जब लड़कियां भागती हैं तो बदलता समय और इतिहास, चाहे साक्षी हो या हिमादास

Bhawna Masiwalभावना मासीवाल Updated Wed, 24 Jul 2019 03:57 PM IST
विज्ञापन
हिमा दास
हिमा दास - फोटो : social media

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
लड़कियां घर से भागती हैं और सवालों के घेरे में हर दूसरी लड़की खड़ी कर दी जाती है। भागना जरूरी होता है फिर वह प्रेम हो या सपना। साक्षी हो या हिमादास। दोनों भागी थी। फर्क था तो मंजिल और उद्देश्य का। एक प्रेमी के प्रेम को पाने के लिए भागी, एक पूरे विश्व के प्रेम को अपना बनाने के लिए।
विज्ञापन

प्रेम दोनों का था एक नितांत निजी तो दूसरा सपनों और अपनों का था। वैसे प्रेम में भागना भी सपनों के लिए भागना है। यह संघर्ष है सपनों को जीने का। लड़कियों को महज ज़िम्मेदारी मान हस्तगत किए जाने के प्रति विद्रोह का। उसका भागना है जीवनसाथी के चयन के लिए। भागना है उन सपनों के लिए जिसको उसने बुना है अपने बेहतर भविष्य के लिए। और हां, बयान है उसका कि उसके इन सपनों पर नितांत उसका अधिकार है ना कि किसी और का, ना ही परिवार का।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us