अमेरिका में हिंसा: ट्रम्प की लगाई आग से ही जलने लगा देश

Rajesh Badalराजेश बादल Updated Thu, 04 Jun 2020 09:38 PM IST
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अमेरिका में हुए प्रदर्शन ने ट्रंप की चुनौतियां बढ़ा दी है।
अमेरिका में हुए प्रदर्शन ने ट्रंप की चुनौतियां बढ़ा दी है। - फोटो : PTI

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एक अश्वेत की हत्या के बाद अमेरिका धधक रहा है। डोनॉल्ड ट्रम्प को सौ फ़ीट नीचे तहख़ाने के बंकर में जाना पड़ा, सेना को तैनात करने की चेतावनी देनी पड़ी, पुलिस को घुटनों के बल बैठकर माफ़ी मांंगनी पड़ी और ख़ुद ट्रम्प की एक बेटी प्रदर्शनकारियों के साथ मैदान में उतर आईं।
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इससे पता चलता है कि मामला कितना गंभीर है। संसार के एक बड़े गणतंत्र की अल्पसंख्यक आबादी का ग़ुस्सा इस तरह फूटेगा, इसकी कल्पना ख़ुद सरकार को भी नहीं थी।
पुलिस अधिकारी डेरिक शेविन ने जिस तरह जॉर्ज फ्लॉयड की सार्वजनिक हत्या की, उससे स्पष्ट है कि अमेरिकी पुलिस अश्वेतों के मामले में किसी मानवाधिकार क़ानून की चिंता नहीं करती। समय-समय पर वहांं नस्ली हिंसा की वारदातें होती रहती हैं। इसके बावजूद अश्वेतों ने कभी इतना गंभीर आक्रोश नहीं दिखाया।पहली दफ़े पीड़ित समुदाय की भड़ास निकली है। ज़ाहिर है कि नाराज़गी अरसे से खदबदा रही थी।
दरअसल,  इस हत्याकांड के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा-"जब लूट शुरू होती है तो उसके बाद शूट भी शुरू हो जाता है। यही वह कारण है कि मिनेपॉलिस में बुधवार की रात एक व्यक्ति को गोली मार दी गई"।

हालांंकि अपने इस बयान के बाद वे सफ़ाई की मुद्रा में भी आए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बयान के बाद कई नगरों में हिंसा-आगज़नी भड़क उठी और कर्फ्यू लगाना पड़ा। वर्तमान घटनाक्रम में ट्रम्प के इस रवैए की मुख्य वजह सियासी है।

इस साल होने वाले चुनाव में ट्रम्प दूसरी पारी का सपना देख रहे हैं। लेकिन आर्थिक अराजकता, बेरोज़गारी ,अफ़ग़ानिस्तान से फ़ौज़ वापस बुलाने का फुस्स होता तालिबान समझौता , मीडिया से ख़राब रिश्ते, कोरोना से निपटने में नाक़ामी, चीन से बिगड़ते रिश्ते और यूरोप के मित्र देशों से दोस्ती पर पाला पड़ जाने के कारण उनकी किरकिरी हुई है।
 
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