ऑस्ट्रेलिया की आग मानवजाति और पर्यावरण का सबसे बड़ा संकट है

Jay singh Rawatजयसिंह रावत Updated Mon, 03 Feb 2020 02:06 PM IST
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ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग ने सबसे ज्यादा जानवरों और पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाया है।
ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग ने सबसे ज्यादा जानवरों और पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाया है। - फोटो : Social media

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दुनिया का फेफड़ा कहे जाने वाले ब्राजील के अमेजन के जंगलों की विनाशकारी आग पूरी तरह बुझी भी नहीं थी कि विश्व के एक और जैवविधिता के धनी क्षेत्र ऑस्ट्रेलिया की दावनल ने दुनिया को ही दहला दिया। ऑस्ट्रेलिया विश्व के उन 17 देशों में से एक है जिन्हें जैव विविधता की दृष्टि से सबसे सम्पन्न या मेगा डाइवर्सिटी नेशन कहा जाता है।
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दरअसल, वहां अण्डे देने वाले दुलर्भ स्तनपायी भी हैं। यहां पृथ्वी का 10 प्रतिशत से अधिक जैविक विविधता का भण्डार मौजूद है। दिल दहलाने वाली बात तो यह है कि वहां 100 करोड़ जीवों के मरने के आंकड़े को विशेषज्ञ कम बता रहे हैं। इस दावानल से वन्यजीव संसार की तबाही के अलावा इससे मौसम परिवर्तन सहित अन्य पर्यावरणीय दुष्प्रभाव अवश्यंभावी हैं।
पादप और जीवों की श्रृंखला ध्वस्त
इस पृथ्वी पर अगर जीवन अस्तित्व में है तो उसके लिए लाखों पादप और जीव प्रजातियों का योगदान है। वनस्पति के बिना जीवधारियों का और जीवधारियों के बिना वनस्पतियों का अस्तित्व संभव नहीं है। पादप से जीवधारियों को भोजन, ऑक्सीजन, शरण और पोषक तत्व मिलते हैं तो पादपों को जीवधारियों से खाद या पोषक तत्व के साथ ही फोटो सिन्थेसिस के लिए कार्बन डाइऑक्साइड और पशु-पक्षी बीजों को बिखेरने में मदद मिलती है जिससे वनस्पति उगती और फैलती है। यही नहीं किसी एक जीवधारी की प्रजाति भी अकेले जीवित नहीं रह सकती।

प्रकृति में वनस्पति को खाने वाले शाकाहारी जीव हैं तो उन शाकाहारियों पर भोजन के लिए बाघ और शेर जैसे मांसाहरी निर्भर होते हैं। इनके बीच में आदमी जैसे ओम्नीवोरस जीव भी हैं जो कि मांस और वनस्पति दोनों खाते हैं। जब ये मर जाते हैं तो फिर धरती से वनस्पति के माध्यम से ग्रहण किए गए तत्व वापस धरती में चले जाते हैं।

 
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