सपनों की तलाश में महानगर पहुंचा युवा आखिर क्यों लौट जाना चाहता है अपने गांव और शहर

Bhawna Masiwalभावना मासीवाल Updated Sun, 24 Nov 2019 10:57 AM IST
विज्ञापन
दुनिया में हर आदमी अपने भीतर एक पीड़ा लिए घूम रहा है
दुनिया में हर आदमी अपने भीतर एक पीड़ा लिए घूम रहा है - फोटो : pixabay

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
लौटना हो तो अभी लौटना उन छूटी जड़ों की तरफ जो आपको अपने भीतर कचोट रही हैं। एक लंबा रास्ता है जो आता है पर वापस नहीं जाता! हम सभी आने और जाने के इसी फेर में घिरे हैं। यहां हर कोई आने के बाद, वापस जाने की चाहत लिए है! पर किसी में चाहत को पूरी करने की हिमाकत नहीं है। कोई बिरला ही होता है जो आने के बाद जाने का रास्ता तय कर पाता है। बाकी सब तो जिंदगी और ज़रूरत के बीच दबकर सोचते ही रह जाते हैं। इसी वजह से हमारी जड़ें हमसे छूट गई और छूट रही हैं।
विज्ञापन

दुनिया में हर आदमी अपने भीतर एक पीड़ा लिए घूम रहा है
उन छूटी जड़ों को जीने के लिए हम सभी लौटना चाहते हैं। हम अपने भीतर छटपटाहट लिए! बैचेनी से घिरे हैं। लौटने के आवेश में शांत होते हुए! दफ्तरों, विश्वविद्यालयों, फैक्ट्रियों, होटलों, चमचमाती बिल्डिगों और फुटपाथ, कहां नहीं हैं हम। सब जगह तो मौजूद है जो वापस लौटना चाहते हैं- किसी शहर, महानगर, कस्बे और सूबे से। इस दुनिया में हर आदमी अपने भीतर एक पीड़ा लिए घूम रहा है।
वह पीड़ा में ही खुश होता और पीड़ा को ही जीते हुए आगे बढ़ रहा है! उसके चेहरे की मुस्कुराहट उसके भीतर के शांत समुद्र की पहचान है। जो ऊपर से शांत मगर भीतर से कोलाहल से भरा है। पिछले कई दिनों से ऐसे कई लोगों से मेरी मुलाकात हुई। जो जहां हैं वहां से अपने शहर, अपने गांव और अपने घर लौटना चाहते हैं। लौटने की इस बात के आते ही उनकी आंखों में चमक आ जाती है और यह चमक जब भविष्य की चिंता के साथ मिलती है तो धुंधली हो जाती है। क्योंकि लौटना कहने से कहीं अधिक मुश्किल था लौटना।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us