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Gangaur Puja 2020: राजस्थान का प्रमुख लोकोत्सव गणगौर

Ramesh sarafरमेश सर्राफ Updated Fri, 27 Mar 2020 04:15 PM IST
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गणगौर पूजा 2020
गणगौर पूजा 2020 - फोटो : Social Media
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राजस्थान में गणगौर का पर्व लोकोत्सव के रूप में सदियों से मनाया जाता रहा है। विवाहित व अविवाहित सभी आयु वर्ग की सुहागिन महिलाएं गणगौर की पूजा करती हैं। होली के दूसरे दिन से सोलह दिनों तक लड़कियां प्रतिदिन ईसर-गणगौर को पूजती हैं। जिस लड़की की शादी हो जाती है, वो शादी के प्रथम वर्ष अपने पीहर जाकर गणगौर की पूजा करती है। इसी कारण इसे ’सुहागपर्व’ भी कहा जाता है।
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गणगौर का पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। महिलाएं इस पर्व को विशेष रूप से मनाती हैं। होली के दूसरे दिन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा) से अविवाहित व नवविवाहित महिलाएं प्रतिदिन गणगौर पूजती हैं। विवाहित महिलाएं सुहाग की रक्षा के लिए गणगौर का व्रत करती हैं। अविवाहित कन्याएं भी मनोवांछित वर पाने के लिए गणगौर का व्रत रखती हैं।
मान्यता है कि गणगौर व्रत और पूजा करने से महिलाओं के सुहाग की रक्षा होती हैं। गणगौर वाले दिन महिलाएं सज-धज कर सोलह श्रृंगार करती हैं और माता गौरी की विधि-विधान से पूजा करके उन्हें श्रृंगार की सभी वस्तुएं अर्पित करती हैं। वैसे तो गणगौर का पर्व देश भर में मनाया जाता है, लेकिन राजस्थान में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ गणगौर पर्व लोकोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणगौर पर्व की मुख्य पूजा चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को की जाती है।
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शिव-पार्वती की पूजा के रूप में इस त्यौहार को मनाया जाता है

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