भारत-चीन विवाद: चीन पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’ और हमारा ‘डिजिटल राष्ट्रवाद’...

Ajay Bokilअजय बोकिल Updated Wed, 01 Jul 2020 12:24 PM IST
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भारतीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर बताया कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता के लिए इन एप्स पर प्रतिबंध जरूरी है- सांकेतिक तस्वीर
भारतीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर बताया कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता के लिए इन एप्स पर प्रतिबंध जरूरी है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

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सार

  • सरकार को शिकायत मिली थी कि एंड्रॉयड और आईओएस पर ये एप्स लोगों के निजी डेटा में भी सेंध लगा रहे थे।
  • टिक टॉक ने अपने बयान में कहा कि वो भारत सरकार के अंतरिम आदेश को मानने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रविवार को ‘मन की बात’ से साफ हो गया था कि लद्दाख में हमारी गलवान घाटी में घुसे चीन को सबक अब ‘राष्ट्रवादी तरीके’ से सिखाया जाएगा। इसी की अहम कड़ी के रूप में भारत ने चीन पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’ करते हुए 59 चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया।
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प्रतिबंधित एप्स में ट्वीटर जैसा चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘वीबो’ भी है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वेरिफाइड अकाउंट है। इसके 2 लाख 40 हज़ार से ज़्यादा फॉलोअर्स बताए जाते हैं। यह अकांउट मोदी ने पीएम के रूप में 2015 में अपनी पहली चीन यात्रा के पहले खुलवाया था। बदले की कार्रवाई करते हुए चीन ने भी हमारी न्यूज वेबसाइट्स और ई-अखबारों पर बैन लगा दिया।
चीनी एप्स पर यह ‘स्ट्राइक’ हमारी सीमा में घुसी चीनी सेना को वापस लौटने पर कितना मजबूर करेगी, कहना मुश्किल है, लेकिन इससे चीन थोड़ा चिंतित जरूर हुआ है। उसने चेतावनी दी है कि ‘राष्ट्रवादी तरीकों’ से चीन को झुकाया नहीं जा सकता। उसने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की दुहाई भी दी है।

समझने की बात यह भी है कि चीनी एप्स पर रोक से चीन को वास्तव में कितना नुकसान होगा, होगा भी या नहीं, खुद भारत पर इसका क्या असर होगा, और  क्या यह चीन की सैनिक दबंगई के मुकाबिल हमारे पास ‘लोकल’ व ‘स्वदेशी’ का हथियार है?

क्या हम इस हथियार से चीन को उसके महत्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट-वन रोड’ परियोजना पर आगे बढ़ने से रोक पाएंगे ? क्या इस डिजिटल स्ट्राइक का सकारात्मक असर ‘डिजिटल राष्ट्रवाद’ के विस्तार में होगा?

ध्यान रहे कि इसी स्तम्भ में दस दिन पहले यह सवाल उठाया गया था कि क्या हमारी युवा पीढ़ी चीनी माल के जाल से बाहर निकलने के लिए सचमुच तैयार है? क्योंकि दूसरे चीनी मालों के मुकाबले चीनी एप्स की लत ज्यादा खतरनाक और गहरी है।

भारत सरकार ने जिन 59 चीनी एप्स पर रोक लगाई है, उनमें प्रमुख हैं टिक टाॅक, हेलो, यूसी ब्राउजर, लाइकी, वी चैट आदि।

भारतीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर बताया कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता के लिए इन एप्स पर प्रतिबंध जरूरी है। हम भारतीय नागरिकों के डेटा और निजता में किसी तरह की सेंध नहीं चाहते हैं।

सरकार को शिकायत मिली थी कि एंड्रॉयड और आईओएस पर ये एप्स लोगों के निजी डेटा में भी सेंध लगा रहे थे। इन पर पाबंदी से भारत के मोबाइल और इंटरनेट उपभोक्ता सुरक्षित होंगे। इस आदेश के बाद एपल और गूगल दोनों ने इसे अपने एप स्टोर से डिलीट कर दिया। 
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बीबीसी के मुताबिक टिक टॉक इंडिया के प्रमुख निखिल गांधी ने कहा कि टिक टाॅक ने ‘इंटरनेट का लोकतंत्रीकरण’ किया है....

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