दुनिया की दिग्गज कंपनियों के काम से भी पहुंच रहा जंगल और पर्यावरण को नुकसान

Amalendu Upadhyayअमलेंदु उपाध्याय Updated Tue, 03 Sep 2019 01:00 PM IST
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पिछले दिनों पोलैंड के कैटोवाइस में आयोजित विश्व जलवायु सम्मेलन सीओपी24 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण की प्रमुख रिपोर्ट में कहा गया था कि वैश्विक उत्सर्जन फिर से बढ़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना अभी भी संभव है, लेकिन 1.5 डिग्री सेल्सियस अंतर को रखने की तकनीकी व्यवहार्यता घट रही है। यदि उत्सर्जन में अंतर 2030 तक बंद नहीं होता है, तो यह बेहद असंभव है कि 2 डिग्री सेल्सियस तापमान लक्ष्य तक अभी भी पहुंचा जा सकता है। 

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संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की जलवायु परिवर्तन पर पिछले दिनों जारी की गई एक अन्य रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि वैश्विक तापमान उम्मीद से अधिक तेज गति से बढ़ रहा है। कार्बन उत्सर्जन में समय रहते कटौती के लिए कदम नहीं उठाए जाते तो इसका विनाशकारी प्रभाव हो सकता है।
आईपीसीसी ने वैश्विक तापमान में वृद्धि को दो के बजाय 1.5 डिग्री से. रखने पर जोर दिया है। लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि एक तरफ जहां सारी दुनिया वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और प्रकृति के कम से कम खिलवाड़ करने के लिए जद्दोजहद कर रही है वहीं दूसरी तरफ अंधाधुंध प्रदूषण फैला रही दुनिया की लगभग सत्तर फीसदी बड़ी कंपनियां न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं, बल्कि ये जानकारी भी नहीं दे रही हैं कि उनके प्रोजेक्ट से जंगलों का कितना नुकसान हुआ है।
सीडीपी नाम की एक चैरिटी एजेंसी के एक और सर्वे में पता चला है कि जंगलों पर उच्च प्रभाव वाली 1,500 कंपनियों में से 70% कंपनियां अपने प्रभाव पर डेटा प्रदान करने में विफल रही हैं, जिनमें मोंडेलेज, नेक्स्ट और स्पोर्ट्स डायरेक्ट फीचर जैसे प्रमुख ब्रांड शामिल हैं।

सीडीपी एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है जो कंपनियों और सरकारों को अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने, जल संसाधनों की सुरक्षा और जंगलों की रक्षा करने के लिए प्रेरित करती है। सीडीपी, जिसे पूर्व में कार्बन डिस्क्लोजर प्रोजेक्ट कहा जाता था, वी मीन बिजनेस गठबंधन का संस्थापक सदस्य है।

सीडीपी की हाल ही में जारी नई रिपोर्ट, द मनी ट्रीज़ ने पाया कि वनों पर कॉर्पोरेट पारदर्शिता (2018 में 30% प्रकटीकरण दर) अन्य पर्यावरणीय मुद्दों जैसे कि जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा (दोनों 43%) से पीछे है। और ऐसा वनों की कटाई, जंगलों के पारिस्थितिक महत्व और जलवायु परिवर्तन को हल करने में उनकी भूमिका के साथ-साथ निवेशकों, खरीदारों और उपभोक्ताओं के बीच बढ़ी पर्यावरणीय चिंता के कारण व्यापार के लिए महत्वपूर्ण जोखिमों के बावजूद है। 

दुनिया भर की 1500 से अधिक ऐसी कंपनियां, जिन्हें समझा जाता है कि उनके कामकाज से वनों की कटाई पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है, उनसे 2018 में सीडीपी के रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेशकों और बड़े क्रय संगठनों द्वारा जंगलों के डेटा का खुलासा करने के लिए कहा गया था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से 70 फीसदी कंपनियां यह डेटा उपलब्ध कराने में विफल रहीं। दरअसल, कंपनियों को वनों की कटाई से जुड़ी चार वस्तुओं लकड़ी, ताड़ का तेल (पाम ऑयल), मवेशी और सोया के उपयोग पर खुलासा करने के लिए कहा गया था। 350 से अधिक कंपनियों ने पिछले तीन वर्षों (2016-2018) के लिए जवाब देने से इनकार कर दिया।

इनकार करने वाली कंपनियों में दुनिया की अग्रणी खाद्य उत्पाद वाली कंपनियों डोमिनोस, नेक्स्ट, और स्पोर्ट्स डायरेक्ट के साथ-साथ वैश्विक खाद्य निगम मोंडेलेज और इसके पाम ऑयल आपूर्तिकर्ता रिम्बुनान हिजाऊ समूह, जो सरवाक, मलेशिया के वर्षावन क्षेत्र में सबसे बड़ी पाम ऑयल की कंपनी है, शामिल हैं।
 

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