'ऑनलाइन क्लासेज की आड़ में घंटों गेम्स और मूवी में व्यस्त हैं छात्र, मंडरा रहा कोरोना से बड़ा खतरा'

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब) Updated Mon, 27 Jul 2020 11:08 AM IST
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सार

  • कोरोना के इस दौर में छात्रों के मानसिक व शारीरिक स्थिति में भारी बदलाव
  • मनोचिकित्सक डॉ. हरजोत सिंह मक्कड़ बोले- यह स्थिति कोरोना से भी घातक

विस्तार

ऑनलाइन कक्षाएं विद्यार्थियों को क्लासरूम जैसा माहौल देने में नाकाम हैं, वहीं छात्रों को इंटरनेट व स्क्रीन एडिक्शन का शिकार भी बना रही हैं। चार से छह घंटे की ऑनलाइन क्लास अटेंड करने के अलावा छात्र दिन में कई घंटे मोबाइल पर चिपके हैं। इंटरनेट व कोरोना के इस दौर में छात्रों के मानसिक व शारीरिक स्थिति में भारी बदलाव देखा जा रहा है। ऐसी स्थिति बच्चों के लिए कोरोना से भी घातक है। यह जानकारी मनोचिकित्सक डॉ. हरजोत सिंह मक्कड़ ने पत्रकारों से बातचीत में दी। 
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उन्होंने कहा कि उनके अस्पताल में इन दिनों रोजाना 2 से 3 बच्चे आ रहे हैं, जो इंटरनेट की वजह से साइकोसिस व एंग्जाइटी की गिरफ्त में आ चुके हैं। असल में जो बातें हम किताबें या समाचार पत्र पढ़कर सीख सकते हैं, अपनी विचारधारा व ज्ञान में वृद्धि करते हैं, वह इंटरनेट के जरिये संभव ही नहीं। छात्र इंटरनेट पर ज्ञान की बातें देख तो लेता है, पर इसे अपने मस्तिष्क में बिठा नहीं पाता। स्क्रीन एडिक्शन से अभिप्राय यह है कि बच्चे मोबाइल पर क्लास अटेंड करते हैं।
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