Delhi Election Results 2020: फिलहाल केजरीवाल को बधाई दीजिए

Umesh Chaturvediउमेश चतुर्वेदी Updated Tue, 11 Feb 2020 07:50 PM IST
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अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल - फोटो : Twitter

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दिल्ली के चुनावों पर विश्लेषण से पहले कुछ अनुभवों की चर्चा.. ऐसा नहीं कि ये अनुभव अलहदा हैं। दोनों का रिश्ता दिल्ली के चुनावों से जुड़ा है। 

पहला अनुभव दिल्ली की डीटीसी बस का है...

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बस के कंडक्टर सवारियों को टिकट देता जा रहा था और अपने मोबाइल फोन पर लगातार दिल्ली के चुनाव नतीजों का ताजा हाल देखता जा रहा था। अचानक उसके मुंह से केजरीवाल सरकार के लिए गालियां निकलीं। किसी ने उस पर प्रतिक्रिया नहीं दी। 

कुछ देर बस चली और फिर उसने ताजा अपडेट देखा और फिर आम आदमी पार्टी को उसने गाली दी। इस बार गाली की आवाज थोड़ी धीमी थी। कंडक्टर के मुंह से गाली सुन कुछ ने मुस्कुरा कर टाल दिया तो कुछ ने अनदेखा किया, लेकिन साथ बैठी सवारी ने पूछ लिया, भैया, गाली क्यों दे रहे हो?

“अब डीटीसी का डूबना तय है। फिर से केजरीवाल सरकार बना रहा है और उसकी मुफ्तखोरी चलती रहेगी। डीटीसी डूबती रहेगी, बसें सड़कें पर घटती रहेंगी और एक दिन ऐसा आएगा कि हमारी नौकरी संकट में आएगी और फिर हम मुफ्तखोरी के चक्कर में नप जाएंगे।”

दूसरा अनुभव खुद केजरीवाल से जुड़ा है...

कुछ महीने पहले एक प्रतिनिधिमंडल में इन पंक्तियों के लेखक ने केजरीवाल से मुलाकात की थी। उस मुलाकात के दौरान ने हमने दिल्ली के पत्रकारों के लिए पेंशन और दिल्ली की सार्वजनिक बसों में रियायती यात्रा सुविधा की मांग की थी। पेंशन पर तो केजरीवाल ने कुछ नहीं कहा, अलबत्ता बाकी सुविधाओं को लेकर उनका जवाब था, “हम तो सारी सहूलियतें दे दें..लेकिन मोदी जी देने नहीं देंगे।” 

कुछ देर के विराम के बाद उन्होंने कहा था, “लेकिन हम कुछ महीने से मोदी को लेकर कुछ बोल नहीं रहे हैं और चुपचाप काम कर रहे हैं।”

दिल्ली के चुनावों में केजरीवाल की भारी जीत को लेकर जो विश्लेषण हो रहे हैं, उनमें कई बातें गिनाई जा रही हैं। लेकिन इन दोनों अनुभवों में केजरीवाल की जीत का गणित छुपा हुआ है। 

लोकसभा चुनाव बीते महज आठ महीने बीते हैं। लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी का सूपड़ा पूरी तरह साफ हो गया था। तीन लोकसभा चुनावों में तो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। तब भारतीय जनता पार्टी ने 56.58 प्रतिशत मत हासिल करके  65 विधानसभा सीटों में भारी बढ़त बनाई थी। उस चुनाव में कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी, जिसे 22.46 प्रतिशत वोट मिले थे और उसे पांच विधानसभा सीटों वाले इलाकों मे जीत मिली थी। 

2019 के ही लोकसभा चुनाव में 18 प्रतिशत वोट हासिल करके दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी बुरी हालत में थी। लेकिन सिर्फ नौ महीने में आम आदमी पार्टी ने कमाल कर दिखाया। उसे विधानसभा चुनावों में 52 फीसद वोट हासिल हुए हैं, जो 2015 के विधानसभा चुनावों से महज 2.3 प्रतिशत कम हैं।

लोकसभा चुनावों के बनिस्बत भारतीय जनता पार्टी को करीब सोलह फीसद कम यानी करीब 41 प्रतिशत मत मिला है और उसे सिर्फ सात सीटों पर जीत हासिल हुई है। लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सातों सीटों पर दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस पार्टी सिर्फ चार प्रतिशत मत मिले हैं, जो पिछले विधानसभा चुनावों के मुकाबले करीब 5.7 प्रतिशत कम और लोकसभा चुनावों के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत कम है। 

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