हिंदी दिवस 2019ः भारतीयों के व्यवहार और विचार की भाषा है हिंदी

भावना मासीवाल Updated Sat, 14 Sep 2019 05:04 PM IST
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भारतेंदु जी की यह उक्ति भाषा के संदर्भ में अपने देशकाल वातावरण से लेकर आज के समय में भी सार्थक है।
भारतेंदु जी की यह उक्ति भाषा के संदर्भ में अपने देशकाल वातावरण से लेकर आज के समय में भी सार्थक है। - फोटो : अमर उजाला

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निज भाषा उन्नति अहैं, सब उन्नति को मूल
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बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल
भारतेंदु जी की यह उक्ति भाषा के संदर्भ में अपने देशकाल वातावरण से लेकर आज के समय में भी सार्थक है। अपनी भाषा के बिना व्यक्ति का विकास संभव नहीं है फिर वह मातृभाषा हो या राष्ट्रभाषा। भाषा व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास की सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होती है।
यही माध्यम उसे जमीन से जोड़ता है और विकास की ओर बढ़ाता है। लेकिन वर्तमान समय में 'ज्ञान’ पर अंग्रेजी भाषा के वर्चस्व के कारण बच्चों पर अंग्रेजी भाषा को थोप दिया जाता है। उनकी प्राथमिक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा नहीं बल्कि विदेशी भाषा बना दी जाती है। ज्ञान का प्रवाह कठिन से सहज की ओर बहना आरंभ हो जाता है। जबकि भाषा के संबंध में मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि भाषा ज्ञान की परंपरा सहज से कठिन की ओर बढ़ती है। 
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