अब अमीर देश भी भुगत रहे जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम

Amalendu Upadhyayअमलेंदु उपाध्याय Updated Sun, 29 Dec 2019 12:34 PM IST
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जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम पहले गरीब तीसरी दुनिया के देश ज्यादा भुगत रहे थे।
जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम पहले गरीब तीसरी दुनिया के देश ज्यादा भुगत रहे थे। - फोटो : अमर उजाला

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जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम पहले गरीब तीसरी दुनिया के देश ज्यादा भुगत रहे थे, लेकिन अब इसकी मार, इसके लिए जिम्मेदार अमीर देशों पर भी पड़ रही है। यह दावा हाल ही में जारी वैश्विक जलवायु संकट सूचकांक यानी ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स में किया गया है।
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यह रिपोर्ट मेड्रिड में "काप 25- जलवायु वार्ता सम्मेलन" में दुनिया के सभी देशों के बीच बीती 4 दिसंबर को जारी की गई। पर्यावरण थिंक टैंक जर्मनवॉच द्वारा प्रकाशित वैश्विक जलवायु संकट सूचकांक दर्शाता है कि वर्ष 2018 में जापान और जर्मनी जैसे औद्योगिक देशों में गर्मी की लहर और भीषण सूखे की मार सबसे भयावह थी, जबकि फिलीपींस ने दुनिया भर में दर्ज सबसे प्रचंड तूफान का सामना किया।
मौसम से संबंधित नुकसान की घटनाओं (तूफान, बाढ़, हीटवेव आदि) के प्रभाव से देश और क्षेत्र किस हद तक प्रभावित हुए हैं, का आकलन इस ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2020 में किया गया है। इसमें 1999 से 2018 तक का डाटा उपलब्ध है।
नवीनतम डाटा वर्ष 2018 का है। अगर इस इंडेक्स में उपलब्ध 1999 से 2018 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया जाए, तो मालूम पड़ता है कि कि गरीब देशों पर ये जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव और भी अधिक हैं।

इस दौरान जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होने वाले दस में से सात देश विकासशील देश हैं, जहां प्रतिव्यक्ति आय निम्न या निम्न-मध्यम है। लंबी-अवधि के सूचकांक के अनुसार पुएर्टो रीको, म्यानमार और हैती सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देश हैं।
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