भगत सिंह की जन्मभूमि से लेकर कर्मभूमि तक रहा पाकिस्तान, लेकिन ठीक से नहीं मिला सम्मान

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Sat, 28 Sep 2019 10:36 AM IST
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भगत सिंह का संबंध जितना वर्तमान पाकिस्तान की धऱती से रहा, उतना भारत से नहीं।
भगत सिंह का संबंध जितना वर्तमान पाकिस्तान की धऱती से रहा, उतना भारत से नहीं। - फोटो : Social Media

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अगर इतिहास की सही विवेचना की जाए तो आप यही कहेंगे कि भगत सिंह का संबंध जितना वर्तमान पाकिस्तान की धऱती से रहा, उतना भारत से नहीं। हालांकि ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के बाद बने दो मुल्कों में से भारत में जितना सम्मान भगत सिंह को मिला, उतना पाकिस्तान में नहीं। जबकि भगत सिंह का जन्म ही सिर्फ वर्तमान पाकिस्तान में ही नहीं हुआ, बल्कि उनकी पढ़ाई भी वर्तमान पाकिस्तान के लाहौर के स्कूल में हुई। भगत सिंह शहीद भी लाहौर जेल के अंदर हुए। लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें वो सम्मान कभी नहीं दिया जो भगत सिंह को दिया जाना चाहिए था।

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पाकिस्तान में कटटरपंथी जमात तो भगत सिंह के इस कदर खिलाफ है कि जब भगत सिंह के फांसी स्थल के नाम को भगत सिंह के नाम पर करने की बात आई तो कटटरपंथी जमातों ने इसका विरोध किया।

दरअसल, विरोध करने में वालों में मुख्य जमात-उल-दवा और लश्कर-ए-तैयब्बा का संरक्षक हाफिज सईद था। इसके बावजूद पाकिस्तान के अंदर भगत सिंह को उचित सम्मान देने को लेकर अब बहस हो रही है। पाकिस्तानी पाठयपुस्तकों में प़ढ़ाए जाने वाले इतिहास में भी भगत सिंह को उचित स्थान दिलवाने की लड़ाई चल रही है।   

भगत सिंह की फांसी और लाहौर हाईकोर्ट में लड़ाई
भगत सिंह की फांसी अदालती कत्ल था। बेशक भारत में इस पर बहस नहीं हो रही है। लेकिन पाकिस्तान में इसपर बहस हो रही है। उन्हें फांसी देते हुए अदालती प्रक्रिया का घोर उल्लंघन ब्रिटिश सरकार ने किया था। अदालत ने भी कानून के पालन के बजाए भगत सिंह को फांसी देने में ज्यादा रुचि दिखाई।


अब दुबारा से इस मामले को खोलने की मांग की जा रही है। लाहौर हाईकोर्ट में भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन जो भगत सिंह को पाकिस्तान में उचित सम्मान देने की लड़ाई लड़ रहा है, लाहौर स्थित पंजाब हाईकोर्ट में मामले को ले गया है। जॉन सैंडर्स हत्याकांड में भगत सिंह की दी गई फांसी के मामले को दुबारा खोलने की अर्जी लाहौर हाईकोर्ट में भगत सिंह मेमोरियल फांउडेशन ने दे रखी है।

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