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एक वनवासी लोकप्रथा के बहानेः आओ प्रार्थना करें 2020 में बदल जाएं हमारे प्रतिमान और समाज के नायक

Ajay Khemariya अजय खेमरिया
Updated Thu, 02 Jan 2020 02:23 PM IST
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जल जंगल और जमीन के संरक्षण की चिंता
जल जंगल और जमीन के संरक्षण की चिंता - फोटो : Amar Ujala

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मप्र के झाबुआ औऱ अलीराजपुर जिलों के करीब पांच सौ से अधिक गांवों में " हलमा " (एक वनवासी लोकप्रथा) के जरिए जल सरंक्षण और सहकार आधारित ग्राम्य विकास की अद्धभुत कहानी लिखने वाले  पद्मश्री महेश शर्मा। चित्रकूट और सतना सहित आधे बघेलखंड में ग्राम्य विकास,नवदम्पति मिशन,और पुलिस हस्तक्षेप से मुक्त ग्राम्यसमाज व्यवस्था की नींव रखने वाले नानाजी देशमुख। जल जंगल,जमीन  और जानवर के महत्व को समझ कर स्थानीय गरीबी के समेकित प्रक्षालन के लिए काम करने वाले महाराष्ट्र के धुले जिले के चेतराम पवार।
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ऐसे पारंपरिक सेवा,और लोककल्याण के अनगिनत कामों में भारत के हजारों लोग निस्वार्थ भाव से लगे हैं। लेकिन इन्हें आज का भारतीय समाज आदर्श नहीं मान रहा है। मीडिया इन्हें जगह नहीं देता है। अगर देता भी है तो परिस्थिति जन्य। ऐसे प्रकल्पों में धन और कॉरपोरेट की ताकत नहीं है।वे अंग्रेजी के बड़े अखबारों को पहले पेज के विज्ञापन के अपीलीय चेहरे जो नही।


यही कारण है कि हाल  ही में फोर्ब्स के 100 प्रतिमान (आइकॉन)भारतीय चेहरों में एक भी सामाजिक क्षेत्र का व्यक्ति नहीं है। धन कमाने और मीडिया में मिले कवरेज को आधार बनाकर जिन 100 भारतीय आइकॉन को फोर्ब्स जैसी पत्रिका ने इस वर्ष जारी किया है उसमें सबसे ऊपर है विराट कोहली। नंबर दो पर अक्षय कुमार,फिर आलिया भट्ट दीपिका पादुकोण से लेकर अनुष्का शर्मा,महेंद्र सिंह धोनी,माधुरी दीक्षित, कटरीना कैफ,प्रियंका चोपड़ा,ऋषभ पंत,के आर राहुल,सोनाक्षी सिन्हा,के नाम शामिल हैं।

सेलिब्रिटीज की यह सूची दुनिया भर में हर साल जारी होती है। भारत के लिए इसका महत्व वैसे तो आम आदमी के सरोकार से समझे तो कोई खास नही है, क्योंकि कोई कितना कमाता है और कितना मीडिया में जगह हासिल करता है इससे उस बहुसंख्यक भारतीय को कोई लेना-देना नहीं है जो पेज थ्री और मेट्रो कल्चर से परे मेहनत मजदूरी कर अपने लिए दो जून की रोटी ही बमुश्किल जुटा पाता है। लेकिन भारत में पिछले तीन दशक से जिस नए मध्यम और निम्न मध्यमवर्गीय तबके का जन्म हुआ है उसके लिए इस सेलिब्रिटीज रैंकिंग का बड़ा महत्व है। यह  सेलिब्रिटी रैंकिंग भारत गणराज्य में इंडियन और हिंदुस्तान के विभाजन को स्पष्ट करते सामाजिक आर्थिक विकास की कहानी  भी है।
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