Citizenship Amendment Bill 2019: दिशाविहीन हुआ कैब विरोधी आंदोलन, असम में बिगड़ रहा माहौल

Ravishankar Raviरविशंकर रवि Updated Wed, 11 Dec 2019 03:22 PM IST
विज्ञापन
भाजपा नेताओं के निजी निवास पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
भाजपा नेताओं के निजी निवास पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। - फोटो : पीटीआई

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
जिस वक्त  राज्यसभा में राष्ट्रीय नागरिकता विधेयक पर बहस चल रही थी, उस वक्त पूरे असम में अशांत माहौल हो रहा था। गुवाहाटी की सड़कों पर हजारों छात्र दिसपुर स्थिति राज्य सचिवाल की तरफ बढ़ रहे थे। उन्हें रोकने के लिए सुरक्षाबल अलग-अलग जगहों पर लाठियां और आंसू गैस के गोले चलाकर छात्रों को तितर-बितर कर रहे थे।
विज्ञापन

इधर, मंगलवार के असम बंद के बाद आज सुबह स्थिति सामान्य थी, लेकिन विभिन्न कॉलेजों छात्र स्वतस्फूर्त सड़कों पर निकल आए। पूरे शहर छात्रों का दल प्रदर्शन कर रहा है। गुवाहाटी में अनहोनी की आशंका को देखते हुए बाजार बंद हो गए हैं। जबकि इस तरह के किसी आंदोलन की पूर्व घोषणा नहीं की गई थी। छात्रों के साथ अन्य लोग भी सड़क पर उतर आएं है।  
यही स्थिति असम की स्थिति भयावह होती जा रही है। ऊपरी असम में हजारों आंदोलनकारी जिला उपायुक्त कार्यालयों को घेर रहे हैं। हर स्कूल-कालेज के छात्र सड़कों पर हैं। इस वजह से बुधवार से गौहाटी विश्वविद्यालय, डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय और कॉटन विश्वविद्यालय की परीक्षा रद्द कर दी गई। ऊपरी असम में कृषि मुक्त संग्राम समिति का ‘जाम करने’ करने का आंदोलन चल रहा है। शिवसागर में ओएनजीसी मुख्यालय को घेर लिया गया है। अलग-अलग नेतृत्वविहीन लोगों के आने से स्थिति अराजक होती जा रही है।  
आंदोलन कोई भी रूप ले सकता है। भाजपा नेताओं के निजी निवास पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। जहां कोई भाजपा नेता या मंत्री दिखता है, लोग घेर लेते हैं। इसी से समझा जा सकता है कि असम के लोग किसी कदर कैब के खिलाफ हैं। भाजपा नेतृत्व और राज्य सरकार ने भी इस स्तर के प्रतिवाद के बाद में अनुमान नहीं लगाया था।

हालांकि मुख्यमंत्री सर्वानंद बार-बार कह रहे हैं कि छात्रों को आंदोलन में घसीटना उचित नहीं है। इससे उनका कैरियर और शिक्षा प्रभावित होगी। उन्होंने आश्वासन दिया है कि असम समझौते की धारा-6 को कारगर बनाकर असमिया लोगों संवैधानिक सुरक्षा दी जाएगी।

नॉर्थ इस्ट डोमोक्रेटिक फ्रंट (नेता) डॉ हिमंत विश्व शर्मा का कहना है कि यह कैग बांग्लादेश से आकर बसे मात्र 5 हजार हिंदू शरणार्थियों नागरिकता मिलेगी। इससे असम पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन लोगों को उनके तर्क पर भरोसा नहीं है।
 
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us