विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

सुकमा मुठभेड़ की अंतर्कथाः अति उत्साह में गईं 17 जिंदगियां

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुई नक्सलियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के 12 लड़ाके और एसटीएफ के 5 जवानों की मौत एक बड़ी चूक का नतीजा थी। खुद को साबित करने और कुछ ज्यादा पाने के लालच में ये लड़ाके इतनी आगे निकल गए कि 'नक्सल के अजगर' कहे जाने वाले हिड़मा दस्ते ने आसानी से इनका शिकार कर लिया।

इनके पीछे सीआरपीएफ 'कोबरा' (कमांडो बटालियन फॉर रिजोल्यूट एक्शन) टीम और '150' बटालियन भी थी, लेकिन डीआरजी के लड़ाकों को भरोसा था कि वे अपने दम पर नक्सलियों को खत्म कर वाहवाही लूट लेंगे। इसी चक्कर में वे बाकी टीमों से काफी आगे निकल गए।

सीआरपीएफ के यूएवी में नक्सल गतिविधियों के फोटो भी नजर आए, इसके बावजूद बिना किसी तालमेल के वे लड़ाके बिल्कुल उसी दिशा में, उसी तरह आगे बढ़ गए, जैसा हिड़मा दस्ता चाहता था। और उनके घेरे में फंसकर जान गंवा बैठे।

डीआरजी में शामिल जवान, आखिर कौन हैं

बता दें कि डीआरजी में स्थानीय आदिवासियों को भर्ती किया गया है। ये लोग कभी नक्सलियों के बहुत निकट माने जाते थे। इनमें बहुत से ऐसे भी थे जो किसी न किसी तरह नक्सल कॉडर का हिस्सा रहे हैं। सरकार ने एक नीति के तहत इनका आत्मसमर्पण कराया। मुख्यधारा में लौटने के बाद इन्हें डीआरजी में शामिल कर लिया गया। ये भी कह सकते हैं कि डीआरजी इन्हीं लोगों के लिए बनाई गई थी।

नक्सल का टॉप कॉडर भी इनकी बहादुरी से परिचित है। यही वजह है कि अब वे डीआरजी को निशाना बनाने की फिराक में रहते हैं। दूसरी ओर, ये जवान भी सरकार और लोगों की नजरों में खुद को साबित करने के लिए सदैव दो कदम आगे चलना चाहते हैं।

नक्सल प्रभावित इलाके में लंबे समय से तैनात सीआरपीएफ के एक कमांडर बताते हैं, ऐसा नहीं है कि इनमें बहादुरी की कमी है। ये जंगलों के लड़ाके हैं। हालांकि इनके पास वैसे हथियार नहीं हैं, जो होने चाहिए। इनका अपना इंटेलिजेंस नेटवर्क है। हर ऑपरेशन में इनका जुनून यही रहता है कि किसी भी तरह से ये खुद को साबित करें।

अनुभवी नेतृत्व की भी चुनौती

यहां एक बड़ी दिक्कत नेतृत्व की है। बड़े ऑपरेशन में भी डीआरजी का नेतृत्व हवलदार या एएसआई करता है। वह सभी मुठभेड़ की रणनीति बनाने में कुशल होगा, ये हर जगह संभव नहीं होता।

सीआरपीएफ में नक्सलियों को मारने पर कोई प्रमोशन नहीं मिलता, जबकि डीआरजी में हर नक्सली की मौत पर कुछ भत्ते और प्रमोशन देने का प्रावधान है। यही वो लालच या चाहत है, जो उन्हें सामंजस्य और नेतृत्व जैसी बातों से दूर ले जाती है। सीआरपीएफ में इस तरह के ऑपरेशन के दौरान डिप्टी कमांडेंट और दो सहायक कमांडेंट साथ रहते हैं।

चार टीमें, दो सौ जवान, मगर होती गई चूक दर चूक ...
शनिवार को मिनपा के जंगलों में कोबरा, सीआरपीएफ बटालियन, एसटीएफ और डीआरजी की संयुक्त टीम विशेष ऑपरेशन के लिए निकली थी और इसमें दो सौ से अधिक जवान थे। कोराजगुड़ा के चिंतागुफा इलाके में इन टीमों ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

सीआरपीएफ के मुताबिक, इलाके में नक्सलियों की भारी मौजूदगी का अहसास था। यूएवी से मिली तस्वीर और लोकल इंटेलिजेंस रिपोर्ट से भी यह पुष्टि हो गई थी। उधर, हिड़मा कमांडर का दस्ता, जिसमें नक्सल की सेंट्रल टीम के सदस्य होते हैं, ये कॉडर में टॉप माना जाता है। इनका इंटेलिजेंस नेटवर्क भी बेहद मजबूत है।

इन्होंने डीआरजी को अपने जाल में फंसाया। ये जंगल में उन रास्तों पर अपने सबूत छोड़ते चले गए, जहां से डीआरजी को निकलना था। डीआरजी ने देखा, तो उसके जवान खुश हो गए। उन्होंने यह जानकारी पीछे चल रही सीआरपीएफ तक नहीं पहुंचाई।

चूंकि ये लोग लड़ना तो जानते हैं, लेकिन ऑपरेशन के दौरान कब कौन सा निर्णय लेना है, इसमें ये मार खा जाते हैं। स्थानीय हैं, इन्हें भी जंगलों के चप्पे-चप्पे का हाल मालूम है। कितना आगे जाना है और पीछे स्पोर्ट है या नहीं, दूरी कितनी है, इन बातों की परवाह किए बिना ये लड़ाके बहुत आगे निकल गए।

नतीजा, हिड़मा दस्ते ने इन्हें चारों तरफ से घेर लिया। बाकी टीमों का कोई अता-पता नहीं था। हालांकि एसटीएफ के कुछ जवान डीआरजी के साथ थे। नक्सलियों ने रणनीति के तहत डीआरजी की गोलियां बर्बाद कराईं। उन्होंने जंगल में पटाखे छोड़कर डीआरजी को फायर के लिए मजबूर किया।

डीआरजी बिना किसी नियमों का पालन किए आगे बढ़ते रहे और गुरिल्ला नक्सलियों के चक्रव्यूह में फंस कर रह गए।

नक्सलियों के पास बीपी जैकेट व पटके भी थे

हिड़मा के पास सीजीआरएल, रॉकेट लांचर और मोर्टार जैसे घातक हथियार थे। वे सभी बीपी जैकेट और सिर पर पटका पहने हुए थे। अभी तक जैकेट और पटका केवल सुरक्षाबलों के पास ही होते थे। अब नक्सली भी इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी ओर, डीआरजी व एसटीएफ के पास बड़े हथियार नहीं थे।

उनके पास ज्यादातर एके 47 थीं, जिसकी गोलियां नक्सलियों ने अपनी खास रणनीति से व्यर्थ करा दीं। नक्सलियों ने जवानों पर चारों तरफ से फायरिंग की। रॉकेट लांचर और मोर्टार का भी जमकर इस्तेमाल किया।

हिड़मा इन जवानों को अपने चक्रव्यूह में फंसा कर इतनी दूर ले गया कि बाद में सीआरपीएफ जवानों को वहां तक पहुंचने में ही कई घंटे लग गए। यही वजह रही कि नक्सली, डीआरजी और एसटीएफ जवानों के सभी हथियार लूट ले गए।

सीआरपीएफ कमांडर के अनुसार, इस घटना को टाला जा सकता था, बशर्तें डीआरजी के लड़ाके एक समन्वयपूर्ण नीति से आगे बढ़ते। लेकिन इलाके के सबसे बड़े नक्सल लीडर हिड़मा, जिसका अपना बहुत सटीक इंटेलिजेंस नेटवर्क है, द्वारा बनाई गई रणनीति में लड़ाके फंस गए।
... और पढ़ें

छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में शहीद जवानों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सली हमले में शहीद जवानों को सुकमा में श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री बघेल 23 मार्च को रायपुर से हेलीकॉप्टर से सुकमा पहुंचें। सुकमा जिले में शनिवार को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बल के 17 जवान लापता हो गए थे तथा 15 जवान घायल हो गए थे। आज सभी लापता जवानों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने जवानों की शहादत पर गहरा दुःख प्रकट किया है। उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घटना में घायल जवानों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। 

बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुकमा जिले के मिनपा गांव के जंगल में 250 की संख्या में नक्सलियों ने लगभग 1.5 किलोमीटर तक घात लगाकर जवानों पर हमला किया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को जिले के एलमागुड़ा में नक्सली गतिविधियों की सूचना के बाद चिंतागुफा, बुरकपाल और तिमेलवाड़ा से डीआरजी, एसटीएफ और सीआपीएफ के कोबरा बटालियन के छह सौ जवानों को रवाना किया गया था।

उन्होंने बताया कि जब सुरक्षा बल के जवान मिनपा गांव के जंगल में थे तब लगभग 250 की संख्या में नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया। इस घटना में 15 जवान घायल हो गए थे। देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए थे।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना के बाद 17 जवान लापता हो गए थे। बाद में सुरक्षा बलों ने लापता जवानों की खोज में खोजी अभियान चलाया था। आज लापता जवानों का शव बरामद कर लिया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है कि इस मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों के बटालियन नंबर एक का कमांडर हिड़मा अपने दल का नेतृत्व कर कर रहा था। इस दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का जमकर मुकाबला किया और लगभग चार घंटों तक गोलबारी होती रही।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के दौरान आठ से नौ नक्सलियों को मार गिराया है और इतने ही संख्या में नक्सली घायल भी हुए हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मुठभेड़ के बाद से कम से कम 15 हथियार गायब हैं जिनमें एके 47 और अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर जैसे हथियार भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में घायल जवानों को रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सुकमा जिले में यह नक्सली हमला इस वर्ष का सबसे बड़ा नक्सली हमला है। इससे पहले 2017 में करीब के बुरकापाल क्षेत्र में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 25 जवानों की हत्या कर दी थी।
... और पढ़ें

छत्तीसगढ़ के सुकमा में 17 जवान शहीद, सुरक्षा बलों की 15 राइफल भी ले उड़े नक्सली

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में 17 जवान शहीद हो गए हैं। शनिवार को मुठभेड़ के बाद से ही ये जवान लापता थे। छत्तीसगढ़ पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। 
पुलिस ने बताया कि नक्सलियों से मुठभेड़ में 5 एसटीएफ और 12 डीआरजी के जवान शहीद हुए हैं। सुरक्षा बल को शनिवार से इन जवानों की तलाश थी। 
 


सुरक्षा बल के लिए यह बड़ा झटका है। पुलिस को जवानों के शव मिनपा के जंगलों में मिले। शनिवार को इसी जगह पर नक्सलियों से मुठभेड़ हुई थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया था कि दर्जनों सुरक्षा बल लापता हैं जबकि 14 जवान घायल हैं। 

छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी के मुताबिक 17 जवानों के शवों को राज्य पुलिस की रेस्क्यू टीम ने ढूंढ निकाला है। सुरक्षा बलों की 10 एके-47 समेत 15 ऑटोमैटिक राइफल्स लापता हैं।  पुलिस ने बताया कि चिंतागुफा क्षेत्र में कोरोजगुडा पहाड़ियों के पास शनिवार दोपहर एक बजे मुठभेड़ हुई थी। शाम तक सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई मुठभेड़ हुईं। नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन पुलिस की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी), स्पेशल टास्क फोर्स और कोबरा टीम के 150 जवानों ने मिलकर किया था। रविवार को बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को जवानों की तलाश के लिए भेजा गया था।  ... और पढ़ें

तब्लीगी जमात के लापता सदस्यों की खोजबीन के लिए सघन जांच अभियान चलाया जाए: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सरकार को तब्लीगी जमात के 52 लापता सदस्यों की खोज के लिए सघन जांच अभियान चलाने के लिए कहा है। कोरोना संक्रमण के कारण जारी लॉकडाउन के बीच छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में गुरुवार को सुनवाई शुरु हुई। उच्च न्यायालय में पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की गई।

महाधिवक्ता कार्यालय से प्रेषित अधिकृत जानकारी के अनुसार उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा और न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी की खंडपीठ ने उन पांच मामलों की सुनवाई की जो जनहित याचिका के रुप में प्रस्तुत किए गए थे। सभी मामले कोरोना वायरस से संबंधित हैं।

राज्य की ओर से महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने सहयोगी चंद्रेश श्रीवास्तव और हरप्रीत अहलूवालिया के साथ तथा याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने निवास से इन प्रकरणों पर पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मामले की सुनवाई की।

पांच जनहित याचिकाओं में लॉकडॉउन की वजह, नागरिक अधिकार और संक्रमण से सुरक्षा व्यवस्था के मामले शामिल थे। उच्च न्यायालय को राज्य की ओर से जानकारी दी गई कि नागरिकों को खाद्यान्न मुहैया कराया जा रहा है। जिन्हें राशन कार्ड नहीं मिले हैं, उन्हें भी राशन दिया जा रहा है।

नागरिकों को लगातार सुरक्षा के लिए मास्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लॉकडाउन में शराब दुकानें बंद रहे, इसके लिए दायर याचिका के जवाब में उच्च न्यायालय ने 13 अप्रैल को राज्य से स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

एक जनहित याचिका बिलासपुर में पुलिस द्वारा मारपीट को लेकर दायर की गई थी जिस पर राज्य ने जवाब में स्पष्ट किया है कि इस मामले में पीड़ित ने कोई शिकायत नहीं की है, लेकिन पुलिस अधीक्षक ने आरोपी बताए अधिकारी को लाइन हाजिर कर विभागीय जांच शुरु कर दी है।

जानकारी के अनुसार एक अन्य याचिका तब्लीगी जमात को लेकर थी, जिसमें कहा गया है कि नई दिल्ली स्थित निजामुद्दीन स्थित मरकज से तब्लीगी जमात के 159 सदस्य छत्तीसगढ़ आए थे, जबकि 107 लोगों के ही जांच सैंपल भेजे गए जिनमें से 23 की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। याचिका में कहा गया है कि जमात के 52 व्यक्तियों की अभी तक खोजबीन नहीं की गई है।
... और पढ़ें
कोरोना वायरस: देश में संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कोरोना वायरस: देश में संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

CoronaVirus in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में एक और नया मामला, संक्रमितों की संख्या हुई 11

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में 52 वर्षीय व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। कोरबा जिले की कलेक्टर किरण कौशल ने गुरुवार को बताया कि जिले के कटघोरा शहर के 52 वर्षीय एक व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। उसे रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया है।

कौशल ने बताया कि जिला प्रशासन को जानकारी मिली है कि यह व्यक्ति तब्लीगी जमात के लोगों के संपर्क में था। वहीं इसके मस्जिद में नमाज में शामिल होने की भी जानकारी मिली है। इसके परिवार के अन्य सदस्यों को पृथक रखा गया है तथा कटघोरा शहर को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है।

कटघोरा शहर में बीते शनिवार को तब्लीगी जमात से जुड़े 16 वर्षीय एक लड़के में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि की गई थी। लड़के का इलाज रायपुर के एम्स में किया जा रहा है। लड़के को कोरोना वायरस होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसके संपर्क में आए अन्य लोगों को पृथक में रहने को कहा था।

छत्तीसगढ़ में अभी तक कोविड-19 के 11 मामले सामने आए हैं, जिनमें से नौ लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे गई है। वहीं कोरबा जिले में कोरोना वायरस संक्रमण का यह तीसरा मामला है।
 



देशभर में संक्रमित मरीजों की संख्या 5734 हुई
देश में संपूर्ण लॉकडाउन के बीच कोरोना वायरस का कहर बढ़ता ही जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोरोना के 540 नए मामले आए हैं और 17 लोगों की मौत हुई है। इसी के साथ देशभर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 5734 हो गई है। जिसमें 5095 सक्रिय हैं, 473 लोग स्वस्थ हो गए या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और 166 लोगों की मौत हुई है।
... और पढ़ें

Coronavirus in Chattisgarh: कोरोना से ठीक होने के बाद नौंवें मरीज को मिली अस्पताल से छुट्टी

रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से सोमवार को 21 वर्षीय व्यक्ति को छुट्टी मिल गई जो गत 31 मार्च को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था। यह जानकारी छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य अधिकारियों ने दी।

अधिकारियों ने बताया कि कोरबा के रहने वाले इस व्यक्ति ने लंदन की यात्रा की थी और वह राज्य में कोविड-19 का नौवां मरीज हैं, जिसे ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिली है। राज्य में अब कोरोना वायरस का एक ही व्यक्ति है जो अभी भी संक्रमित है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट किया कि एक और अच्छी खबर, एक और कोरोना मरीज को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। संक्रमित 10 में से नौ व्यक्ति ठीक हो चुके हैं। अब एक ही संक्रमित व्यक्ति है।
... और पढ़ें

छत्तीसगढ़: कोरोना वायरस के तीन मरीज ठीक हुए, तीन अब भी अस्पताल में

 छत्तीसगढ़ में कोविड-19 के तीन मरीज ठीक हो गए हैं और उन्हें रविवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। राज्य में संक्रमण से ठीक हुए रोगियों की संख्या अब सात पहुंच गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित तीन मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राजधानी रायपुर की रहने वाली एक महिला सहित तीन मरीजों की जांच रिपोर्ट में दोबारा संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इनकी उम्र 21 से 24 साल के बीच है। वे विदेश यात्रा पर गए थे।

उन्होंने बताया कि अब भी तीन लोग संक्रमित हैं, जिनमें लंदन से लौटा 21 साल का युवक है जिसे 31 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी के साथ 16 वर्षीय तब्लीगी जमात का सदस्य है और राजनंदगांव का एक व्यक्ति है जिसके 25 मार्च को संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट किया कि ठीक होने के बाद कोरोना वायरस के तीन और मरीजों को एम्स से छुट्टी दे दी गई है। 10 में से सात मरीज ठीक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि तीन मरीज भी जल्दी ठीक हो कर अपने घर लौट जाएं।
... और पढ़ें

छत्तीसगढ़ में तब्लीगी जमात के 16 वर्षीय सदस्य में कोरोना वायरस की पुष्टि

कोरोना वायरस डाक्टर्स (सांकेतिक)
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में तब्लीगी जमात के 16 वर्षीय एक सदस्य की जांच में शनिवार को कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त किशोर पिछले महीने दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुआ था या नहीं।

इस मामले के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में कोविड-19 के मरीजों की संख्या 10 हो गई है। हालांकि शुक्रवार तक उनमें से चार व्यक्तियों का उपचार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

कोरबा की कलेक्टर किरण कौशल ने कहा कि उक्त किशोर पिछले महीने महाराष्ट्र जिले के कटघोरा उपनगर से लौटा था। उन्होंने बताया कि किशोर के नमूने जांच के लिए दो अप्रैल को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भेजे गए थे।

उन्होंने कहा कि किशोर के अलावा 16 अन्य लोगों को कटघोरा के पुरानी बस्ती क्षेत्र में एक मस्जिद में पृथक रखा गया था जहां वह रह रहे थे। उन्होंने कहा कि जांच में विषाणु की पुष्टि होने के बाद उसे एम्स भेज दिया गया।

तब्लीगी जमात के सदस्य इन 16 व्यक्तियों का समूह पिछले महीने महाराष्ट्र के नागपुर से कटघोरा आया था और मस्जिद में ठहरा था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उन सभी के नमूने कोविड-19 की जांच के लिए दो अप्रैल को एम्स भेजे गए थे।

अधिकारी ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वे पिछले महीने दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे या नहीं। यह भी पता नहीं चला सका है कि वे किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए थे या नहीं। लेकिन एहतियात के तौर पर सभी को मस्जिद में पृथक रखा गया गया है और उन पर निगरानी रखी जा रही है।
... और पढ़ें

लॉकडाउन के दौरान पैदा हुए जुड़वां बच्चों का नाम रखा 'कोरोना' और 'कोविड'

कोरोना और कोविड ये वो दो शब्द हैं, जिसने पूरी दुनिया को घुटनों पर ला दिया है। ये दो शब्द दूसरों के मन में भय पैदा कर सकते हैं, लेकिन रायपुर के दंपती ने अपने नवजात जुड़वां बच्चों का नाम 'कोरोना' और 'कोविड' रखा है।

दंपती के लिए जुड़वां बच्चों के रूप में कठिनाइयों पर विजय का प्रतीक हैं। जुड़वां बच्चों में एक लड़का और एक लड़की है। लोगों के मन से महामारी के भय को दूर करने के लिए महिला और उसके परिवार ने जुड़वां बच्चों का नाम ही कोरोना और कोविड रख दिया है।

नाम को लेकर उन्होंने कहा कि उनके बच्चों के ये नाम हमेशा इस लॉकडाउन की याद दिलाते रहेंगे। बच्चों की मां कहती हैं कि मैं इस दिन को जिंदगी भर नहीं भूल सकती। शुक्रवार की शाम से पेट में दर्द शुरू हुआ ऐसे में रायपुर के आंबेडकर अस्पताल तक पहुंचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी।

नवजात बच्चों की 27 वर्षीय मां प्रीति वर्मा ने बताया मुझे जुड़वां बच्चों के रूप में 27 मार्च की सुबह आशीर्वाद मिला। हमने अभी के लिए उनका नाम कोविड (लड़का) और कोरोना (लड़की) नाम रख दिया है।

उन्होंने कहा कि जब अस्पताल के कर्मचारियों ने भी बच्चों को कोरोना और कोविड के नाम से बुलाना शुरू किया, तो हमने आखिरकार यह नाम पर रखने का फैसला किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला यह दंपती राज्य की राजधानी रायपुर की पुरानी बस्ती इलाके में किराए के मकान में रहता है।

रिश्तेदार बता रहे हैं साहसिक फैसला

उन्होंने बताया कि 26 मार्च की देर रात  मुझे अचानक गंभीर दर्द का अनुभव हुआ। किसी तरह मेरे पति ने 102 महतारी एक्सप्रेस सेवा के तहत संचालित एक एम्बुलेंस की व्यवस्था की। विनय वर्मा ने कहा कि बंद के कारण सड़कों पर वाहनों की आवाजाही की अनुमति नहीं थी, हमें विभिन्न स्थानों पर पुलिस ने रोक दिया था, लेकिन उन्होंने मेरी हालत को देखते हुए हमें जाने दिया। मां और बच्चे तीनों स्वस्थ हैं। अस्पताल में बच्चों को देखने पहुंच रहे दोस्त और रिश्तेदार भी बच्चों के नामकरण को साहसिक फैसला बता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मैं सोच रही थी कि आधी रात को अस्पताल में क्या होगा, लेकिन सौभाग्य से डॉक्टर और अन्य कर्मचारी बहुत सहयोग कर रहे थे। वर्मा ने कहा कि हमारे रिश्तेदार, जो अस्पताल पहुंचना चाहते थे, वो बंद के कारण नहीं पहुंच पा रहे थे, क्योंकि लॉकडाउन के कारण बस और ट्रेन सेवाएं बंद हैं।

बीआर आंबेडकर मेमोरियल अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ), शुभ्रा सिंह ने कहा कि मां और नवजात शिशुओं को हाल ही में छुट्टी दे दी गई थी और वे अच्छे स्वास्थ्य में थे। सिंह ने कहा कि जैसे ही प्रीति वर्मा अपने पति के साथ अस्पताल पहुंची, तुरंत एक सीजेरियन सेक्शन करने की व्यवस्था की गई क्योंकि यह एक जटिल मामला था।

उनके आने के 45 मिनट के भीतर ही डिलीवरी सफलतापूर्वक हो गई। सिंह ने कहा कि जुड़वां बच्चे कोविड और कोरोना के नाम अस्पताल में आकर्षण का केंद्र बन गए थे।
... और पढ़ें

छत्तीसगढ़: एक युवती के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि, मरीजों की संख्या बढ़कर नौ हुई

छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। दरअसल मंगलवार को एक युवती के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इस तरह पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के दो नए मामले सामने आने के बाद इस वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। इनमें से दो लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

जानकारी के अनुसार, रायपुर निवासी लगभग 25 वर्षीय युवती में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। युवती को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया है। युवती कुछ दिनों पहले लंदन से लौटी है।

इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया था कि सोमवार रात कोरबा शहर के एक युवक में कोरोना की पुष्टि होने के बाद उसे एम्स में भर्ती कराया गया। राज्य में पिछले 24 घंटों में दो लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की गई है।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि संक्रमित हुए दो लोगों रायपुर निवासी 68 वर्षीय वृध्द और भिलाई निवासी 33 वर्षीय युवक को इलाज के बाद एम्स से छुट्टी दे दी गई। बता दें कि रायपुर एम्स में पांच मरीजों को तथा बिलासपुर और राजनांदगांव जिले के अस्पतालों में एक-एक मरीज भर्ती हैं।

अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल 787 संभावित व्यक्तियों की पहचान कर उनके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। अभी तक 732 के परिणाम निगेटिव मिले हैं और 46 की जांच जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की सचिव निहारिका बारिक ने बैठक लेकर कहा है कि छत्तीसगढ़ में अभी तक कोरोना संक्रमित लोगों में ब्रिटेन से आए व्यक्तियों की संख्या सर्वाधिक है। इसलिए ब्रिटेन से आए सभी लोगों के नमूनों की जांच की जाए।

उन्होंने बताया कि मंगलवार तक ब्रिटेन से आए 95 व्यक्तियों का नमूना लिया गया है। जिनमें से चार लोगों में कोरोना की पुष्टि की गई है तथा 47 नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। शेष नमूनों की रिपोर्ट नहीं आई है।
... और पढ़ें

छत्तीसगढ़ सरकार ने दी राहत, निजी स्कूल लॉकडाउन के दौरान नहीं ले सकते फीस

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से देश में लॉकडाउन लागू है। स्कूल, कॉलेज बंद हैं। लेकिन कई राज्यों में कुछ निजी शैक्षणिक संस्थान अभिभावकों से ऐसे समय में फीस भरने की मांग कर रहे हैं। ऐसे मामलों को छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के सभी निजी स्कूलों से कहा है कि वो लॉकडाउन के दौरान फीस न मांगें।

इसके लिए बुधवार को सरकार ने निजी स्कूलों के लिए निर्देश भी जारी किए हैं। इसके मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूल के फीस वसूलने पर रोक लगा दी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अभनपुर क्षेत्र के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को भी निलंबित कर दिया है। अधिकारी पर लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने और पद का दुरुपयोग करने का आरोप था।

क्या है पूरा मामला

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निजी स्कूल ने संचालकों से कहा कि वे स्कूल में पढ़ने वालों छात्र-छात्राओं से लॉकडाउन के दौरान फीस न लें। लेकिन इसके बाद भी परिजनों की ओर से राज्य सरकार को बार-बार शिकायत मिल रही थी कि निजी स्कूलों उनके ऊपर बच्चों की फीस भरने के लिए दबाव बना रहे हैं।

इसके बाद राज्य सरकार ने आदेश जारी किया और मुख्यमंत्री ने ट्वीट में लिखा कि लॉकडाउन के दौरान अनेक निजी शालाओं द्वारा स्कूल फीस जमा करने संबंधी संदेश पालकों को लगातार भेजे जा रहे हैं, ऐसे समय में फीस भुगतान के लिए दबाव डालना उचित नहीं है। सभी शालाओं को लॉकडाउन की अवधि में स्कूल फीस वसूली स्थगित रखने के निर्देश दिए गए हैं।


 


... और पढ़ें

Chhattisgarh: गाना गाकर लोगों को जागरूक करते दिखे पुलिस अधिकारी, लोग कर रहे तारीफ

देशभर में कोरोना वायरस से बचने के लिए लोगों को जागरुक किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जहां लोगों को घरों में रहने और साफ सफाई रखने की सलाह दे रहे हैं वहीं आम लोग भी सरकार का पूरा सहयोग करते दिख रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के एक पुलिस अधिकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। अभिनव उपाध्याय नाम के ये पुलिस अधिकारी लोगों को गाना गाकर जागरुक करते हुए दिख रहे हैं। 'एक प्यार का नगमा है' गाने की तर्ज पर एक नया गाना तैयार किया गया है जिसमें लोगों से सेनिटाइजर से हाथ धोने और घर से बाहर न जाने की अपील की जा रही है।

अभिनव उपाध्याय ने बिलासपुर के सिविल लाइंस में COVID-19 के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक गीत गाया। इलाके में एक महिला के सऊदी अरब से लौटने के बाद उसका टेस्ट किया गया था जो कि पॉजिटिव आया। राज्य में अब तक 7 कोविड-19 मामले सामने आ चुके हैं। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने मार्च महीने में विदेश यात्रा से आए सभी लोगों को कोरोना जांच में कवर करने और आइसोलेशन में रखने का भी निर्णय लिया है।

पेट्रोलिंग पुलिस वैन में लगे लाउडस्पीकर में पुलिसकर्मी गाना गाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस कदम की खूब तारीफ कर रहे हैं। पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में पुलिस इस तरह के वीडियो से लोगों का मनोबल बढ़ा रही है। इन दिनों सोसल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं।
 
... और पढ़ें

विधायक निवास के बाहर राशन लेने उमड़ी भीड़, कांग्रेस एमएलए के खिलाफ मामला दर्ज

कांग्रेस विधायक शैलेश पांडे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उनपर कथित तौर पर सीआरपीसी की धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने का आरोप है। उन्होंने बिलासपुर में मुफ्त राशन देने की घोषणा की जिसके बाद उनके घर के बाहर भीड़ इकट्ठा हो गई।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा ने कहा, 'हमें जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में लोग आवश्यक वस्तुओं को लेने के लिए विधायक के आवास पर एकत्र हुए हैं। वहां पर लगभग एक हजार लोग थे। यह राज्य सरकार द्वारा लगाई गई धारा 144 का उल्लंघन है। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 279 के तहत कार्रवाई की जाएगी।' 

कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में धारा 144 लगाई हुई है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए पांडे ने कहा, 'जब मैं अपने आवास पर पहुंचा तो वहां बहुत बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा थी। मैंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा को इसकी जानकारी दी।'

उन्होंने कहा, 'मैंने पुलिस को फोन करके भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कहा। मैं बस जरुरतमंद लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहा था, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उस वक्त पुलिस ने भीड़ को रोका क्यों नहीं? यह अपराध कैसे हो सकता है? मैंने लोगों को आने के लिए नहीं कहा था।'
 


विधायक का कहना है कि लोग वहां इसलिए आए क्योंकि कर्फ्यू में ढील दी गई। पुलिस को लोगों को रोकना चाहिए था। उन्होंने इस घटना के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मुझे नहीं पता कि आखिर पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
... और पढ़ें
अपने शहर की सभी खबर पढ़ने के लिए amarujala.com पर जाएं

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Election
  • Downloads

Follow Us

विज्ञापन