कोरोना: पूर्वोत्तर भारत के लिए वरदान साबित हो रहा लॉकडाउन

Ravishankar Raviरविशंकर रवि Updated Sun, 12 Apr 2020 10:33 PM IST
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लॉकडाउन का नॉर्थ ईस्ट में सकारात्मक प्रभाव दिखा है।
लॉकडाउन का नॉर्थ ईस्ट में सकारात्मक प्रभाव दिखा है। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

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पूर्वोत्तर भारत के राज्यों की शेष भारत से भौगोलिक दूरी कोरोना महामारी के समय वरदान साबित हो रही है। एक तरफ जहां देश के अधिकांश हिस्से में कोरोना का कहर है, वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति अब तक संतोषजनक है। असम में अब तक कोरोना के 29 मामले सामने आए हैं, जिनमें से एक की मौत हुई है और चार लोग ठीक हो गए हैं। अरुणाचल प्रदेश में एक मामले हैं, उसी तरह त्रिपुरा, मणिपुर और मिजोरम में भी एक-एक मामले सामने आए हैं। नगालैंड और मेघालय में एक भी मामले सामने नहीं आए हैं।
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दरअसल, पूर्वोत्तर शेष भारत दूर है और शेष भारत से इसका संबंध गले की तरह एक संकरे इलाके से जुड़ा हुआ है। शेष भारत और पूर्वोत्तर के बीच आना-जाना सिर्फ वायु मार्ग, रेल और सड़क परिवहन पर निर्भर है। लॉकडाउन की वजह से बाहर से लोगों का आना पूरी तरह बंद हो गया। लॉकडाउन के दौरान रास्ते में चल रही गाड़ियों से जो लोग आए, उन्हें अपने-अपने घर में अलग-थलग रहने की सलाह दी गई थी। उस दौरान जो घर के अंदर नहीं रहते थे, उन्हें आशाकर्मियों और पुलिस की मदद से सरकार के विभिन्न अलगाव केंद्रों में रखा गया। डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि 9 अप्रैल को वैसे करीब 75 हजार लोग होम क्वरोंटिन से मुक्त हो गए हैं।
असम में कोरोना के  29 मामले में आए हैं, उनमें से 28 का संबंध निजामुद्दीन तबलीगी से है। जैसे ही वैसे लोगों का पता चला, असम सरकार ने एक रात के अंदर ज्यादातर लोगों का पता लगाया और उनके स्वास्थ्य की जांच की। जिनके नमूने निगेटिव आए, उन्हें क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया। इस तत्परता से असम बहुत हद तक प्रभावित होने से बच गया। लॉकडाउन के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों की तत्परता की वजह से ये मामले नहीं बढ़े। सभी राज्यों ने अपनी सीमा सील कर दी और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी। इतना ही नहीं गांवों में भी लोगों ने अपने गांव के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया। किसी को गांव से बाहर जाने या गांव में प्रवेश करने की इजाजत नहीं थी। ग्रामीणों ने खुद तय किया कि गांव के अंदर आने के लिए डाक्टर का प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
गुवाहाटी का ब्राह्मण भवन बना मिसाल
लॉकडाउन की वजह से देश के विभिन्न हिस्से से आए लोग गुवाहाटी में फंस गए हैं। होटल उन्हें रखने को तैयार नहीं थे। अन्य कोई जगह नहीं थी। वैसे लोगों के लिए ब्राह्मण भवन प्रबंधन किसी देवदूत की तरह आगे आया। वहां मंत्री निर्मल कुमार तिवारी ने बताया कि उनके भवन में 72 लोगों के रहने व खाने की व्यवस्था की गई है। उनमें रूस का एक दंपती भी है। जो असम घूमने आया था।

इसके अलावा किसी मरीज को छोड़ने आए राजस्थान के दो डॉक्टर, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग हैं। सभी के पास इतने दिनों तक होटल में रहने और खाने के पैसे भी नहीं थे। ब्राह्मण भवन की तरह उनके लिए सारी व्यवस्था की गई है। श्री तिवारी बताया कि जब तक लॉकडाउन रहेगा, उनके रहने व खाने की व्यवस्था जारी रहेगी। इसके लिए सरकार से कोई मदद नहीं ली गई है। प्रबंध समिति के लोग आपसी मदद से इसे चला रहे हैं।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें [email protected] पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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