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बेमिसाल बेटियां: डर के आगे जीत है... यही फलसफा अपनाकर हितिका ठाकुर बनीं 'अपराजिता'

कोरोना के मरीजों की देखभाल करते हुए खुद के चेहरे पर जख्म हो गए। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

20 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

30 किसान संगठनों की बैठक में फैसला, पांच नवंबर तक मालगाड़ियों के लिए खोला रेल ट्रैक

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्ताव पास होने के बाद आंदोलनरत किसान यूनियनों की बैठक में 30 किसान संगठनों ने एक राय होकर पांच नवंबर तक मालगाड़ियों के लिए रेलवे ट्रैक खोल दिया है। हालांकि किसान भाजपा नेताओं के आवास, शॉपिंग मॉल्स और रिलायंस पेट्रोल पंप का रणनीति के तहत घेराव जारी रखेंगे। आगे की रणनीति पर फैसला करने के लिए चार नवंबर को चंडीगढ़ में बैठक बुलाई गई है।

किसान भवन में बुधवार को आयोजित बैठक के बाद पत्रकार वार्ता के दौरान भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल ने बताया कि बैठक में विचार-विमर्श के बाद यह तय किया गया है कि अभी उनके संघर्ष का पहला पड़ाव है लेकिन राज्य हितों को देखते हुए पांच नवंबर तक रेलवे ट्रैक खोल दिए जाएं। इसलिए ताकि मालगाड़ियों के जरिए राज्य में जरूरी वस्तुओं की आवाजाही हो सके।

उन्होंने बताया कि आगे की रणनीति बनाने को बुधवार से ही रेल ट्रैक मालगाड़ियों के आवागमन के लिए खोल दिए गए हैं। लेकिन यात्री गाड़ियों को नहीं चलने दिया जाएगा। चार नवंबर को चंडीगढ़ के किसान भवन में बैठक कर अगला फैसला लिया जाएगा। 
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किसान भवन में 30 किसान संगठनों की बैठक। किसान भवन में 30 किसान संगठनों की बैठक।

आलोक वर्मा हो सकते हैं हरियाणा लोक सेवा आयोग के नए अध्यक्ष, चेयरमैन पंचनंदा का कार्यकाल पूरा

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके आईएफएस अधिकारी आलोक वर्मा हरियाणा लोकसेवा आयोग के नए अध्यक्ष हो सकते हैं। उन्होंने 22 अक्तूबर 2020 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त ले ली है। वे 23 अक्तूबर को शपथ ग्रहण कर सकते हैं। वर्मा मुख्यमंत्री के विश्वासपात्रों में से हैं। आयोग के अध्यक्ष आरके पंचनंदा का कार्यकाल 22 अक्तूबर, 2020 को खत्म हो रहा है। आलोक वर्मा मुख्यमंत्री के एडीसी पर्यटन, प्रधान सचिव पर्यटन सहित अनेक पदों पर रह चुके हैं। उन्होंने बुधवार को एक संदेश भी जारी किया। इसमें उन्होंने लिखा कि 31 साल की सेवाएं भारतीय वन सेवा में शानदार रहीं। 22 अक्तूबर, 2020 से सेवानिवृत्ति ले रहा हूं।
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केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस शासित राज्य लाएंगे पंजाब जैसे विधेयक : हरीश रावत

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा में पारित संशोधन विधेयकों की तरह ही अन्य कांग्रेस शासित राज्य भी जल्द ही अपनी विधान सभाओं में ऐसे विधेयक पारित करेंगे। यह जानकारी बुधवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दी। 

पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हरीश रावत ने कहा कि राजस्थान सरकार ने विधेयक लाने का एलान भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अब यह महसूस करने लगी हैं कि केंद्र के कानून उनके राज्यों में किसानी को खत्म कर देंगे। इनका बुरा असर पीडीएस प्रणाली पर भी पड़ेगा। 

इस तरह कानून बनाना संघीय व्यवस्था को भी ध्वस्त करने वाला है। रावत ने कहा कि फसली विविधता के लिए कानून बनाया जाना चाहिए था लेकिन केंद्र की मंशा कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की है ताकि वे इस क्षेत्र पर भी अपना कब्जा जमा सकें। 

रावत ने कहा कि राहुल गांधी भी यह साफ कर चुके हैं कि ये तीनों कानून गरीब के पक्ष में नहीं हैं। केवल अडाणी-अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए हैं। इससे अनाज पैदा करने वाले गरीब को भी मारने की तैयारी है।

सिद्धू को एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपेगी कांग्रेस
नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पूछे गए सवाल पर हरीश रावत ने कहा कि वे पार्टी के जिम्मेदार और वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने सदन में भी तीनों संशोधन विधेयकों को पारित करवाने में अहम भूमिका निभाई है। पार्टी उनके अनुभव और उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें एक से अधिक जिम्मेदारियां भी सौंपेगी।
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पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन सात अहम विधेयक पारित

पंजाब विधानसभा ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह की अध्यक्षता में बुलाए गए विशेष सत्र के अंतिम दिन सात महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर दिया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब स्टेट विजिलेंस कमीशन बिल, 2020 पेश किया। इसके तहत बहु-सदस्यीय कमीशन की स्थापना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के कामों में और पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को रोकना है। 

विजिलेंस ब्यूरो और राज्य सरकार के सभी विभागों के कामकाज पर निगरानी रखने के लिए कमीशन को एक स्वतंत्र संस्था के तौर पर बनाया गया है, जिससे बेदाग, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रशासन मुहैया करवाया जा सके। यह कमीशन विजिलेंस ब्यूरो और राज्य सरकार के अन्य विभागों की कार्य प्रणाली की प्रभावशाली ढंग से निगरानी और नियंत्रण करेगा। 

पंजाब स्टेट विजिलेंस कमीशन विजिलेंस ब्यूरो जांच किए गए मामलों की प्रगति और सरकार के अलग-अलग विभागों में मंजूरी के लिए लंबित पड़े मामलों की समीक्षा करेगा। विजिलेंस कमीशन सरकार के अलग-अलग विभागों को सलाह देगा और विजिलेंस मामलों बारे और पड़ताल करेगा। इस कमीशन को विजिलेंस ब्यूरो को दी गई जिम्मेदारी निभाने के लिए निर्देश देने का अधिकार भी दिया गया है। 
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पंजाब विधानसभा में आखिरी दिन हंगामा, धर्मसोत के इस्तीफे की मांग, विपक्ष की नारेबाजी

पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र।
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के तीसरे दिन अकाली दल, आम आदमी पार्टी और लोक इंसाफ पार्टी ने कथित वजीफा घोटाले को लेकर मंत्री साधु सिंह धर्मसोत के इस्तीफे की मांग करते हुए सदन में जमकर हंगामा किया। वहीं, शोरगुल के बीच मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि वजीफा मामले और नूरपुर जमीन मामले की जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई है। वजीफा मामले में तीन अधिकारियों की कमेटी ने जांच के बाद धर्मसोत को क्लीन चिट दी है।

सदन में बुधवार को अकाली दल ने यह मुद्दा उस समय उठाया, जब सात अहम विधेयकों को पारित करने की कार्यवाही चल रही थी। अकाली दल के सदस्य मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सदन के मध्य में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। अकाली दल द्वारा उठाए गए इस मुद्दे का साथ आम आदमी पार्टी और लोक इंसाफ पार्टी के सदस्यों ने भी दिया। वे भी अपने बेंचों पर खड़े होकर मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाने लगे। 

इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा द्वारा जोर से चिल्लाते हुए स्पीकर से कुछ कहा गया, जो शोरगुल के बीच साफ सुनाई नहीं दिया। स्पीकर राणा केपी सिंह ने उनके इस आचरण पर कड़ा ऐतराज जताते हुए माफी मांगने को कहा। स्पीकर ने आम आदमी पार्टी के विधायकों को बताया कि जब तक चीमा के जोर से चिल्लाने के लिए माफी नहीं मांगी जाती, तब तक उन्हें बोलने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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पंजाब के विधेयकों पर केजरीवाल ने खड़े किए सवाल, कैप्टन बोले- आप किसानों के साथ हैं या खिलाफ

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब विधानसभा में पारित कृषि संशोधन विधेयकों पर सवाल खड़े किए थे। अब इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को पलटवार किया है। कैप्टन ने केजरीवाल से पूछा कि आप किसानों के साथ हैं या उनके खिलाफ। 

विधानसभा में सर्वसम्मति से पास कृषि संशोधन विधेयकों के प्रभाव के संबंध में केजरीवाल ने ट्वीट कर सवाल खड़े किए थे। केजरीवाल ने लिखा था कि जब राज्य सरकार केंद्र के कानून को नहीं बदल सकती तो फिर संशोधन विधेयक पास करने से क्या फायदा?  केजरीवाल के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कैप्टन ने कहा कि इससे दिल्ली के मुख्यमंत्री की पूरी नासमझी नजर आती है। 

केजरीवाल की चुटकी लेते हुए कैप्टन ने कहा कि यह अलग बात है कि दिल्ली के सीएम को इस नासमझी के लिए दोष नहीं दे सकते, क्योंकि दिल्ली वास्तव में राज्य है ही नहीं, जिस कारण ऐसे मुख्यमंत्री के तौर पर एक राज्य को चलाने के लिए कानूनी नुक्तों की समझ नहीं है। 
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हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज बोले- कांग्रेस सपने देखती है और सपने कभी सच नहीं होते

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि कांग्रेस तो सपने देखती है और सपने कभी सच नहीं होते। कांग्रेस की सरकार आने पर सबसे पहले कृषि कानूनों को फाड़ने की बात पर विज ने अपने ही अंदाज में तंज कसा। उन्होंने कहा कि न नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी।

सारी दुनिया जानती है कि झूठ कौन बोलता है और झूठ बोलने की फैक्ट्री किसने लगा रखी है। कांग्रेस का झूठ सुन-सुन कर लोगों के कान पक गए हैं। सब जानते हैं कि झूठ राहुल गांधी व कांग्रेस पार्टी ही बोलती है।

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा पर पलटवार करते हुए विज ने कहा कि यह प्रजातंत्र है और प्रजातंत्र में कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है। सभी विधायकों ने ही उन्हें मुख्यमंत्री चुना है। इसका मतलब यह है कि हुड्डा प्रजातंत्र को चुनौती दे रहे हैं। विज के अनुसार नीतीश व भाजपा के राज में ही बिहार ने तरक्की की है और बिहार का सत्यानाश कांग्रेस सरकारों में हुआ। 

उन्होंने कभी भी बिहार को उभरने नहीं दिया। कभी ऐसी नीति नहीं बनाई कि बिहार आत्मनिर्भर बन सके। विज ने कहा कि जो भी किसानों के हक में होगा वह करेंगे। जो विधेयक पंजाब ने पास किए हैं, उन्हें पढ़ेंगे। अभी ये भी देखना है कि कोई राज्य इस तरह से कर सकता है या नहीं।
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प्रदूषण बढ़ा: चिंता में डाल देंगी पराली जलाने की ये तस्वीरें, पंजाब में नहीं थम रहा सिलसिला

पंजाब में पराली जलाने का सिलसिला थमने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। अमृतसर और तरनतारन के बाद लुधियाना से पराली जलाने की ताजा तस्वीरें सामने आईं हैं। इन दिनों पंजाब में किसान अपने खेतों में पराली जला रहे हैं। पराली जलाने की ये ताजा तस्वीरें लुधियाना के लाडोवाल गांव की हैं।

एक किसान का कहना है कि हम इसके लिए मजबूर हैं। सरकार हमें कुछ भी उपलब्ध नहीं करा रही है। अमृतसर के काथूनंगल गांव में भी पराली जलाने की घटना सामने आई है। यहां एक किसान का कहना है कि वायु प्रदूषण में पराली का शायद ही योगदान है। वाहन और कारखानों का प्रदूषण में प्रमुख योगदान है। बता दें कि पराली जलाने का असर है कि प्रदेश के आठ जिलों की हवा खराब हो गई है। अगर से सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ना तय है।
 
 
तीन दिन पहले तरनतारन में पराली जलाने की घटना सामने आई थी। इससे पहले अमृतसर के घरी गांव के खेतों में जलती पराली की तस्वीरें सामने आई थीं। तरनतारन के भुर्ज गांव में पराली जला रहे किसान का कहना है कि पराली जलाने और बढ़ते प्रदूषण के लिए सरकार जिम्मेदार है। सरकार ने हमें कोई विकल्प नहीं दिया है।  पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 280 फीसदी की वृद्धि
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में इस बार पिछले साल के मुकाबले 280 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल पंजाब में 21 सितंबर से 12 अक्तूबर तक 775 पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं जो इस साल 2,873 तक पहुंच गई हैं। वहीं, हरियाणा में 25 सितंबर से 14 अक्तूबर तक 1386 से अधिक जगहों पर पराली जलाई जा चुकी है।  

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पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा- प्रदूषण के लिए दिल्ली खुद जिम्मेदार, रिपोर्ट में हो चुका खुलासा

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए पंजाब नहीं दिल्ली खुद जिम्मेदार है। ऐसा दावा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने किया है। बोर्ड के सदस्य सचिव करुणेश गर्ग ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिसर्च में पराली सीजन में दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक से पंजाब का सूचकांक स्तर हमेशा कम रहता है। ऐसे में पंजाब पर दिल्ली को प्रदूषित करने का आरोप लगाना न्यायोचित नहीं है।

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2018-19 की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए उत्तर प्रदेश और स्थानीय तौर पर स्वयं दिल्ली द्वारा पैदा किया गया प्रदूषण जिम्मेदार है। आईआईएसईआर के रिसर्च पेपर में पंजाब के साल 2018 और 2019 के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दिल्ली की तुलना में बेहतर थे। 

आईआईएसईआर के शोध में सामने आया था कि साल 2018 और 2019 में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 179 था और इसमें 2.5 फीसदी पार्टिकुलेट मैटर शामिल था, जबकि पंजाब के लुधियाना, जालंधर और अमृतसर का वायु गुणवत्ता सूचकांक क्रमश: 161, 156 और 159 था।
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