कोरोना से उबरने के बाद बदल जाएगा दुनिया का आर्थिक भूगोल, अमेरिका नहीं ये देश हो सकते हैं महाशक्ति

Gautam Chaudharyगौतम चौधरी Updated Tue, 31 Mar 2020 02:02 PM IST
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कोरोना प्राकृतिक नहीं यह दुनिया के दो महाशक्तियों के बीच की लड़ाई का नतीजा है
कोरोना प्राकृतिक नहीं यह दुनिया के दो महाशक्तियों के बीच की लड़ाई का नतीजा है - फोटो : Social Media
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कोरोना संक्रमण से उत्पन्न वैश्विक आपदा को लेकर कई प्रकार की भविष्यवाणियां की जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना प्राकृतिक नहीं यह दुनिया के दो महाशक्तियों के बीच की लड़ाई का नतीजा है।  कुछ जानकारों का तो यहां तक कहना है कि आने वाले समय में युद्ध का पारंपरिक तरीका बदल जाएगा और इसी प्रकार एक-दूसरे अपने विरोधियों को परास्त करने के लिए क्षद्म और कूट तरीकों का इस्तेमान करेंगे।
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इस वायरस के विश्वव्यापी प्रभाव और महाविनाशक क्षमता को लेकर चीन ने अमेरिका और अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाए हैं लेकिन इन दोनों देशों के आरोपों से यह तो साबित हो गया है कि इस वायरस को हथियार के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। जो भी हो लेकिन इस जैविक आपदा के बाद दुनिया पूरी तरह बदल-बदली-सी दिखेगी। इसका आभास अभी-से होता दिख रहा है।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान दौर का सबसे ताकतवर देश संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) है। उसके पास दुनिया की अर्थव्यवस्था की कुंजी है। उसके पास दुनिया को मिनटों में तबाह करने वाले अत्याधुनिक हथियार हैं। उसके पास अपार खनिज संपदा है और अन्न के भंडार भरे हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और ज्ञान-विज्ञान में वह दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे आगे है। सबसे बड़ी बात यह है कि वर्तमान दुनिया को चलाने वाले फ्यूल यानी प्राकृतिक तेल और गैस का सबसे बड़ा भंडार अमेरिका के पास है। इसके अलावा अमेरिका के डॉलर में ही वर्तमान दुनिया के अधिकतर देश व्यापार करते हैं। यानी पहले अपने करेंसी को डॉलर में बदलते हैं और फिर दूसरे देशों के साथ व्यापार करते हैं।
 
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