नेपाल के जरिए भारत-पाकिस्तान के बीच क्यों सरपंच बनना चाहता है चीन?

Rajesh Badalराजेश बादल Updated Tue, 28 Jan 2020 10:23 AM IST
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पश्चिम में भारत का शत्रु देश पाकिस्तान उसके पाले में बैठा है तो उत्तर में अब तक सबसे घना मित्र देश नेपाल अब भारत से छिटका नज़र आता है।
पश्चिम में भारत का शत्रु देश पाकिस्तान उसके पाले में बैठा है तो उत्तर में अब तक सबसे घना मित्र देश नेपाल अब भारत से छिटका नज़र आता है। - फोटो : पीटीआई

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नेपाल का बयान है। वह पाकिस्तान से विवाद में मध्यस्थ बनना चाहता है।अभी उसका भारत से कालापानी पर विवाद सुलझा नहीं है। चंद रोज़ पहले ही उनके प्रधानमंत्री ने भारत को एक इंच ज़मीन नहीं देने का बड़ा बेहूदा बयान दिया था। अपना विवाद छोड़ अब वह भारत और पाकिस्तान के बीच सरपंच बनना चाहता है। अचानक उसके रवैए में यह बदलाव क्यों और कैसे आया? क्या अपने नए अभिभावक के कहने पर उसने यह पांसा फेंका है। परदे के पीछे की इसकी कहानी क्या हो सकती है। महत्वाकांक्षी चीन अब भारत के इर्द गिर्द कूटनीतिक और सामरिक घेरे बंदी की प्रक्रिया क़रीब- क़रीब पूरी कर चुका है। पश्चिम में भारत का शत्रु देश पाकिस्तान उसके पाले में बैठा है तो उत्तर में अब तक सबसे घना मित्र देश नेपाल अब भारत से छिटका नज़र आता है।
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पूरब में म्यांमार ने बीते सप्ताह ही ऐलान किया था कि वह हरदम अपने नए दोस्त चीन के साथ खड़ा रहेगा। दक्षिण में श्रीलंका सरकार चीन की गिरफ़्त में है। वह हंबनटोटा बंदरगाह पहले ही लीज़ पर ले चुका है और वहां की सरकार पूरी तरह चीन के आर्थिक जाल में उलझ चुकी है। बीते दिनों पाकिस्तान को साथ लेकर चीन ने अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय प्रभाव कम करने के लिए तालिबान और अमेरिका के बीच कई दौर की वार्ताएं कराईं।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस चीनी चाल को भांप लिया और बातचीत फ़ुस्स हो गई। इसके बाद उसने म्यांमार और बांग्लादेश के बीच रोहिंग्या मसले पर समझौता कराया। अब नेपाल के ज़रिए वह भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत कराना चाहता है। सूत्रों की मानें तो इसकी पटकथा पिछले दिनों चीन के राष्ट्रपति की तीन माह पहले नेपाल यात्रा के दौरान लिखी गई थी।भारत - चीन के 1962 में हुए युद्ध के बाद चीन ने भारत के मित्र पड़ोसियों के साथ एक शिष्ट दूरी बना ली थी। 
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