जम्मू-कश्मीर में 3200 करोड़ से शिक्षा क्षेत्र का होगा विकास

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 22 Sep 2020 12:16 PM IST
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पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा (फाइल फोटो)।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला

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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शिक्षा क्षेत्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का आश्वासन देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में 3200 करोड़ रुपये से शिक्षा क्षेत्र का विकास होगा। मेरा मानना है कि नई शिक्षा नीति जम्मू-कश्मीर के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करेगी। वे नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन पर विचार और मंथन के लिए जम्मू विश्वविद्यालय में सोमवार को आयोजित कांफ्रेंस में बोल रहे थे। रविवार को कश्मीर में भी इस तरह की एक एक कांफ्रेंस हो चुकी है।
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एलजी ने कहा कि प्रदेश में नए निर्माण के साथ-साथ निर्माणाधीन कॉलेजों का काम पूरा करने के लिए 300 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। प्रदेश के स्कूल और उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए भी 2392 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। केंद्र ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड जारी किया है जो प्रदेश के मौजूदा संसाधनों को बढ़ावा देगा।
कोविड महामारी के संदर्भ में एलजी ने कहा कि भविष्य में इसी तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का सामना करने के लिए राष्ट्र को तैयार करने के लिए विश्वविद्यालयों में महामारी विज्ञान, वायरोलॉजी और संक्रामक रोगों पर शोध तेज करने की आवश्यकता है। उन्होंने जम्मू के छात्रों से अपने हितों के अनुसार उत्साहपूर्वक अनुसंधान करने का आह्वान किया।
प्रदेश को नॉलेज हब बनाने में केंद्र हरसंभव मदद करेगा: निशंक
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने वीडियो संदेश में एलजी सिन्हा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने, जम्मू-कश्मीर में नेतृत्व करने और टास्क फोर्स गठित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को नॉलेज हब बनाने में हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिया। नई शिक्षा नीति ड्राफ्ट कमेटी के चेयरमैन डॉ. के कस्तूरीरंगन ने बताया कि इसे तैयार करने में व्यापक प्रयास किए गए हैं। ढाई लाख ग्राम पंचायतों, 12500 स्थानीय निकायों व 675 जिलों से प्राप्त दो लाख से अधिक सुझावों के आधार पर कार्रवाई की गई है। यूजीसी के पूर्व चेयरमैन प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि नई शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने के लिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को साथ आना चाहिए।
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