वायु प्रदूषण: सांस नहीं, जहर भीतर ले रहे दिल्ली-एनसीआर के लोग, रविवार का हाल सबसे बुरा 

Bhawna Masiwalभावना मासीवाल Updated Sun, 03 Nov 2019 12:10 PM IST
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हेल्थ इमरजेंसी की वजह से दिल्ली-एनसीआर के स्कूल पहले सी बंद हो चुके हैं और निर्माण कार्य पर भी रोक लगी हुई है।
हेल्थ इमरजेंसी की वजह से दिल्ली-एनसीआर के स्कूल पहले सी बंद हो चुके हैं और निर्माण कार्य पर भी रोक लगी हुई है। - फोटो : PTI

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वायु प्रदूषण की वजह से दिल्ली-एनसीआर की स्थिति बेहद खतरनाक होती जा रही है। रविवार को हल्की बारिश ने दिल्ली के एयर क्वालिटी इंडेक्स को 447 से ज्यादा पहुंचा दिया है जबकि शनिवार शाम तक इसका स्तर 402 के करीब था। दिल्ली के सबसे भीड़-भाड़ वाली जगहों में शामिल आईटीओ क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा 486 रहा। रविवार को स्मॉग की अधिकता के साथ ही विजिविलिटी का स्तर भी काफी कम है और कई लोगों को घरों के भीतर भी धुआं-धुआं सा घिरने का अहसास हो रहा है। हेल्थ इमरजेंसी की वजह से दिल्ली-एनसीआर के स्कूल पहले से ही बंद हो चुके हैं और निर्माण कार्य पर भी रोक लगी हुई है। लेकिन इसके बाद भी रविवार की सुबह शनिवार से ज्यादा प्रदूषित रही है।
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यह हैरान करना वाला है कि आनंद विहार और अलीपुर से भी ज्यादा आईटीओ का वायु प्रदूषण स्तर रहा है। आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स 478 और अलीपुर में 463 है। एम्स के डॉक्टर भी वायु प्रदूषण को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं। एम्स का कहना है कि वायु प्रदूषण अब स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर रहा है। बच्चे वायु प्रदूषण की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कैंसर, अस्थमा और फेफड़ों से संबंधित मरीजों के लिए तो दिल्ली मृत्यु का शहर ही बन गया है! दूसरी तरफ सरकारे हैं कि एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के सिवा कोई काम नहीं।
दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण के लिए कौन-जिम्मेदार?
दिल्ली-एनसीआर के गैस चेंबर बनने के साथ ही ब्लेम गेम भी शुरू हो गया है। जो राजनीति हो रही है किसी से छिपी नहीं है। इस सबसे बीच यह समझना बेहद जरूरी है कि दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों की हवा के इस कदर जहरीली होने की असली वजह क्या है? दरअसल, दिल्ली-एनसीआर की हवा कोई पहली बार जहरीली नहीं हो रही है। हर बार दिवाली के बाद से ही दिल्ली-एनसीआर के आसमां में स्मॉग छा जाता है और घरों में नवजात बच्चों से लेकर बुजुर्गों की शामत आ जाती है। यह सच है कि दिल्ली-एनसीआर के 65 फीसदी से ज्यादा वायु प्रदूषण के लिए स्थानिय स्त्रोत ही जिम्मेदार हैं। इस बात की तस्दीक ईपीसीए भी करता है।   

दूसरा पंजाब और हरियाणा के किसान द्वारा जलाई जाने वाली पराली इसके लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन सिर्फ 5-8 फीसदी ही वायु प्रदूषण के लिए पराली जिम्मेदार है। इन राज्यों में इस महीने  जलाई जाने वाली पराली की वजह से भी दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण की स्थिति खतरनाक हो जाती है क्योंकि उत्तर से चलने वाली हवा पराली के धुएं के साथ ही दिल्ली-एनसाआर की हवा को दूषित कर देती है। दिवाली में फोड़े गए खतरनाक पटाखे भी वायु की गुणवत्ता को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि इस बीच ईपीसीए ने यूपी, हरियाणा और दिल्ली को खत लिखकर ठोस कदम उठाने के लिए कहा है। दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा, गुड़गांव में निर्माण कार्य को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

 
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