किया जा सकता है, लेकिन रिसर्च को लेकर धारणा यही रही है कि मास्टर डिग्री करने के बाद शोध शुरू होता है। उसके बाद रिसर्च पेपर प्रकाशित होते हैं, लेकिन हाईस्कूल के 9 छात्रों ने कमाल कर दिया। उनकी रिसर्च में रुचि बेहतर रही और उनके शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हुए। यह अपने में बड़ी बात है। शोधार्थियों ने बताया है कि जो विद्यार्थी रात को देर तक गैजेट्स आदि पर व्यस्त रहते हैं या अधिक पढ़ाई करते हैं वह विद्यार्थी ऑनलाइन फूड अधिक ऑर्डर करते हैं। विद्यार्थियों ने ऑनलाइन शिक्षा पर भी अध्ययन किया है।
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रिसर्च का विषय चुनना सबसे कठिन
एजू सेनसेई की संस्थापक पुनीता वढ़ेरा और डॉ. मीनाक्षी जिंदल ने बताया कि उनका उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को रिसर्च के कार्य में लाना था। उद्देश्य था कि हाईस्कूल स्तर के विद्यार्थी विश्वविद्यालय स्तर का काम सीखें। उसका अनुभव लें। उनका पहला प्रयास सफल रहा और नतीजा यह है कि मेंटर के साथ मिलकर तैयार किए गए विद्यार्थियों का शोध कार्य अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हुआ। इस कार्यक्रम की शुरुआत 2019 में की। इस कार्यक्रम के लिए पहला चैलेंज था कि युवाओं को तलाशना। इसके लिए एजू सेनसेई की टीम ने काफी मेहनत की। इन शोध पत्रों को लिखने में डॉ. मीनाक्षी जिंदल ने विद्यार्थियों की मदद की। डॉ. मीनाक्षी जिंदल ने बताया कि रिसर्च के विषय के लिए काफी चैलेंज था। इसमें विषय वह लेने थे, जो कि एकदम नए हों और समसामयिक हों, इसलिए इसमें काफी समय लगा। उन्होंने बताया कि उनका डाटा सैंपल ट्राइसिटी के युवाओं और अध्यापकों पर रहा। इसमें कोविड 19 महामारी के कारण कारण पैदा हुई सामाजिक समस्याओं और सामाजिक बदलावों पर काम किया। डॉ. मीनाक्षी के साथ एकमलीन कौर, अनहत सिंह, अनुरीत और धावनी जैन शामिल रहीं।
मोबाइल फोन पर व्यस्त रहने वाले ऑनलाइन खाना मंगा रहे
इसके बाद दूसरा अध्ययन युवाओं की ओर से ऑनलाइन फूड आर्डर करने की आदत पर किया गया। यह अध्ययन उनकी पढ़ाई की आदत और लाइफ स्टाइल पर आधारित रही। मोबाइल पर व्यस्त रहने वाले विद्यार्थी भी ऑनलाइन खाने की डिमांड कर रहे हैं। यह अध्ययन सान्या गोयल ने किया। इस स्टडी के बाद जो पेपर लिखा गया, उसको सोशल साइंस के इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च में सितंबर 2020 में प्रकाशित किया गया। इसके बाद इस कार्यक्रम के अंतर्गत तीन स्टडी की गईं। इसमें कोविड 19 से संबंधित विषय शामिल रहे। इसमें सान्या गोयल, अनहत सिंह, करम मान ने स्टडी की। यह स्टडी कोविड 19 के दौरान शैक्षिक प्रणाली में बदलाव के बारे में शिक्षकों की धारणा और शिक्षाविदों, सह-पाठयक्रम, स्कूल प्रशासन और परीक्षाओं के साथ स्कूली शिक्षा के विभिन्न पहलुओं को कवर करती है। इस स्टडी को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मल्टी डिसिप्लिनरी एजुकेशनल रिसर्च में स्थान मिला।
स्कूल शिक्षा प्रणाली के बदलावों पर भी किया रिसर्च
तानिश वंगू, सौम्या गुप्ता और केसरप्रीत कौर ने कोविड 19 के बाद स्कूल शिक्षा प्रणाली के बारे में छात्रों की धारणा विषय पर अध्ययन किया। इस अध्ययन में बताया कि ऑनलाइन शिक्षा के पक्ष में 211 युवाओं में से 96 हैं। वहीं, परंपरागत शिक्षा के पक्ष में 60 विद्यार्थी हैं। ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने के पक्ष में 140 विद्यार्थियों ने अपनी सहमति दर्ज कराई है। यही नहीं, एक्टिविटीज भी ऑनलाइन करने की बात सामने आई है। उनका पेपर इंटरनेशनल जर्नल आफ रिसर्च इन सोशल साइंसेस में अक्तूबर में प्रकाशित हुआ। एकमलीन कौर, अनुश्रेया सिंह वर्मा और अनुरीत ने कोविड महामारी के दौरान माध्यमिक विद्यालय के छात्रों के स्क्रीन टाइम के साथ स्वास्थ्य, मानसिक और भावनात्मकता पर अध्ययन किया। यह स्टडी भी इंटरनेशनल जर्नल आफ फिजिकल एंड सोशल साइंस में अक्तूबर में प्रकाशित हुई।
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