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कोरोना से जंग: भारत तो सभी मित्र देशों को दवा देगा, लेकिन अमेरिका ना करे भारत के हितों की अनदेखी

Rajesh Badal राजेश बादल
Updated Thu, 09 Apr 2020 01:58 PM IST
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने हैं कोरोना की चुनौती
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने हैं कोरोना की चुनौती - फोटो : PTI

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भारत के फ़ैसले ने दुनिया के चौधरी डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी राहत मिली होगी। अपने देश में कोरोना के संकट के मद्देनज़र उन्होंने सारी दुनिया को दवा निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। उसके बाद भारत में इस बीमारी का ख़तरा बढ़ा तो उसने भी निर्यात रोक दिया। अगर हिन्दुस्तान ने निर्यात पर पाबंदी न हटाई होती तो अमेरिका, ब्राज़ील और बाक़ी पड़ोसियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती थीं। हालांंकि भारत जैसे बड़ेे देश के लिए हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन की अपनी ज़रूरत भी बहुत है ,फिर भी उसने मित्र देशों की मदद का निर्णय लिया है तो यह सराहनीय है। 
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भारत अमेरिका से आबादी में क़रीब क़रीब चार गुना बड़ा है। भारत में कोरोना दिनों दिन विकराल आकार ले रहा है। ऐसे में अपनी ज़रूरतें देखनी होती हैं। दवा उत्पादन क्षमता का ध्यान रखना होता है और मित्र पड़ोसियों के घरों को भी संंभालना होता है। ज़ाहिर है कि भारत अगर अमेरिका को यह दवा देगा तो श्रीलंका,नेपाल,मालदीव,भूटान,बांग्लादेश और म्यांमार जैसे अनेक  दोस्तों को क्यों नहीं देगा ?  लेकिन महाबली डोनाल्ड ट्रंप यक़ीनन संकट के इस समय में धीरज खोते नज़र आ रहे हैं।


कोरोना से निपटने में उनकी सरकार की नाक़ामी दुनिया के सामने उजाग़र हो गई है। वे पहले इस संक्रमण के अंतर्राष्ट्रीय विस्तार का ठीकरा चीन के सिर फोड़ते रहे तो कभी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) पर चीन परस्त होने के आरोप में फंड रोकने की धमकी देते हैं। अब वे कह रहे हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अमेरिका की उपेक्षा की है। वे दवा के लिए भारत के प्रति भी सख़्त लहज़ा दिखा चुके थे।
 
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